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“कचरा घोटाला” : मनपा प्रशासन की ओर से घोटाले पर चुप्पी क्यों ? : संजय पाटील

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संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 28 मई 2020 :  नागपुर. मनपा की ओर से कचरा संकलन का ठेका दिए जाने के बाद भारतीय विकास ग्रुप (बीवीजी) कम्पनी की ओर से किए जा रहे कचरा घोटाले को लेकर शिवसेना के शहर समन्वयक नितिन तिवारी की ओर से गत कुछ दिनों से लगातार तथ्य और सबूत पेश किए जाने के बावजूद भले ही मनपा प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही हो, लेकिन घोटाले की वास्तविकता उस समय उजागर हो गई, जब प्रतिदिन 600 टन कचरा संकलन का दावा करनेवाली कम्पनी की ओर से बुधवार को भांडेवाड़ी में केवल 365 टन कचरा ही लाया गया. कम्पनी द्वारा घोटाला किए जाने का मामला तूल पकड़ते ही अचानक 250 टन कचरा कम संकलित कैसे हो गया. इसे लेकर भी अब तिवारी ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए खुलासा करने की मांग की.

मनपा के अधिकारी की अधिकृत जानकारी
तिवारी ने कहा कि आम तौर पर लोगों पर इस तरह के आरोप लगाने के बयान कम्पनी और प्रशासन की ओर से दिए जाते हैं, लेकिन कचरा घोटाले की वास्तविकता का आलम यह है कि भांडेवाड़ी कचरा डंपिंग यार्ड के इंचार्ज मनपा के अधिकारी राठोड़ की ओर से ही बुधवार की शाम 6 बजे तक बीवीजी कम्पनी द्वारा केवल 365 टन कचरा लाए जाने की अधिकृत जानकारी दी गई, जबकि अब तक प्रतिदिन 600 टन कचरा लाने का दावा किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि वीएनआईटी के अध्ययन के अनुसार प्रतिदिन एक व्यक्ति द्वारा लगभग 350 ग्राम कचरा उत्पादित किया जाता है. एक घर में औसतन 5 व्यक्ति के अनुसार एक घर से 1750 ग्राम कचरा प्रतिदिन निकलता है. यदि 250 टन (25 करोड़ ग्राम) कचरा नहीं उठाया गया, तो 1,42,857 घरों से कचरा संकलन नहीं किया गया है.

50 लाख जुर्माने का प्रावधान
उन्होंने कहा कि इस तरह से डेढ़ लाख घरों से कचरा संकलन नहीं होने से शहर में कचरा संकलन की अव्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है. तमाम खामियों के बावजूद  साधी गई, यह खोज का विषय बना हुआ है. इसके अलावा अब टेंडर की शर्तों के अनुसार कचरा संकलन नहीं किए जाने के लिए रखी गई 50 लाख रु. जुर्माना की शर्त का पालन मनपा द्वारा किया जाएगा या नहीं, यह प्रश्न भी उपस्थित हो रहा है.

बीवीजी को बचाने मनपा की बड़ी लीपापोती

नागपुर.29 मई 2020 : कचरा घोटाला को लेकर बुरी तरह आरोपों में घिरी महानगरपालिका ने निजी ठेकेदार बीवीजी को बचाने के लिए बड़ी लीपापोती कर दी है. मई-2020 में जो घोटाला हुआ है, उसको छिपाने के लिए ठेकेदार से सफाई मांगने के बजाय मनपा के अधिकारी खुद ही क्लीन चिट बांटने में लग गये हैं. गुरुवार को मनपा की ओर से ड्रोन की एक तस्वीर जारी की गई जो अगस्त 2019 में ली गई थी. इस तस्वीर के हवाले से कहा गया कि जिस गड्ढे से कथित मिट्टी की तस्करी की बात कही गई है, वह बीवीजी को जमीन देने से पहले से ही खुदा हुआ था.

मुंढे के रहते घपला करने की हिम्मत
जानकारों का कहना है कि ऐसे अफसरों के हिम्मत की दाद देनी होगी कि मुंढे जैसे मनपा आयुक्त के पद पर रहते ही कचरा घोटाला को अंजाम दिया गया. मुंढे ने जब पदभार ग्रहण किया था, उसी समय उनको भांडेवाड़ी डम्पिंग यार्ड में चल रही बहुत सारी धांधलियों के बारे में जानकारी मिल गई थी. उन्होंने एक बार औचक कार्रवाई भी की थी, जिसके बाद काफी बातों पर कंट्रोल हो गया था. सर्वदलीय राजनेताओं की पहुंच वाली बीवीजी कम्पनी के अधिकारी मात्र इससे अछूते रहे. वे जानते हैं कि राजनेताओं का आश्रय होने के कारण उनपर कोई आंच नहीं आएगी.मनपा में बीजेपी की सत्ता और राज्य में महाविकास आघाड़ी की सत्ता होने के कारण सभी दलों में उनके शुभचिंतकों की भरमार है. पुणे कनेक्शन होने के कारण भी बीवीजी के बारे में कोई भी सहज ही बोलने की हिम्मत नहीं जुटाता. मात्र यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जब शिवसेना की ओर से पार्टी समन्वयक नितिन तिवारी ने इस घोटाले को उजागर किया और उसकी शिकायत मुंढे से की तो मनपा के अधिकारी मिलीभगत से चल रहे इस गोरखधंधे को रोक पाएंगे. इसके विपरीत अधिकारियों ने जांच के नाम पर डा. प्रदीप दासरवार को कथित गड्ढे का निरीक्षण करने की औपचारिकता निपटाई और 72 घंटे के भीतर ही बीवीजी को क्लीन चिट दे दी. उल्लेखनीय है कि शिवसेना की ओर से इस घोटाले में डा.दासरवार के भी मिलीभगत होने का आरोप लगाया था.

अब तैनात किये दो कर्मचारी
मनपा की ओर से बताया गया कि यह शिकायत मिलने के बाद अब कचरा संकलन पर बारीक नजर रखी जाएगी. एनडीएस के दो कर्मचारी तुरंत तैनात कर दिये गये हैं. यह कर्मचारी वजन के साथ-साथ कचरे पर भी नजर रखेंगे. जो कचरा बीवीजी द्वारा एकत्र किया जाएगा, उसे अलग रखा जाएगा और यदि उसमें मिट्टी या किसी भी तरह की दूसरी मिलावट पाई गई तो उस दिन का वजन रद्द कर ठेकेदार की कार्रवाई की जाएगी. मनपा की इस कार्रवाई पर भी शिवसेना की ओर से हैरानी व्यक्त की गई है. 70 दिनों तक रोज सैकड़ों टन मिट्टी मिश्रित कचरा जमा करने का गोलमाल करने वाले मामले की जांच को लेकर कोई आदेश नहीं दिया गया. मुंढे के निर्देश पर अतिरिक्त आयुक्त राम जोशी ने डा.दासरवार से ही छानबीन कराकर फटाफट मामले को निपटा दिया गया. शिवसेना का दावा है कि यदि 1950 रुपये प्रति टन का हिसाब लगाया जाए तो मनपा को औसत 15 से 20 लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है. एक तरफ मनपा की तिजोरी में कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं है. दूसरी ओर निजी ठेकेदार मनपा का खून चूस रहे हैं और उसके ही कुछ अधिकारी कुम्भकर्णी नींद में हैं.

रिमोट सेंसिंग से करें गड्ढे की जांच : शिवसेना
मनपा की लीपापोती को खारिज करते हुए शिवसेना की ओर से कहा गया कि यदि बीवीजी को क्लीन चिट ही देना है तो रिमोट सेंसिंग के द्वारा गड्ढे की जांच होनी चाहिये. अगस्त 2019 के गड्ढे का व्यास और मई 2020 के गड्ढे का व्यास में जमीन-आसमान का अंतर है. तिवारी ने कहा कि सिर्फ एक जगह ही नहीं सिटी में कई जगह पर बीवीजी द्वारा मिट्टी जमा की जा रही है. डिप्टी सिग्नल में हरीओम कोल्ड स्टोरेज के पास खाली मैदान भी इसी तरह की खुदाई है. इसके अलावा मानसून पूर्व नाला सफाई के द्वारा जो मिट्टी-कीचड़ निकल रही है, उसे भी बीवीजी कौड़ी के मोल पर खरीद कर कचरे में मिलाया जा रहा है. शिवसेना की ओर एक बार फिर महापौर संदीप जोशी और निगमायुक्त मुंढे से इस मामले की गहराई से जांचकर मनपा को हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाने की अपील की है.

साजिशन किया गया कचरा घोटाला

नागपुर.5-6-2020 शिवसेना शहर समन्वयक नितिन तिवारी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मेयर संदीप जोशी और अतिरिक्त आयुक्त राम जोशी से मुलाकात कर मनपा स्वास्थ्य अधिकारी व उपायुक्त घनकचरा प्रदीप दासरवार को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर उनकी नियुक्ति व कचरा घोटाले की जांच की मांग की है. तिवारी ने कहा कि कोरोना के समय में नागपुर जैसे महानगर में ऐसे स्वास्थ्य अधिकारी के पास प्रभार है जिसके पास नियमानुसार शैक्षणिक पात्रता नहीं है.महाराष्ट्र शासन के नियमानुसार मनपा में नियुक्त स्वास्थ्य अधिकारी एमबीबीएस, डीपीएच, एमडी होना चाहिए, परंतु सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान स्वास्थ्य अधिकारी की शैक्षणिक पात्रता एसएससी, डीएचएमएस मात्र है जो कि अयोग्य है. साथ ही दासरवार के पास उपायुक्त घनकचरा का अतिरिक्त प्रभार है जो कि महाराष्ट्र शासन के परिपत्रक दिनांक ५/९/२०१८ का उल्लघंन है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित मनपा में दासरवार जैसे अयोग्य अधिकारी को जानबूझकर तैनात कर कचरा घोटाले को अंजाम दिया गया है. शिवसेना द्वारा बीवीजी कम्पनी का कचरा मिट्टी घोटाला उजागर किया गया और मनपा आयुक्त तुकाराम मुंडे से प्रदीप दासरवार व डम्पिंग नियंत्रण अधिकारी राठौड़ की भी जांच की मांग की गई थी.

दोषी ने ही की जांच, दे दी क्लीन चिट
तिवारी ने बताया कि मामले के दोषी अधिकारी दासरवार ने खुद ही जांच अधिकारी के रूप में संबंधित कचरे घोटाले की जांच कर बिना तथ्यों के ही बीवीजी को प्रेस नोट जाहिर कर क्लीन चिट दे दी, जबकि बीवीजी के पार्किंग में खोदे हुए गड्ढे की तहसीलदार के पंचनामा अनुसार, पुनः ड्रोन द्वारा वास्तविकता की जांच करानी चाहिए थी. मामला राजस्व चोरी, बिना रॉयल्टी मिट्टी खुदाई का था. ऐसे ही बिना तथ्यों कि जांच-पड़ताल किए कम्पनी की तरफ से एकतरफा फैसला दासरवार द्वारा लिया गया. कचरे में मिट्टी मिलाने के वीडियो व फोटोग्राफ रूपी सबूत अतिरिक्त आयुक्त राम जोशी को देने के बावजूद इस पर पर्दा डालकर लीपापोती की गई.

4 टन की गाड़ी में 12 टन कचरा
तिवारी ने आरोप लगाया कि कचरे के वाहन की क्षमता ४ टन है तो उसमें १२ टन कचरा कहां से लाया. कचरा में ऐसा कौनसा पदार्थ मिलाया गया कि उसका वजन ४ टन से बढ़कर १०-१२ टन हो गया. मनपा के जगह की मिट्टी चोरी होने पर मामला पुलिस में क्यों दर्ज नहीं कराया गया. कम्पनी के वाहनों का जीपीएस रिकॉर्ड चेक क्यों नहीं किया गया. अर्थात इस पूरे कचरा भ्रष्टाचार में दासरवार की सक्रिय भूमिका व मिलीभगत है. शिष्टमंडल ने तत्काल दासरवार को पदमुक्त कर मामले की जांच की मांग की. अतिरिक्त आयुक्त राम जोशी ने मामले की खुद जांच करने का आश्वासन दिया. इस दौरान मुन्ना तिवारी, अक्षय मेश्राम, अब्बास अली, आशीष हाडगे, अभिषेक धुर्वे, निशा मुंडे उपस्थित थे.

कचरा घोटाले का पर्दाफाश

नागपुर : 29 जून 2020 : कचरा घोटाले को लेकर कुछ दिनों पूर्व शिवसेना की ओर से उजागर की गई जानकारी के बाद मनपा प्रशासन की ओर से केवल समिति बनाकर जांच की लिपापोती कर फाईल तो बंद कर दी गई, लेकिन रविवार को उस समय कचरा घोटाले का पर्दाफाश हो गया, जब विधायक विकास ठाकरे ने स्वयं छापामारी कर भांडेवाडी डम्पिंग यार्ड में चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया. छापामारी के दौरान कचरा लेकर पहुंचे ट्रकों में आधे से अधिक मिट्टी होने की वास्तविकता उजागर हुई.उल्लेखनीय है कि मनपा की ओर से हाल ही में 2 नई कम्पनियों को कचरा संकलन का कार्य सौंपा गया. बीवीजी और एजी एन्वायरो नामक इन कम्पनियों की शुरूआत से ही कार्यप्रणाली पर अनेक स्तर पर आपत्ति जताई जा रही है. विशेषत: इस संदर्भ में स्वास्थ्य समिति सभापति वीरेन्द्र कुकरेजा की ओर से भी दिशा निर्देश जारी किए गए थे, किंतु मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

वाहनों में कैसे आ रहा 13 टन कचरा
भ्रष्टाचार उजागर करते हुए विधायक ठाकरे ने बताया कि गत कुछ दिनों से कचरा संकलन कर रही कम्पनी के खिलाफ प्रतिदिन कई कर्मचारी शिकायत लेकर आ रहे थे. कर्मचारियों की ओर से भांडेवाडी में हो रही धांधली की जानकारी भी दी. जिसे लेकर मनपा प्र्रशासन को कई पत्र भेजे गए. लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है. अत: स्वयं ही इस भ्रष्टाचार को उजागर करने की ठान ली. उन्होंने कहा कि जहां से इन ट्रकों में मिट्टी भरी जाती है, वहां से लेकर डम्पिंग यार्ड तक जा रहे वाहनों और काटा करने तक के स्थल तक विडियो तैयार किया गया.साथ ही इन ट्रकों के चालकों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कराए गए. जिसमें उन्होंने कम्पनी के निर्देशों पर कचरे के साथ मिट्टी मिलाने की जानकारी दी. आश्चर्यजनक यह है कि ट्रकों ने काटा किया, उसमें एक-एक ट्रक में 13 टन कचरा भरा हुआ था. जबकि एक ट्रक में 3 टन से अधिक कचरा नहीं आ सकता है. जिससे खाली किए जा रहे ट्रक के स्थल पर जाकर इसका जायजा लिया गया. उस समय सभी भौंचक्के रह गए, जब ट्रकों में आधे से अधिक मात्रा में केवल मिट्टी और मलबा भरा हुआ था. 

एफआईआर करें, अन्यथा गृह मंत्री से शिकायत

विधायक ठाकरे ने कहा कि इस तरह से कम्पनियों द्वारा कचरे के नाम पर की गई धांधली से कुछ ही दिनों में लगभग 20 करोड़ का भ्रष्टाचार किया है. घटनास्थल पर स्वास्थ्य विभाग प्रमुख प्रदीप दासरवार को भी बुलाया गया था. लेकिन उन्होंने मौन साध रखा था. कम्पनी और अधिकारियों के आपसी सांठगांठ के चलते ही भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मनपा को इन कम्पनी और भ्रष्टाचार में शामिल संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए हैं.पुख्ता सबूत देने के बावजूद यदि मनपा की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो इसकी शिकायत गृह मंत्री अनिल देशमुख से की जाएगी. यहां तक कि आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा. छापामारी के दौरान पार्षद संजय महाकालकर, प्रशांत धवड और प्रमोदसिंह ठाकुर उपस्थित थे.

कचरा घोटाला विधायक ठाकरे ने की कार्रवाई की मांग

संजय पाटीलः नागपूर प्रेस मीडिया: 3 जुलै 2020 : नागपुर. मनपा की ओर से कचरा संकलन के लिए एजी एनवायरो  और बीवीजी कम्पनी को ठेका आवंटित किया. कचरे के नाम पर कम्पनियों द्वारा मिट्टी मिलाकर किए जा रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए छापामारी कर पुख्ता सबूत देने के बावजूद मनपा की ओर से कार्रवाई नहीं होने से अब विधायक विकास ठाकरे की ओर से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से शिकायत कर सम्पूर्ण मामले की जांच करने और कम्पनी तथा अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की. मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा कि प्रतिदिन कम्पनियों की ओर से 250 मेट्रीक टन कचरे में 300 टन मिट्टी मिलाई जाती है. जिसका वजन कर कचरे के लिए मिलनेवाली निधि प्राप्त की जाती है. अधिकारियों को प्रतिमाह 15 लाख की रिश्वत
एजी एनवायरो कम्पनी पर कड़ा आरोप लगाते हुए पत्र में उन्होंने बताया कि अक्षय नाम के कम्पनी के कर्मचारी की ओर से मनपा अधिकारियों को प्रति माह 15 लाख रु. की रिश्वत देने की जानकारी मिली है. कम्पनी व्यवस्थापन द्वारा कचरा संकलन में भारी भ्रष्टाचार करने के लिए 5 से 7 अधिकारियों की विशेष नियुक्ति कर रखी है. गत 7-8 माह से अबतक एजी एनवायरो और बीवीजी कम्पनी की ओर से मनपा अधिकारियों से सांठगांठ कर लगभग 20 करोड़ की मनपा को चपत लगाई है. कर के रूप में जनता से प्राप्त इस निधि तथा विकास के लिए मनपा को आवंटित निधि का दुरुपयोग हो रहा है. अत: कम्पनी और अधिकारियों द्वारा कचरा संकलन में किए गए भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की.शिकायत की जांच करें प्रशासन : महापौर
एक ओर विधायक ठाकरे द्वारा मुख्यमंत्री को शिकायत कर जांच करने की मांग की गई, वहीं दूसरी ओर महापौर संदीप जोशी ने भी ठाकरे की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अति. आयुक्त के माध्यम से सघन जांच करने के निर्देश मनपा आयुक्त मुंढे को दिए. उन्होंने कहा कि कचरा संकलन करने के बाद इसे भांडेवाडी ले जाया जाता है. कचरे का वजन करते समय इसमें मिट्टी मिलाकर अधिक वजन दिखाकर मनपा से पैसे वसूलने की शिकायत ठाकरे द्वारा की गई है. विधायक द्वारा की गई शिकायत की विस्तृत जांच होनी चाहिए. जांच कर विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर देने के आदेश भी उन्होंने दिए.

20 करोड़ का कचरा घोटाला

नागपुर : 12 जुलै 2020 : मनपा में कचरा घोटाला करने वाली एजी एनवायरो कंपनी के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने की है. उन्होंने गृहमंत्री अनिल देशमुख को मामले की पूरी जानकारी देते हुए निवेदन किया है कि मामले में लिप्त कंपनी के संचालकों और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जानी चाहिए.उन्होंने कहा कि 28 जून को खुद उन्होंने स्टिंग कर भांडेवाड़ी में कचरा घोटाले का पर्दाफाश किया था. कंपनी के दो कचरा गाड़ियों में कचरा की जगह मिट्टी, पत्थर, निर्माण कार्य का मलबा भरकर डंपिंग यार्ड में खाली किया गया था. मनपा कंपनी को कचरे की वजन के अनुसार भुगतान करती है. कंपनी द्वारा वजन बढ़ाने के लिए पत्थर-मिट्टी भरकर यार्ड में खाली किया जा रहा है. इसमें मनपा के संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत है जिसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने अब तक 20 करोड़ रुपयों के घोटाले की जानकारी गृहमंत्री को दी.

अब तक मामला दर्ज नहीं
ठाकरे ने कहा कि एजी एनवायरो कंपनी के कार्यकारी संचालक जोस जैकब, संचालक शिजू जैकब, शिजू एंथोनी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना था लेकिन मनपा के स्वास्थ विभाग के अधिकारियों की इसमें लिप्तता के चलते प्रशासन ने मामला अब तक दर्ज नहीं किया है. ठाकरे ने कहा कि कंपनी के कर्णधारों के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डा. दासरवार व डा. राठोड़ के खिलाफ मामला दर्ज कर घोटाले की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दें. मनपा की तिजोरी को करोड़ो का चूना लगाया गया है. यह रकम शहर के नागरिकों से टैक्स के रूप में वसूला जाता है. 

हैं सारे सबूत
ठाकरे ने गृहमंत्री को लिखा है कि भांडेवाड़ी स्टिंग में उन्होंने खुद घोटाला उजागर किया जिसकी पूरी विडियो रिकार्डिंग उनके पास बतौर सबूत उपलब्ध है. कचरा गाड़ी के ड्राइवर संघदीप रंगारी ौर अरविंद बोरकर व दिलीप सोनारे ने अपने बयान में घोटाले को कबूल किया है. वे सारे सबूत जांच एजेंसी को उपलब्ध करवा देंगे. 

नागपूर महापालिकेचे वैद्यकीय अधिकारी डॉ. प्रवीण मधुकर गंटावार वर अपसंपदेचा गुन्हा दाखल: संजय पाटील

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : 2 जुलै 2020 : नागपूर: नागपूर महापालिकेचे वैद्यकीय अधिकारी डॉ. प्रवीण मधुकर गंटावार (वय ४८) व त्यांच्या पत्नी शिलू प्रवीण गंटावार (वय ४५,दोन्ही रा. फॉर्च्युन रेसिडेन्सी,रामदास) यांनी गैरमार्गाने अडीच कोटींची मालमत्ता जमवल्याचे स्पष्ट झाले आहे. याप्रकरणात लाच लचुपत प्रतिबंधक विभागाने गंटावार दाम्पत्याविरुद्ध सीताबर्डी पोलीस स्टेशनमध्ये अपसंपदेचा गुन्हा दाखल केला आहे. गंटावार दाम्पत्याविरुद्ध गुन्हा दाखल झाल्याने महापालिका व वैद्यकीय क्षेत्रात्र प्रचंड खळबळ उडाली आहे.गंटावार दाम्पत्याने पदाचा गैरवापर करून कोट्यवधीची अपसंपदा जमविल्याची तक्रार २०१५ मध्ये लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाकडे करण्यात आली. त्यानंतर लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाने गंटावार दाम्पत्याविरुद्ध आलेल्या तक्रारीची उघड चौकशी सुरू केली. २००७ मध्ये गंटावार हे महापालिकेच्या इंदिरा गांधी रुणालयात वैद्यकीय अधिकारी पदावर कार्यरत होते. २००७ ते डिसेंबर २०१५ या कालावधीतील त्यांचे वेतन, उत्पन्न , चल व अचल संपत्ती, मालमत्ता विक्रीपासून मिळालेले उत्पन्न, मुदतठेवीवरील रक्कम, व उत्पन्नाच्या स्त्रोतांची चौकशी करण्यात आली. तसेच महापालिका, संबंधित बँक, शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, दुय्यम निंबधक कार्यालय, भारतीय आर्युविमा महामंडळ, मुलांच्या शैक्षणिक संस्थांकडून प्रवीण गंटावार यांच्याबाबत लाचलुचतप प्रतिबंधक विभागाने माहिती मागवली.
लाचलुचतप प्रतिबंधक विभागाने गंटावार दाम्पत्याच्या रामदासपेठेतील हॉस्पिटलच्या दस्तऐवजांचीही सखोल चौकशी केली. डॉ. प्रवीण गंटावार व त्यांच्या पत्नी डॉ. शिलू गंटावार यांनी लोकसेवक पदाचा गैरवापर करून दोन कोटी ५२ लाख ८५ हजार ७६२ रुपयांची अर्थात एकूण वैध उत्पन्नाच्या ४३ टक्के अधिक अपसंपदा जमविल्याचे चौकशीदरम्यान समोर आले. लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाच्या अधीक्षक रश्मी नांदेडकर, अतिरिक्त अधीक्षक राजेश दुद्धलवार यांच्या मार्गदर्शनाखाली निरीक्षक मोनाली चौधरी, लक्ष्मण परतेती व गीता चौधरी यांनी गंटावार दाम्पत्याविरुद्ध सीताबर्डी पोलिस स्टेशनमध्ये भ्रष्टाचार प्रतिबंधक अधिनियमान्वये अपसंपदेचा गुन्हा दाखल केला.

Dr.Praveen Gantawar son of Shree. Madhukarji Gantawar, (Retired Civil Engineer) Chandrapur.
Dr.Praveen Gantawar had Honored with Medical Professional i.e. M.B.B.S. & MS(General Surgery) from Government Medical College, Nagpur, Maharashtra from (1995-1999).
In the Year (1999-2000) he serves his Medical professional a respective Lecturer in Neuro Surgery Department in Super – Specialty Hospital, Nagpur, Maharashtra.
During his Medical Journey he had been in 3rd Merit Position in MCH Entrance Exam in the year 2000 in India, that was a remarkable achievement for him & his family members.
He also studied in ” Tata Memorial Cancer Hospital”, During these Medical Journey he serve his expert services in Neuro Surgery Department in K.E.M. Hospital Mumbai from (2001-2004).
Simultaneously he had worked in the Collaboration with MD Anderson Cancer Institute, Houstan & Memorial Sloan Katring Cancer Centre (MSKCC), Texas.
In the Year 2004 he had been honored with MCH in Cancer Surgery (Surgical Oncology) from Tata Memorial Cancer Hospital, Mumbai, Maharashtra.
Mayor suspends dyCMO Dr Gantawar, his wife for attendance irregularities
Nagpur: Mayor Sandip Joshi on Friday suspended Dr Praveen Gantawar and his wife Dr Neelu Chimurkar for their alleged role in attendance irregularities at the Indira Gandhi Rugnalaya with immediate effect and ordered standing committee Vijay Zalke’s committee to inquire into the allegations levelled by corporators in the adjournment motion as the general body meeting continued for the fifth day. The issue was raised by BJP corporator Parineeti Fuke.
Terming the ruling of the mayor illegal, Municipal commissioner Tukaram Mundhe told  that he will not implement the decision to suspend Dr Gantawar. To a query, he said he would discuss in details after minutes of the meeting come. He has said in the house that Dr Gantawar had already brought stay from the court against a complaint filed against him. His wife’s salary too was deducted for 81 days for remaining absent from the duty, the commissioner said.
Joshi also directed the civic administration to write to the state government to withdraw police complaint against Congress corporator Nitin Sathawane. Assistant municipal commissioner Vijay Humne had filed an FIR against Sathawane accusing him of stalling administration from carrying out work in Satranjipura containment zone. On June 22, leader of opposition in NMC and Congress corporator Tanaji Wanve had served show cause notice to party corporator Nitin Sathawane after he submitted adjournment motion against Mundhe.
The mayor ordered the administration to withheld all promotions and additional charges given to NMC officials by Mundhe.
The administration was also directed to lodge an FIR against unknown person after Congress corporator Harish Gawalbanshi informed the House that a message is being circulated on social media that he and BJP corporator Dayashankar Tiwari had insulted Sant Tukaram and hence they should be boycotted.
Disciplinary action was ordered against chief accounts and finance department officials for sitting on a file pertaining to installation of LED lights on 7,000 street light poles for 135 days. A probe was also ordered against promotion of municipal commissioner’s driver Pramod Hiwase as the civic chief’s personal assistant.
The mayor also directed the standing committee to also inquire allegations on violation of tender conditions in other four hospitals along with KT Nagar Covid care hospital. Joshi nominated additional municipal commissioner Sanjay Nipane on the committee.
Like previous four sittings of the general body, the fifth day too had its share of theatrics. Congress corporators including leader of opposition Tanaji Wanve, Praful Gudadhe, Sandip Sahare, Kamlesh Chowdhary staged a walkout claiming mayor’s inability to run the House smoothly. Their action was preceded by repeated disruption by MLC Pravin Datke while Mundhe issued a statement in the House.
Continuing from where he left on Thursday, Tiwari slammed the civic chief for brazenly violating the MMC act. To his demand, NMC secretary Ranjana Lade informed the House that municipal commissioner need to take leave approval from standing committee chairman. But Mundhe had ignored this rule too, Tiwari claimed. Mayor also found Mundhe and additional municipal commissioner Ram Joshi had not followed the service manual while proceeding on leave without informing the standing committee chairman.
Without structural audit of existing hospital buildings, Tiwari said following Mundhe’s directives, how the NMC carried out the civil works. Tiwari also alleged the civic body had wasted of taxpayers’ money for creating Covid care centers when he could have acquired private hospitals. Without reviewing NMC’s capacity, the NMC had strengthened five civic hospitals.
Superintending engineer Manoj Talewar informed the House that 817 works worth Rs426 crore have been stalled due to lockdown. He also drew attention of the House towards lack of manpower in NMC health department (medicines) resulting into deteriorating medical facilities in NMC-run hospitals. He also claimed that the civic body had violated tender conditions invited for strengthening five hospitals.
The discussion on adjournment motions  saw Wanve criticizing Mundhe for stalling development works. “The NMC financial condition is not so bad that the civic chief should stall even emergency works like repairing potholes, replacing damaged sewerage chambers,” he said. He also appreciated former chief minister Devendra Fadnavis for increasing state government grants to the NMC and said the civic chief should also try to bring in more funds from the state government.
Ruling party leader Sandip Jadhav said almost 58 corporators participated in the discussion on adjournment motions in the last five days and barring two corporators, all expressed anguish against Mundhe.

गंटावार को निलंबित करें :  दयाशंकर तिवारी

Dayashankar Tiwari
नागपुर. मनपा में कार्यरत गंटावार दम्पति के खिलाफ सभा में पुख्ता सबूत रखने और महापौर के आदेशों के बावजूद अबतक उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है. अब पुलिस ने भी गैरकानूनी सम्पत्ति को लेकर मामला दर्ज किया है. इसके अलावा उनकी गैरकानूनी और गैरजिम्मेदाराना कार्यप्रणाली को लेकर भी पुख्ता सबूत उजागर हुए हैं. ऐसे में गंटावार दम्पति को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग सत्तापक्ष नेता संदीप जाधव और वरिष्ठ पार्षद दयाशंकर तिवारी ने पत्र परिषद में की. अन्यथा जनांदोलन करने की चेतावनी भी उन्होंने दी. पत्र परिषद में स्थायी समिति सभापति पींटू झलके, दिव्या धुरडे आदि उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि मनपा की सभा में पार्षदों की ओर से गंटावार दम्पति के खिलाफ रोष जताया. जिसके बाद महापौर ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने के आदेश दिए, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ है.
मानसिक अपराधी है गंटावार
डा. गंटावार पर कड़ा आरोप लगाते हुए तिवारी ने कहा कि यह व्यक्ति मानसिक अपराधी है. जिसके कई सबूत है. वर्ष 2012 में गंटावार के अस्पताल में भंडारा के एक मरीज वाडीभस्मे को भर्ती कराया गया था. जिसके इलाज के लिए लाखों रूपए का बिल बनाया गया. यहां तक कि मरीज को डिस्चार्ज करने से पूर्व बिल का भुगतान करने पर अडे रहे. मजबूरन परिजनों ने लाखों रूपए का बिल अदा किया. लेकिन बिल अदा करते ही मरीज को डा. गंटावार की ओर से मृत घोषित कर दिया गया. जिसके इसके अलावा बीमा अस्पताल से संलग्नता लेकर वहां के मरीजों का इलाज अपने निजी कोलंबिया अस्पताल में कराने का सिलसिला शुरू किया. इसमें भी धोखाधड़ी का एक मामला उस समय उजागर हुआ, जब अन्न एवं औषधी विभाग के सहायक आयुक्त ने शिकायत की जांच करते हुए गंटावार पर आरोप उजागर किए. मरीज पर जिन दवाओं का इस्तेमाल भी नहीं किया गया, ऐसी महंगी दवाओं का उपयोग किए जाने का दावा करते हुए बिल प्रेषित किए गए. जिसे लेकर वर्ष 2015 में सहायक आयुक्त ने फौजदारी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी.
मनपा से हाजिरी रजिस्टर गायब
मनपा में गंटावार दम्पति द्वारा किए गए गैरकानूनी कारगूजारियों को उजागर करते हुए तिवारी ने कहा कि मनपा के इंदिरा गांधी अस्पताल में कार्यरत रहते हुए उनकी पत्नी शिलू गंटावार का लंबा चौड़ा राजनीतिक गतिविधियों का कार्यकाल रहा है. यहां तक कि कांग्रेस की ओर से उन्होंने मध्यप्रदेश के भैसदेही विधानसभा क्षेत्र से टिकट भी मांगा था. इसके अलावा कुछ इकाईयों पर उनके पदस्थ होने का बखान फेसबूक पेज पर उपलब्ध है. जबकि सरकारी कर्मचारी रहते हुए कोई भी राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकता है. इसी तरह नर्सिंग एक्ट और मनपा द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार मनपा में कार्यरत रहते हुए निजी अस्पताल चलाने की पाबंदी है. बावजूद इसके दम्पति निजी अस्पताल चला रहे हैं. पत्नी शिलू जिस इंदिरा गांधी अस्पताल में कार्यरत है, उस अस्पताल के डा. गंटावार इंचार्ज है. पत्नी की गैरहाजिरी में हाजिरी रजिस्टर पर डा. गंटावार स्वयं हस्ताक्षर करते थे. जिसके पुख्ता सबूत भी है. अब मामला उजागर होने के बाद वर्ष 2015-16 का हाजिरी रजिस्टर ही गायब हो गया है. इतने सबूत होने के बावजूद मनपा आयुक्त मुंढे द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है. यह समझ से परे हैं.
डॉ. प्रवीण गंटावारांच्या मागे लागली ‘ईडी’
नागपूर: 12 जुलै 2020 : डॉ. प्रवीण गंटावार व त्यांची पत्नी डॉ. शीलू गंटावार यांच्याभोवती लागलेला लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाचा (एसीबी) ससेमिरा संपण्याची चिन्हे नसताना आता सक्तवसुली संचालनालयाने (ईडी) त्यांच्यामागे चौकशीचा फास आवळला आहे. या तपासाकरिता ईडीने एसीबीकडून गुन्हयाचे दस्तऐवज ताब्यात घेतले असल्याची माहिती आहे.डॉ. गंटावार दाम्पत्य महापालिकेत कार्यरत आहे. त्यांनी आपल्या पदाचा गैरवापर करून मोठय़ा प्रमाणात अपसंपदा जमवल्याची तक्रार एसीबीला २०१४ मध्ये प्राप्त झाली होती. या तक्रारीच्या आधारावर एसीबीच्या अधिकाऱ्यांनी चौकशी करून १ जुलैला त्यांच्याविरुद्ध सीताबर्डी पोलीस ठाण्यात २ कोटी ५२ लाख ८५ हजार ७६२ रुपयांची अपसंपदा जमवल्याचा गुन्हा दाखल केला. या प्रकरणात डॉ. गंटावार दाम्पत्याने तात्पुरता अटकपूर्व जामीन मिळवला आहे. महापालिका आयुक्त तुकाराम मुंढे आणि महापौर संदीप जोशी यांच्यातील द्वंद्वामध्ये डॉ. गंटावार दाम्पत्याला लक्ष्य केले जात असल्याची चर्चा राजकीय वर्तुळात आहे. डॉ. गंटावार दाम्पत्याच्या घर व कार्यालयाची झडती घेतली असता कोटय़वधीच्या संपत्तीची माहिती समोर आली. यामुळे एसीबीकडून प्रकरणाचा तपास सुरू असताना आता ईडीने यात उडी घेतली आहे. ईडीने एसीबी कार्यालयातून गुन्हयासंदर्भातील सर्व दस्तऐवज ताब्यात घेतले असून चौकशी सुरू केली आहे. यामुळे प्रकरण लवकर संपण्याची चिन्हे  नसून डॉ. गंटावार दाम्पत्यामागे चौकशीचा फास अधिकच घट्ट होत आहे. ईडीच्या तपासात डॉ. गंटावार दाम्पत्याच्या प्रत्येक आर्थिक व्यवहाराची काटेकोर तपासणी करण्यात येणार असल्याची माहिती सूत्रांनी दिली.

काय भारत कोरोनाव्हायरस विषाणूचे पुढील जागतिक आकर्षण केंद्र आहे ? संजय पाटील

This is what 1918 Spanish Flu can teach India on how to tackle ...

संजय पाटील : नागपूर मीडिया प्रेस : 12 जुलै 2020 : भाषा : कोरोनाव्हायरसने हळू हळू भारतात पकडले, परंतु पहिल्यांदा झालेल्या संसर्गाच्या सहा महिन्यांनंतर त्याने रशियाला मागे टाकत जगातील तिस d्या क्रमांकाचा मोठा भार नोंदविला. जगातील दुस d्या क्रमांकाची लोकसंख्या, ज्यापैकी बहुतेक लोक शहरांमध्ये भरलेले आहेत, बहुधा हा देश नेहमीच जागतिक आकर्षण केंद्र ठरणार आहे. परंतु त्याच्या प्रकरणांमागील आकडेवारी संशयास्पद आहे, कारण भारत पुरेसा चाचणी करीत नाही आणि मृत्यूच्या असामान्य मृत्यूने वैज्ञानिकांना चकित केले आहे.
कोरोनाव्हायरसच्या प्रसाराबद्दल आम्हाला माहित असलेल्या पाच गोष्टी येथे आहेत.
१. भारतातील प्रकरणे झपाट्याने वाढत आहेत
अलीकडेच भारताने अनेक विक्रमी मालिका पाहिल्या असून रोज हजारो प्रकरणे रोज वाढत आहेत. कठोर ताळेबंद झाल्यानंतर पुन्हा उघडल्यानंतर आठवड्यातच जूनमध्ये त्याची पुष्कळशी पुष्टी झालेली प्रकरणे नोंदली गेली. 8 जुलै पर्यंत भारतात 742,417 पुष्टीकरण झाले. परंतु लोकसंख्येच्या संसर्गाचे प्रमाण किती खरे आहे हे अस्पष्ट आहे, असे व्हायरलॉजिस्ट शाहिद जमील यांनी सांगितले. मे महिन्यात सरकारने 26,000 भारतीयांचे यादृच्छिक नमुने घेतले, ज्यामध्ये असे दिसून आले की ०.73 % लोकांना व्हायरस आहे. काही तज्ञांना नमुना आकाराबद्दल आरक्षण आहे, परंतु काहीजण जसे की डॉ. जमील म्हणतात की त्यांना काम करावे लागणारे हे एकमेव देशव्यापी सूचक आहे.
डॉ. जमीलने सांगितले की, “जर आम्ही संपूर्ण लोकसंख्येला हे सांगायला सांगितले तर मेच्या मध्यामध्ये आम्हाला 10 दशलक्ष संक्रमण झाले असते.” भारतात दर दोन दिवसांनी दुप्पट वाढ होत असल्याचे पुष्टी दिल्यास सध्याचे एकूण प्रमाण 30 ते 40 दशलक्ष इतके होईल. पुष्टी केलेली प्रकरणे आणि वास्तविक संसर्ग यांच्यामधील अंतर प्रत्येक देशात अस्तित्त्वात आहे, परंतु भिन्न प्रमाणात. चाचणी हा एकच मार्ग आहे. डॉ. जमील म्हणाला, “जर तुम्ही आणखी चाचणी घेतली तर तुम्हाला अधिक सापडेल.” अलिकडच्या आठवड्यांत भारतात असेच घडले – सरकारने चाचण्या राबविल्यामुळे प्रकरणांची संख्या अचानक वाढली. 13 मार्चपासून भारताने 10 दशलक्षाहून अधिक चाचण्या केल्या आहेत, परंतु त्यापैकी निम्म्याहून अधिक चाचणी 1 जून नंतर झाली.
२. भारत केवळ चाचणी घेत नाही
भारतातील अधिकृत प्रकरणांची संख्या निरपेक्ष संख्येपेक्षा जास्त आहे, परंतु दरडोई बाबतीत ते तुलनेने कमी आहे. जगातील, दरडोई भारत दरडोईपेक्षा कित्येक प्रकरणे आहेत – ही बाब सरकारने नुकतीच निदर्शनास आणून दिली. पण, डॉ. जमील यांच्या मते, भारताचे दरडोई केसचे प्रमाण कमी आहे कारण ते खूपच कमी चाचणी घेतात. दरडोई केसलोडचे प्रमाण जास्त असलेल्या देशांशी भारताची तुलना करा आणि तुम्हाला आढळेल की ते देश अधिक चाचणी करीत आहेत. एनडीआयएचा केसलोड या प्रमाणात जवळजवळ अदृश्य आहे कारण त्याचा चाचणी दर कमी आहे.
परंतु आपण किती परीक्षा घेत आहात याबद्दलच नाही तर आपण कोणाची परीक्षा घ्याल हे देखील आहे. चाचणी घेण्यावर भारताचा भर आणि जोखीम असलेल्या प्रकरणांचा आणि त्यांच्या संपर्कासाठी चाचणी घेत असलेल्या लोकांच्या तलावावर लवकर शोध काढण्यावर – आणि त्यास व्यापक लोकसंख्येपर्यंत विस्तारण्यापासून रोखले गेले. कोविड -19 चाचणी धोरणाचा अभ्यास करणारे गणितज्ञ हिमांशु त्यागी आणि आदित्य गोपालन यांनी सांगितले की एकदा संसर्ग वेगाने पसरू लागला की चाचणी आणि शोध घेणे अपुरे पडते. हे प्रतिबंधित होण्यास मदत करते, परंतु समाजात न सापडलेल्या नवीन घटनांचा शोध लागला नाही, असे श्री त्यागी आणि श्री गोपालन म्हणाले.
तसे होण्यासाठी भारताला व्यापक लोकांची कसोटी घ्यावी लागणार आहे. पण  कसं चाचणी घेता येईल हे आपल्याला कळणार ? देशांमध्ये चाचणी क्रमांकाची तुलना करणे अवघड आहे कारण काही जण किती लोकांची चाचणी करतात हे मोजतात, तर काही इतर किती परीक्षांची तपासणी करतात हे मोजतात. भारत नंतरचे करतो आणि ही संख्या थोडीशी अतिशयोक्तीपूर्ण आहे कारण बहुतेक लोक एकापेक्षा जास्त वेळा चाचणी घेतात.
तर त्याऐवजी, एकच कन्फर्मेड केस शोधण्यासाठी किती चाचण्या घेतात हे मोजण्यास शास्त्रज्ञ प्राधान्य देतात. अधिक चाचण्या घेतात, आपण आपले जाळे कास्ट करत आहात. येथे, देशांमध्ये विषाणूचा प्रसार नियंत्रित करण्यात यशस्वी झालेल्या देशांच्या तुलनेत कमीच भाडे दिले जातात. आणि जितके व्यापकपणे आपण चाचणी कराल तितका आपला सकारात्मक दर कमी होईल – म्हणूनच न्यूझीलंड आणि तैवानचे दर 1% पेक्षा कमी आहेत. भारताचा सकारात्मक दर आता एप्रिलमधील 3.8 टक्क्यांवरून जुलैमध्ये 6..4 टक्क्यांपर्यंत आहे. जर हे वाढतच राहिले तर, कारण चाचणी अद्याप उच्च-जोखमीच्या आणि त्यांच्या संपर्कांच्या अरुंद पूलपुरते मर्यादित आहे.
3  भारताची पुनर्प्राप्ती संख्या आशादायक आहेत
या आकडेवारीवरून असे सूचित झाले आहे की भारतात ज्यांना विषाणूचे निदान झाले आहे ते त्यापासून मरण्यापेक्षा वेगाने बरे होत आहेत. डॉ. जमीलने सांगितले की हे आरोग्यविषयक यंत्रणेवरील ताण निर्धारित करते. सध्या, मृत्यू झालेल्या रुग्णांच्या किंवा रिकव्हरीच्या तुलनेत मृत्यू हळू हळू वाढत आहेत – परंतु जर हा दर कमी झाला तर यामुळे रुग्णालयांवर दबाव वाढेल आणि शक्यतो मृत्यू वाढेल. सावधानता अशी आहे की कमी चाचणी दर म्हणजे कमी नवीन प्रकरणे नोंदविली जातील आणि हळू वेगात. हे पुष्टी झालेल्या प्रकरणांच्या तुलनेत पुनर्प्राप्ती दर जलद करेल. जागतिक पातळीवर, भारताची पुनर्प्राप्ती वक्र इतर वाईट रीतीने प्रभावित देशांपेक्षा अधिक वेगवान दिसते – अशा परिस्थितीत, स्टिपर वक्र ही चांगली गोष्ट आहे. म्हणजेच कोविड -19. मधील रुग्ण अमेरिका किंवा ब्राझीलमधील रुग्णांच्या तुलनेत वेगाने बरे होत आहेत. वसुलीचा भारताचा वाटा – म्हणजेच, संपूर्ण वसूली केलेल्या देशातील एकूण पुष्टी झालेल्या प्रकरणांपैकी % जास्त आहे. जवळजवळ 60%, हे यूएसपेक्षा कितीतरी पुढे आहे, जिथे ते जिथे ते 27% आहे. जरी हे पुनर्प्राप्तीसाठी येते तेव्हा डेटा पॅचिंग असतो आणि परिभाषा बदलते. जो कोणी व्हायरसची सकारात्मक चाचणी घेतो आणि नंतर आठवड्यातून नंतर, नकारात्मक चाचणी घेतो, त्यासंदर्भात भारत परिभाषित करतो. काही देश केवळ रुग्णालयात दाखल झालेल्या प्रकरणांची गणना करतात जे पूर्ण पुनर्प्राप्ती करतात. सर्वात महत्त्वाचे म्हणजे या देशांमधील किती लोक आरोग्यप्राप्ती करीत आहेत याची पर्वा न करता, वसुलीचा भारताचा वाटा जास्त आहे. आणि म्हणूनच भारतातील मृत्यूची नोंद कमी झाली आहे.
4. भारतातील मृत्यूचे प्रमाण खूपच कमी आहे
कोविड -19  मध्ये भारतामध्ये आतापर्यंत सुमारे 20,160 मृत्यूची नोंद झाली आहे. परिपूर्ण संख्येमध्ये, जगातील आठव्या क्रमांकाचे हे आहे. परंतु लोकसंख्येच्या दशलक्षात ते कमी आहे. “पश्चिम युरोपमध्ये आपण जे पहात आहात त्याचा हा एक अंश आहे,” ब्रूकिंग्ज संस्थेच्या अर्थशास्त्रज्ञ आणि ज्येष्ठ सहकारी शमिका रवी म्हणाल्या.भारताच्या कोविड -19 मृत्यूच्या आकडेवारीभोवती बरेच प्रश्न निर्माण झाले आहेत आणि बहुतेक तज्ञ सहमत आहेत की त्यांचा कदाचित थोड्या वेळाने पाठपुरावा केला जाईल. परंतु डॉ. रवी म्हणाले की, भारत आणि युरोपमधील मृत्यू दरातील महत्त्वपूर्ण अंतर स्पष्ट केले नाही. ती म्हणाली, “जर आमच्याकडे मृत्यूचे प्रमाण जास्त असेल तर कितीही डेटा ते लपवू शकला नसता – इतक्या मृत्यूंपेक्षा ते 20-40 पट जास्त आहेत,” ती म्हणाली. पाकिस्तान किंवा इंडोनेशियासारख्या इतर देशांप्रमाणेच भारताचा मृत्यू मृत्यू कमी आहे. कोविड -19 प्रामुख्याने वृद्धांना ठार मारतात या सिद्धांमधे या देशात संसर्ग होण्याचे विषाणूचे प्रमाण कमी प्रमाणात पसरले आहे. या देशांमध्ये प्रसारित होणा-या विषाणूचे प्रमाण कमी आहे. डॉ. जमील म्हणाले की, “प्रत्येक देश आपला डेटा चुकवू शकत नाही.” “इतर संसर्गाच्या मोठ्या प्रमाणामुळे या लोकांमध्ये जन्मजात प्रतिकारशक्ती जास्त असू शकते. परंतु त्यांचे मृत्यूचे प्रमाण इतके कमी का आहे हे आम्हाला अद्याप माहित नाही.
5. प्रत्येक भारतीय राज्य आपल्याला एक वेगळी कथा सांगते
यूएस किंवा युरोपियन युनियनप्रमाणेच कोरोनाव्हायरसची आकडेवारी भारतातील सर्व राज्यांत मोठ्या प्रमाणात बदलते. दिल्ली, महाराष्ट्र आणि तामिळनाडू अशी तीन राज्ये सध्या देशाच्या एकूण पैकी 60% आहे. आणि काही भागात प्रकरणांची संख्या घटत चालली आहे, तर इतरांमध्ये त्यांची संख्या वाढली आहे. दक्षिणेकडील कर्नाटक आणि तेलंगणात ताजी वाढ झाली आहे. आंध्र प्रदेशमधील आणखी एक दक्षिणेकडील राज्यातही सातत्याने आणि तीव्रतेने वाढ होत आहे.या विषाणूविरूद्ध भारताचा प्रतिसाद आतापर्यंत केंद्रीकृत झाला आहे आणि तो बदलण्याची गरज आहे, असे तज्ज्ञांनी सांगितले. डॉ. जमील म्हणाले, “कोरोनाव्हायरस विरूद्ध यशस्वी रणनीती अंमलात आणण्यासाठी भारताला” जिल्ह्यात विभागून घ्यावे लागेल “, कारण डॉ. जमील म्हणाले की,” दुसर्‍या राष्ट्रीय लॉकडाउन मागील तुलनेत कमी प्रभावी ठरू शकतील. ” डॉ. रवी यांनी दिलेल्या माहितीनुसार राज्यस्तरीय स्नॅपशॉट ऐवजी अधिका n्यांना दाणेदार, स्थानिक डेटा आवश्यक आहे. ती म्हणाली, “प्रत्येक ब्लॉकमध्ये आपल्याला लक्षणे आहेत की नाही हे आम्हाला माहित असले पाहिजे.”

शिक्षण विभागाच्या लिपिकाला अटक: संजय पाटील

Maharashtra Anti Corruption Bureau | IndiaToday

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया :  8 : 7: 2020 : नागपूर. लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाने शालेय शिपायांना अनुदानाची फाइल देण्याच्या बदल्यात शिक्षण विभागाच्या एका वरिष्ठ वरिष्ठ लिपिकला 50000 रुपयांची लाच मागितली. अटक करण्यात आलेल्या आरोपीचे नाव उपेंद्र शरदचंद्र श्रीवास्तव (वय 52) असे आहे. उपेंद्र हे नागपूरच्या शिक्षण उपसंचालक कार्यालयात वरिष्ठ लिपीक पदावर कार्यरत आहेत. तक्रारदार चंद्रगाव येथील कोरगाव, अंतारगाव येथील रहिवासी आहे. त्याचबरोबर, प्रांजली माध्यमिक विद्यालय नंदपा येथील शिपाई आहे. पीडित मुलाच्या नियुक्तीच्या वेळी शाळेला अनुदानित केली गेली नव्हती.
1 जुलै 2016 रोजी शाळेला शासनाकडून 20 अनुदान मिळण्यास सुरुवात झाली. शासनाच्या निर्णयानुसार पीडित मुलीने शाळेच्या मुख्याध्यापकामार्फत शिक्षण उपसंचालक कार्यालय, नागपूर यांना 20 अनुदान देण्यास अर्ज केला. डिसेंबर 2018 मध्ये पीडितेने अर्ज सादर केला, परंतु अनुदानाबाबत कोणताही निर्णय झाला नाही. पीडितेने विभागातील वरिष्ठ लिपीक श्रीवास्तव यांची भेट घेतली. श्रीवास्तव यांनी पगाराची फाइल देण्यासाठी 50,000 रुपयांची लाच मागितली.
आधीपासूनच अनुदानावर अवलंबून असलेल्या पीडित कडून लाच मागितल्याबद्दल त्यांनी लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाकडे तक्रार केली. निरीक्षक संजीवनी थोरात यांनी मागणीची पडताळणी केली. मंगळवारी रात्री श्रीवास्तवने पीडितेला बालाजीनगर चौकात भेटण्यासाठी बोलावले. त्याने लाचेची रक्कम घेताच एसीबीच्या पथकाने त्याला पकडले.
श्रीवास्तव यांच्या विरोधात हुडकेश्वर पोलिस ठाण्यात गुन्हा दाखल करण्यात आला. एसपी रश्मी नांदेडकर व अतिरिक्त एसपी राजेश दुदलवार यांच्या मार्गदर्शनाखाली निरीक्षक संजीवनी थोरात व दिनेश लबाडे यांनी त्यांच्या पथकासह ही कारवाई केली.

रिश्वतखोर उपेंद्र श्रीवास्तव  निलंबित
11 जुलै 2020 : नागपुर : चप्रशींकडून पन्नास हजार रुपयांची लाच स्वीकारताना अध्यापक उपसंचालक कार्यालयाचे मुख्य लिपीक उपेंद्र शरदचंद्र श्रीवास्तव (52) यांना दोन दिवसांपूर्वी एसीबीच्या पथकाने अटक केली. यानंतर अध्यापन उपसंचालक अनिल पारधी यांनी कारवाई करून लिपिकाला सेवेतून निलंबित केले. चंद्रपूर जिल्ह्यातील कोपर्णा तहसीलच्या प्रांजणी माध्यमिक विद्यालयात शिपाई म्हणून काम करणा A्या एका व्यक्तीने याबाबत तक्रार दिली होती. नियुक्तीच्या वेळी या शाळेला मदत केली गेली नव्हती.

1 जुलै 2014 पासून या शाळेला 20 टक्के अनुदान प्राप्त झाले. त्यानुसार अनुदानाचा फॉर्म भरुन या कर्मचार्‍याने डिसेंबर 2018 मध्ये हा प्रस्ताव शाळेच्या मुख्याध्यापकामार्फत शिक्षण उपसंचालक, नागपूर यांच्या कार्यालयात पाठविला. हा प्रस्ताव मंजूर करण्यासाठी तक्रारदाराने शिक्षण उपसंचालक, नागपुरात तैनात मुख्य लिपीक उपेंद्र श्रद्धवस्तव यांची भेट घेतली.

कर्मचार्‍याच्या पगाराची फॉर्म ए आणि बीची फाइल देण्यासाठी उपेंद्र यांनी 50 हजार रुपयांची मागणी केली. कर्मचार्‍यांनी याची नोंद लाचलुचपत प्रतिबंधक विभागाकडे केली. एसीबीच्या पथकाने सापळा रचला आणि श्रीवास्तवला रंगेहाथ पकडले. यानंतर अध्यापन उपसंचालक कार्यालयानेही श्रीवास्तव यांना सेवेतून निलंबित केले आहे.

उत्तर नागपुर में कीचड़, गंदगी से परेशान नागरिक, प्रभाग 2, 3 के बुरे हाल : संजय पाटिल

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 10 जुलाई 2020 : नागपुर. उत्तर नागपुर में प्रभाग क्रमांक 2 बुधवर बाजार रोड़ कपिल नगर, एनआईटी क्वाटर, प्रभाग क्रमांक 3 के अंतर्गत रानी दुर्गावती चौक के आसपास का क्षेत्र विकसित क्षेत्रों में माना जाता है लेकिन यहां पर तैयार की गईं मूलभूत सुविधाएं इतने कमजोर नियोजन के साथ बनाई गई हैं कि लोगों के उपयोग से पहले ही ये जर्जर होकर टूट रही हैं. मनपा के दायरे में आने के बावजूद यहां पर पानी निकासी से लेकर सड़क तक की समस्या से लोग जूझ रहे हैं. नागरिकों में सुविधाएं न मिलने के कारण नाराजगी है और लोग प्रशासन की लापरवाही को लेकर असंतुष्ट हैं.उल्लेखनीय है कि उत्तर नागपुर में बुधवर बाजार रोड़ कपिल नगर,एनआईटी क्वाटर, रानी दुर्गावती चौक, रिंग रोड और बिनाकी मंगलवारी के बीच के दायरे में नागरिकों की काफी घनी वसाहत है. इसमें छोटे-मोटे काम, दूकान, हाथठेला, छोटी-मोटी नौकरी आदि करने वाले नागरिक बड़ी संख्या में निवास करते हैं. छोटा सा इलाका होने के बावजूद यहां पर जनसंख्या काफी है. यह इलाका मनपा के प्रभाग क्रमांक 2, 3 के अंतर्गत आता है तथा इसके अंतर्गत कपिल नगर,  निजामुद्दीन कॉलोनी, धम्मदीप नगर, आनंद नगर, वर्कर लेआउट, संजय गांधी नगर, इंदिरा माता नगर, रानी दुर्गावती नगर आदि बस्तियां आती हैं. कुछ साल पहले इन बस्तियों में नागरिकों को सड़क, बिजली, पानी, गडर लाइन आदि सुविधाएं दी गई थीं. लेकिन सड़क और पानी निकासी की लाइन इन वर्षों में टूटकर नष्ट हो चुकी हैं. नालियों पर लगे ढक्कन जगह-जगह टूट चुके हैं. कई मकानों को गंदा पानी बहकर खुले प्लाटों में जमा हो रहा है जिससे मच्छर पनप रहे हैं. कुछ दिन पहले यहां पर सड़क बनाने के लिए बेस तैयार किया गया था लेकिन उस काम को छोड़ दिया गया है. इन दिनों वर्षा होने से यहां पर कीचड़ की समस्या पैदा हो गई है. इस क्षेत्र के नागरिक शेख शहनवाज, शेख इशफाक, नियाज अंसारी, शेख हामिद, समीर शेख, राहुल चौरे, रूपेन्द्र सिना, संजय पाटिल सहित सुरेश रामटेके, किशोर गजभिए, अशोक मिश्रा, दिगंबर बागड़े, नीलकंठ वानखेड़े, राजू मेश्राम, कुणाल पाटिल, पराग शेंडे, जैसे हमारे पास 52 लोग हैं। इस क्षेत्र के लोगों ने एनएमसी कमिश्नरी को दिनांक 03/02/2020 को शिकायत की।अन्य नागरिकों ने मनपा से शीघ्र ही नया रोड बनाकर देने की मांग की है.हमने 06/03/2020 के गए कमिशनर से पत्र भी प्राप्त किया। पत्र क्रमांक ई ई (जेड -9) एनएमसी / 176/2020 कि वे ऐसा करने का वादा करते हैं, लेकिन अभी तक नहीं किया गया है

Sharad Pawar , “Don’t take voters for granted, the common man is wiser than the politicians.” : Sanjay Patil

Sharad Pawar meets Uddhav Thackeray for second time in four days ...

Sanjay Patil : Nagpur Press Media  : 11 July 2020 : Agency: NCP President Sharad Pawar has said that politicians should not take voters for granted as even powerful leaders like Indira Gandhi and Atal Bihari Vajpayee had been defeated in elections. Criticising former Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis over his ‘Mi punha yein’ (I will come back) refrain during the last year’s assembly polls, Pawar said that voters thought that this stance smacked of arrogance and felt that they should be taught a lesson.

Pawar also said that that there was not an “iota of truth” in reports about differences in the three ruling allies- Shiv Sena, NCP and Congress- that are part of the Uddhav Thackeray-led Maha Vikas Aghadi (MVA). The former Union minister said this in an interview by Shiv Sena leader and Executive Editor of party mouthpiece ‘Saamana’. The first of the three-part interview series was published in the Marathi daily on Saturday.

This is for the first time that a non-Shiv Sena leader has featured in a marathon interview series in the party mouthpiece. It has so far published marathon interviews of late Bal Thackeray and Uddhav Thackeray. Replying to a query over BJP’s defeat in the last assembly polls in the state, Pawar said, “In a democracy, you cannot think that you will remain in power eternally. Voters will not tolerate if they are taken for granted. Powerful leaders mass base with like Indira Gandhi and Atal Bihari Vajpayee had been defeated.
“It means that in terms of the democratic rights, the common man is wiser than the politicians. If we politicians cross the line, he teaches us a lesson. Therefore, people do not like the stand that ‘we will come back to power’,” he said. “No politician should take people for granted. Nobody should take a stand that he would return to power. People thought that this stand smacks of arrogance and hence feeling grew among them that they should be taught a lesson,” Pawar said.


He said the change of government in Maharashtra was not an accident. “People of Maharashtra voted in line of the sentiment prevailing in the country during the national elections. But the mood changed during the assembly polls. Even though BJP did well in the Lok Sabha polls, it fared poorly in assembly elections in different states. Even people of Maharashtra voted for a change,” he said.


Replying to a query over his reported differences with CM Thackeray on the lockdown in the state, Pawar said, “Absolutely not. What differences? For what? During the entire period of lockdown, I have had excellent communication with the chief minister and continue to do so.” Pawar, who played a key role in bringing together the Sena, Congress and NCP for formation of government in the state in November last year, blamed the media and said sarcastically that the news gathering activity had been hit by the coronavirus-induced lockdown and they had the responsibility to fill the pages of newspapers.


“I have been reading reports of growing differences among the three allies, but there is not an iota of truth in that,” he said. Speaking about the style of functioning of Shiv Sena founder Bal Thackeray and Uddhav Thackeray, Pawar said, “Although Balasaheb was never in the seat of power, he was the driving force behind the power. He got power in Maharashtra due to his ideology.
“Today, the government is not because of the ideology. But the responsibility of implementing that power now lies with Uddhav Thackeray,” he said.

अधर में लटका भंडारा जिले का अस्पताल का निर्माण : संजय पाटील

Construction Work

संजय पाटील: नागपूर प्रेस मीडिया: 11 जुलै 2020 : भंडारा. जिले में महिला अस्पताल का भूमिपूजन हुए कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अस्पताल का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है. 7 वर्ष से इस अस्पताल के निर्माण को लेकर तरह-तरह के प्रयास किए गए. इसी दौरान कोरोना का संकट उत्पन्न होने से प्रस्तावित अस्पताल का निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इस बात को लेकर चर्चाएं शुरू हैं.
विभाजन के बाद से शुरू हुई थी मांग

भंडारा जिले का विभाजन होने के बाद भंडारा तथा गोंदिया  2 जिले बने. जिले के विभाजन के बाद से ही भंडारा जिले में महिला अस्पताल का निर्माण करने की मांग शुरू हो गई थी और इस अस्पताल के निर्माण के लिए जगह देख कर भूमिपूजन भी किया गया. विधायक नरेंद्र भोंडेकर की ओर से लगातार की जा रही मांग के बाद आघाड़ी के शासन काल में भंडारा जिले में स्वतंत्र महिला अस्पताल को मंजूरी मिली. इसके लिए निधि भी मंजूर की गई, लेकिन अस्पताल के लिए उचित स्थान नहीं मिल रहा था.

 जगह खोजने में लगा वक्त

अस्पताल के लिए जगह खोजने में काफी वक्त लग गया. सरकारी जगह पर नजरें गड़ानेवालों की ओर से लगातार जगह को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रहा. अंतत: भारी खींचतान के बाद 2 वर्ष पूर्व नगर परिषद के जल शुद्धिकरण केंद्र के पास स्थित जगह पर महिला अस्पताल के लिए जगह को मंजूरी मिल गई. उसके बाद तत्कालीन पालक मंत्री डा. परिणय फुके के हाथों इस जगह का भूमि पूजन किया गया. उसके बाद निविदा प्रक्रिया को पूरा कर अस्पताल निर्माण कार्य के शुभारंभ की घोषणा भी की थी, लेकिन निर्माण कार्य के शुभारंभ की घोषणा सिर्फ घोषणा ही बनकर रह गई. बताया जा रहा है कि जिला महिला अस्पताल के निर्माण कार्य की प्रक्रिया अभी शुरू होने ही वाली थी कि कोरोना महामारी का संकट आ गया, जिस वजह से एक बार फिर जिला अस्पताल का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है.

नागपूर, चंद्रपुरमें बिजली बिल वापसी आंदोलन : संजय पाटील

विदर्भ राज्य आंदोलन समिति का बिजली बिल वापसी आंदोलन

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : 11 जुलै 2020 : नागपुर. विदर्भ की जनता को लूटने वाले अन्यायकारण बिजली बिल के विरोध में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की ओर से 10 जूलाई को दोपहर बिजली बिल वापसी आंदोलन किया जा रहा है. मुख्य संयोजक राम नेवले ने बताया कि कोरोना एक नैसर्गिक आपदा है और इस आपदा काल का बिजली बिल सरकार को ही भरना चाहिए.कोरोना काल के बिजली बिल को संपूर्ण विदर्भ भर में बिजली कार्यालयों में जाकर वापस लौटाया जाएगा. इसी के साथ ऊर्जामंत्री नितिन राऊत के निवास स्थान पर विरास का एक शिष्टमंडल बिजली बिल वापस लौटाएगा और उन्हें सूचना दी जाएगी कि कोई भी बिजली बिल जमा नहीं करेगा.यह आंदोलन पूरे विदर्भ के 11 जिलों में 120 तहसीलों में होगा. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मास्क लगाकर उक्त आंदोलन किया जाएगा. साथ ही कोरोना के बाद भी 200 यूनिट तक बिजली माफ करने, बिजली दर कम करने, कृषि पंपों के बिजली बिल खत्म करने, विदर्भ को बिजली प्रकल्पों के प्रदूषण से मुक्त करने की मांग भी इस दौरान की जाएगी. सभी विदर्भवासियों से इस आंदोलन में शामिल होकर अपने बिजली बिल वापस करने की अपील नेवले ने की है.

चंद्रपुर. लाकडाउन काल में 24 मार्च से सभी व्यवसाय, रोजगार बंद थे इसलिए सभी बिजली बिल माफ करें और आगामी समय में 200 यूनिट तक नि:शुल्क बिजली देने समेत अन्य मांगों के लिए आज विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की ओर से जिले की 10 तहसील में बिजली बिल वापसी आंदोलन किया गया. गडचांदुर के महावितरण कार्यालय में नागरिकों ने प्रशासकीय नियम का पालन कर भारी भरकम राशि वाले बिल लौटाये. आज शुक्रवार की दोपहर 12 बजे जिले के चंद्रपुर, राजुरा, कोरपना, गोंडपिपरी, जिवती, भद्रावती, वरोरा, मूल, सावली और पोंभूर्णा तहसील में आंदोलन किया गया. जिसमें लाकडाउन काल का बिजली बिल माफ करें, 200 यूनिट तक नि:शुल्क बिजली आपूर्ति, बिजली उत्पादन खर्च 2.50 रुपए होने के बावजूद घरेलू उपयोग के बिजली का बिल 7.50 रुपए लगाया जाता है और ओद्योगिक उपयोग के लिए यह दर 11.50 रुपए है. दोनों की दर कम करें, पिछले तीन वर्षो से विदर्भ आकाल की चपेट में है. इसलिए कृषि पंपों का संपूर्ण बकाया बिल माफ करें, कृषि को पूर्ण समय पूर्ण दाब से बिजली आपूर्ति, मांगने वालों को तुरंत बिजली आपूर्ति और विदर्भ को लोडशेडिंग से मुक्त करने की मांग के लिए आंदोलन किया. गडचांदुर आंदोलन में शेतकरी संगठना के प्रभाकर दिवे, मदन सातपुते, दीपक चटप, प्रवीण एकरे, आशिष मुसले, वामनराव बोबडे, अरुण रागीट, कालीदास उरकुडे, दिलीप आस्वले, वासुदेव गौरकार, स्वप्निल झुरमुरे आदि शामिल थे.भद्रावती में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की ओर से तीन महीने का बिजली माफ करने के लिए तहसीलदार और बिजली मंडल इंजीनियर के माध्यम से निवेदन प्रेषित कर मुख्यमंत्री से उक्त मांग की है. लाकडाउन की वजह से किसान, खेतिहर मजदूर और सामान्य नागरिकों के पास कोई रोजगार न होने से उनकी आर्थिक स्थित खराब है. इसलिए बिजली बिल माफ करने की मांग की है. इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष प्रा. विवेक सरपटवार, सचिव राजु बोरकर, पार्षद सुधीर सातपुते, सिध्दार्थ सुमन, अविनाश मानकर, एस.एम. पायपरे, बाबा बिपटे, विशाल कांबले, सुभान सौदागर, राजु गैनवार, प्रकाश आस्वले, लक्ष्मण बोढाले, मारोतराव रामटेके, विठ्ठल बदखल आदि उपस्थित थे. चंद्रपुर में समिति के पदाधिकारियों ने आज बिजली वितरण कंपनी के मुख्य कार्यालय के सामने जोरदार नारेबाजी कर बिजली बिल वापसी आंदोलन किया. एमएसईबी इंजीनियर के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे को मांग का निवेदन प्रेषित किया है. आंदोलन में समिति के जिलाध्यक्ष किशोर पोतनवार, नितीन भागवत, अनिल दिकोंडवार, दिवाकर मानुसमारे, सुनिल देशपांडे आदि कार्यकर्ता शामिल थे.राजुरा में अधि. मुरलीधर देवालकर, पंढरी बोंडे, कपिल इद्दे, मधुकर चिंचोलकर, प्रभाकर ढवस, वरोरा में अधि. शरद कारेकर, कोरपना में अरुण नवले, रमाकांत मालेकर, बंडु राजुरकर, अविनाश मुसले, सावली में गोपाल रायपुरे, मनोहर गेडाम, मूल में कवडू येनप्रेडीवार, पोंभूर्णा में गिरीधरसिंह बैस, टेकाम, बबन गोरंटीवार और जिवती में निलकंठ कोरांगे, अधि. श्रीनिवास मुसले, शब्बीर जागीरदार, सैयद इस्माईल आदि ने आंदोलन किया.किसान नेता वामनराव चटप ने कहा कि लाकडाउन के काल में व्यवसाय, उद्योग, कारोबार पूर्णत: ठप पडे थे. इसके साथ रोजगार भी बंद पडे थे. इसलिए इस काल के घरेलू, व्यवसायिक, उद्योजक और कारोबारियों का 24 मार्च से 3 महीने के बिल माफ किया जाये. इसके लिए विदर्भ के 11 जिलों में आंदोलन कर सरकार का ध्यानाकर्षण किया है.

नागपुर. पिछली सरकार ने वर्ष 2015 में गांधी जंयती के निमित्त राज्य में महावितरण के चार प्रादेशिक कार्यालय पुणे, औरंगाबाद, नागपुर व कल्याण में शुरु किया था. कल्याण व औरंगाबाद कार्यालयों में सह व्यवस्थापकी संचालक के रूप में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की गई और नागपुर व पुणे में बिना आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी. लेकिन इन्हें कोई अधिकार ही नहीं दिया गया था. जिससे पिछले 5 वर्षों से ये चारों प्रादेशिक कार्यालय सफेद हाथी साबित हो रहे थे.अब ऊर्जामंत्री नितिन राऊत ने इस संदर्भ में हुई बैठक में कहा है कि प्रादेशिक कार्यालयों को भी अधिकार दिए जाएंगे जिससे वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले बिजली ग्राहकों के हित में तेजी से कार्य कर सकें. अब तक अधिकार नहीं होने के कारण योजनाओं को अमल में लाने में उन्हें दिक्कतें आ रही थीं.अब ट्रांसफार्मरों के वितरण, दुरुस्ती, ट्रांसफार्मरों के तेल साहित्य के लिए टेंडर निकालने का अधिकार दिये जाएंगे. इससे एचवीडीएस योजना के तहत नये कृषिपंप कनेक्शन देने के लिए तेजी से ट्रांसफार्मर वितरणमें सुविधा होगी. इस बैठक में उर्जा विभाग के प्रधान सचिव दिनेश वाघमारे, औरंगाबाद प्रादेशिक विभाग के सहव्यवस्थापकीय संचालक सुनील चव्हाण, संचालक दिनेशचंद्र साबू, सतीश चव्हाण, भालचंद्र खंडाईत व अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

नागपुर की तीन किशोरियां पेंटिंग बेच लोगों की मदद कर रही हैं : संजय पाटिल

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 10 जुलाई 2020 : नागपुर, नौ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के नागपुर जिले की तीन किशोरियां अपनी कला का जौहर दिखा कोविड-यौद्धाओं, मानसिक रूप से अक्षम बच्चों और एक अनाथालय के लिए पैसे इकट्ठे कर ही हैं।सौम्या डालमिया (17), प्रेशा भट्टाड (15) और दित्या थापर ने लॉकडाउन का सही इस्तेमाल करते हुए 44 पेंटिंग बनाई है और इसे बेच कर अभी तक वे 84,000 रुपये एकत्रित कर चुकी हैं। इसका 50 प्रतिशत वे प्रधानमंत्री राहत कोष में दान देंगी और बाकी पैसे उन्होंने लड़कियों के एक अनाथालय और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के एक केन्द्र को देने का मन बनाया है। 
सौम्या ने  से कहा कि व कक्षा तीसरी कक्षा से पेंटिंग बना रही हैं। लोगों की परेशानी देखने के बाद उन्होंने और उनकी दो दोस्तों ने अपनी कला के जरिए जरूरतमंदों की मदद करने का फैसला किया।उन्होंने कहा, ‘‘हमने 44 पेंटिंग बनाई और सोशल मीडिया के जरिए उसका प्रचार किया। मेरा इंस्टाग्राम पर एक पेज है, जिसके जरिए इन पेंटिंग को बेचा गया। हमने ऑर्डर पर भी पेंटिंग बनाई।’’उन्होंने बताया कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘स्वच्छ नागपुर’ के जरिए उन्हें शहर में लड़कियों के एक अनाथालय और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के एक केन्द्र के बारे में पता चला और फिर उन्होंने उसकी भी आर्थिक मदद करने का फैसला किया।प्रेशा ने कहा, ‘‘ हमने पेंटिंग बनाकर उन्हें बेचना शुरू किया। हमें पेंटिंग के और ऑर्डर मिलने लगे। मुझे अपनी मां से यह काम करने की प्रेरणा मिली क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा दान करते हुए देखा है।’’उन्होंने कहा, ‘‘ समाज के लिए कुछ कर पाना एक बेहद अच्छा अनुभव है और कई लोग हमारी इसमें मदद भी कर रहे हैं।’’इन किशोरियों ने कहा कि उनके पास अब भी कई पेंटिंग के ऑर्डर हैं और उनका लक्ष्य इसके जरिए एक लाख रुपये इकट्ठे करना है।

‘Irrigation sector backlog in Vidarbha’s 4 dist. require Rs 15,488 cr for removal’: Sanjay Patil

Sanjay Patil :Nagpur:Though Vidarbha region’s financial backlog came to an end some years ago, the physical backlog of four districts in Amravati division is yet to be over. This backlog exists in irrigation sector. Currently, the backlog is pegged at 1,63,139 hectares and it will require Rs 15,488.04 crore for removal, said Chainsukh Sancheti, Chairman of Vidarbha Development Board (VDB). Addressing a press conference at VDB on Thursday, after the board meeting, Sancheti said that the backlog removal programme for the four districts of Amravati division was prepared in the year 2012 as per the Maharashtra Governor’s directions. These four districts include Amravati, Akola, Washim, and Buldhana. The programme included 102 irrigation projects. Of these, 54 have been completed. Of these 54 projects also, 40 have been completed after June 2014. At present, work of 27 other projects is partially over. At the end of June 2019, total irrigation potential (Rabi equivalent) created was 15,624 hectares and water storage of 73.99 million cubic metres was built in the completed projects, he said. According to Sancheti, during June 2012 and June 2019, 70,880 hectares of backlog in irrigation sector in case of these four disricts was removed. Of this, backlog of 60,819 hectares was removed after June 2014. At present, he told mediapersons, the balance physical backlog is 1,63,139 hectares. As per the initial estimated, the removal of the said backlog required Rs 10,585 crore. Now, he added, the estimated requirement of funds for backlog removal is Rs 15,488.04 crore. In 2019-20, an allocation of Rs 1,894 crore was proposed along with supplementary provision for the four backlog districts of Amravati division. Clubbed with unspent amount of Rs 301.13 crore in 2018-19, the total funds available for the backlog districts in 2019-20 was pegged at Rs 2,195.05 crore. Till December 2019, an amount of Rs 775.80 crore has been spent, Sancheti said in reply to a question. The backlog of the four districts will be removed by the year 2022-23. To ensure completion of the irrigation projects, VDB is making efforts to raise funds through Centrally-sponsored schemes namely Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana (PMKSY) and Baliraja Jal Sanjeevani Yojana (BJSY). Under PMKSY, 75 per cent funding comes from NABARD and 25 from the Centre. “Usually, NABARD reimburses expenses incurred on projects. Now, VDB will be requesting the Governor to ask NABARD to give funds straight to Vidarbha Irrigation Development Corporation to expedite completion of projects,” said Sancheti. Replying to a question, the VDB Chairman said that VDB would get extension. VDB’s previous extension is coming to an end in April 2020. “VDB has been there, and will be there,” he said. Hemant Kumar, Member Secretary of VDB; Dr Kishor Moghe, Expert Member; Prakash Dayare, Joint Director and other officials were present on the occasion. Sancheti asks district officials to utilise special funds by Mar 31 Chainsukh Sancheti, Chairman of VDB, presided over a meeting of the board on Thursday. After taking stock of the situation, he asked the officials at district level to ensure that special fund was utilised by March 31 this year. VDB got a special fund of Rs 50 crore in July 2019. The fund is supposed to be utilised in the area that has 60 tehsils and 18 Class ‘C’ municipal councils in Vidarbha. The fund is to be utilised on raising human development index (HDI), particularly with initiatives relating to education, health, and livelihood/employment opportunities. In the first phase, proposals worth Rs 46.5 crore were cleared, and in the second phase proposals worth Rs 3.50 crore were given nod. Sancheti told mediapersons that VDB received proposals from the District Collectors and then approved the same. These approved proposals were sent to the Divisional Commissioners concerned (Nagpur and Amravati), who then forwarded the same to Human Development Commissioner. After nod of Human Development Commissioner, now the process of technical sanction, administrative sanction, and tendering is on in respective districts. “We have asked the respective district administration to ensure that the special fund is utilised by March 31,” he said. Asked if it was possible to utilise the fund by March-end if the tender process started in February, Sancheti said that VDB had called the meeting of District Planning Officers precisely to guide them in this regard. The only issue is in Yavatmal district where Model Code of Conduct was in force for State Legislative Council elections. Hence, he added, VDB has urged the Governor to direct the State Government to allow VDB to utilise the fund in the next financial year in case of Yavatmal district. Dr Sanjeev Kumar, Divisional Commissioner, Nagpur; Hemant Kumar, Member Secretary of VDB; Dr Kishor Moghe, Expert Member; Prakash Dayare, Joint Director and others attended the meeting.