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ऊर्जामंत्री , ” एवरेज बिजली बिल ना भेजे” : संजय पाटिल

Maharashtra: Nitin Raut sacks 5, launches purge of BJP-era power ...

संजय पाटिल:  नागपुर प्रेस मीडिया : १५ जुलाई २०२० : नागपुर. राज्य के ऊर्जामंत्री नितिन राऊत ने महावितरण के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को एवरेज बिजली बिल भेजना टालें जिससे बिल के संदर्भ में शिकायतें कम हों. उन्होंने कहा कि सभी ग्राहकों को मीटर रीडिंग कर अचूक बिल ही भेजने की व्यवस्था करें. वे इस संदर्भ में आयोजित बैठक में बोल रहे थे.बैठक में उन्होंने महावितरण के राजस्व को तेजी से बढ़ाने के लिए समस्त उपाययोजना के क्रियान्वयन का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि इसके लिए मनुष्यबल का सुयोग्य उपयोग करने के लिए नियोजन करें. बैठक में महापारेषण अध्यक्ष तथा व्यवस्थापकीय संचालक दिनेश वाघमारे, गोविंद बोडके, उत्तम झाल्टे, अनिल खापर्डे, अनिल नगरारे, दिनेशचंद्र साबू, सतीश चव्हाण, योगेश गडकरी उपस्थित थे.

विशेष कक्ष की व्यवस्था
राऊत ने चेक द्वारा बिजली बिल जमा करने वाले ग्राहकों की मदद के लिए विशेष कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिजली बिल वसूली बढ़ाने का प्रयत्न करें. तीन महीने का एक साथ बिल जमा करने वालों के 2 फीसदी की छूट और बिल भरने के लिए तीन किश्तों की सुविधा की जानकारी ग्राहकों को देकर उनकी शंका का समाधान कर बिल जमा करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश भी उन्होंने दिया. उन्होंने सभी डिविजनल अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने मातहत कर्मचारियों की कार्यक्षमता की जांच करें व कार्य के लिए स्पर्धात्मक वातावरण का निर्माण कर उनकी कार्यक्षमता का सुयोग्य उपयोग करें.

 हर शिकायत की जांच होगी
जून में पिछले तीन महीने के बिलों को लेकर ग्राहकों में जो असंतोष है. उसके संदर्भ में राउत ने आश्वस्त किया है कि अधिक बिल भेजने की हर एक शिकायत की जांच होगी साथ ही बाकाया बिल के संदर्भ में शंका का समाधान किये बिना अन्यायपूर्ण तरीके से बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई नहीं की जाएगी.

Nitin Gadkari to inaugurate, lay foundation stones for Rs 20,000 cr projects in Haryana : Sanjay Patil

Nitin Gadkari to inaugurate, lay foundation stones for Rs 20,000 cr projects in Haryana

Sanjay Patil : Nagpur Press Media :  15 July 2020 : New Delhi : Union Minister Nitin Gadkari will inaugurate and lay foundation stones for economic corridor projects worth Rs 20,000 crore in Haryana, the government said on Monday. The web-based function will be presided over by Haryana Chief Minister Manohar Lal Khattar.
“Union Minister for Road Transport, Highways and MSMEs Shri Nitin Gadkari will inaugurate and lay the foundation stones of various Highway projects as part of a new economic corridor worth over Rs 20 thousand crore in Haryana on the coming 14th,” Ministry of Road Transport and Highways said in a statement
Haryana Deputy Chief Minister Dushyant Chautala said that these national and state highways and bypasses will change the picture of the infrastructure in the state. He said that with the strengthening of the road network in the state, the development of industries will get a new direction and entrepreneurs will come forward for more investment in the state.Chautala in a statement said that the state government had requested the Centre earlier to expeditiously complete road-related projects in the state. He said that the Ismailabad-Narnaul Greenfield Highway will connect five Lok Sabha constituencies of Kurukshetra, Karnal, Sonipat, Rohtak, and Bhiwani-Mahendragarh in the state, which will increase the connectivity as well as speed up industrial development in the State. The road development project is a part of the Delhi-Mumbai and Kolkata-Amritsar industrial corridor and with the start of this; more entrepreneurs will be attracted to Haryana for investment purposes.The projects for inauguration include 35.45 km 4-lane Rohna/ Hasangarh to Jhajjar section of NH 334B costing Rs 1,183 crore, 70 km 4-laning of Punjab-Haryana Border to Jind section of NH 71 (Rs 857 crore), and the 85.36 km 2-lane with paved shoulders Jind-Karnal Highway on NH 709 (Rs 200 crore). The projects for laying foundation stone include 227 km 6-lane access controlled Greenfield expressway from Ismailpur to Narnaul on NH 152D in 8 packages costing Rs 8,650 crore, 46 km 4-lane Gurugram Pataudi-Rewari section of NH 352W (Rs 1,524 crore) and 14.4 km 4-lane Rewari bypass for Rs 928 crore, the statement said. In addition, foundation stone will also be laid for 30.45 km 4-lane Rewari-Ateli Mandi section of NH 11 costing Rs 1,057 crore, 40.8 km 6-lane Narnaul bypass on NH 148B, NH 11 and Narnaul to Ateli Mandi section of NH 11 (Rs 1,380 crore), 40.6 km 4-lane Jind-Gohana (greenfield alignment) of NH 352A (Rs 1,207 crore), 38.23 km 4-lane Gohana-Sonipat section of NH 352A (Rs 1,502 crore), and 40.47 km 4-lane UP-Haryana border to Roha on NH 334B (Rs 1,509 crore).”These projects will benefit people of Haryana in a big way by providing smooth connectivity within the state, as well as to other states like Punjab, Rajasthan, Delhi, and Uttar Pradesh,” the statement said. The projects will also save on time, fuel, and cost, as also boost development in backward areas of the state, it added. Chautala said the state government is also working in the direction of creating an integrated logistic hub in Narnaul which was reviewed recently by the state government. The Railways have also released their share for the integrated logistics hub. 

Highlights

  1. The projects for inauguration include 35.45 km 4-lane Rohna/ Hasangarh to Jhajjar section of NH 334B costing Rs 1,183 crore, 70 km 4-laning of Punjab-Haryana Border to Jind section of NH 71 (Rs 857 crore), and the 85.36 km 2-lane with paved shoulders Jind-Karnal Highway on NH 709 (Rs 200 crore).

करोंना योद्धा राजकुमार जयस्वाल यांचे निधन : संजय पाटिल

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संजय पाटिल  :  नागपूर प्रेस मीडिया : १५ जुलै २०२० : सार्वजनिक बांधकाम विभागाचे एकात्मीकृत घटकात कार्यरत  कार्यदक्ष कार्यकारी अभियंता राजकुमार राधेश्याम जैस्वाल राहणार रामदास पेठ , ओम मेन्शन बिहाइंड जैन मंदिर, रामदास पेठ, नागपूर , वय ५८, यांचे गंभीर आजाराने मृत्यू झाले. त्यांच्या पार्थिव देहावर मंगळवार ला मोक्षधाम घाट येथे अंत्यसंस्कार करण्यात आले . मेडिकल आणि मेयो ला त्यांनी कोविड –  १९ च्या रुग्णांना उपचारासाठी १२०० खाटांच स्वतंत्र कक्ष निर्माण करण्यात त्यांचे युद्धपातळीवर योगदान होते. या कक्षात ३६० खाटांच आय  सी यु , तसेच ८४० एचडीयु खाटांची व्यवस्था उपलब्ध करून देण्यात त्यांचा शारीरीक आणि बौद्धिक श्रम करून मोलाचे कार्य केले. या कामाची मोठी जवाबदारी राजकुमार जैस्वाल यांच्यावर होती. संपूर्ण सार्वजनिक बांधकाम विभागाला  आपल्या विश्वासात घेऊन त्यांनी हे काम पूर्ण करून दाखविले , असा त्यांच्या बाणा होता, दिसायला ते एखाद्या फिल्मस्टार सारखे देखणे  असूनही ते आपल्या कामात अतिशय चारित्रवान होते. संचारबंदी लागू असताना तसेच ते स्वतः गंभीर आजाराने ग्रस्त असताना ही त्यांच्या कार्यकाळात  अल्पावधीतच हे पूर्ण करण्यात आले.  त्यांच्या निधनाने एक कर्त्यव्य दक्ष भारताचा किंबहुना माहाराष्ट्र नागपूर येथील हिरा गमावला आहे.,  असे  त्यांच्या सार्वजनिक बांधकाम विभागात कार्य करणारे लोकांचे  मत आहे.   आणि हे खरंच आहे  कारण त्यांची कार्य करण्याची पद्धत इतरांपेक्षा  निराळी होती . त्यांनी आपल्या मनावर जे काम घेतले ते पूर्ण करण्याची त्यांची प्रकृती होती . निसर्ग त्यांच्या मृत्यूनंतर त्यांचे व त्यांच्या परिवाराचे मंगल हो हीच कामना करतो . एक विशेष महत्वाची बाब अशी आहे कि याच वर्षी त्यांचे ऑगस्ट मध्ये रिटायरमेंट होते. 

जिला परिषद : इंजिनियर विजय किंष्णूजी टाकलीकर 2 लाख रिश्वत लेते पकडा गया : संजय पाटील

नागपूरच्या नंदनवन पोलिसांनीच मारला ...

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया  : 26 जून 2020 : नागपुर. जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ती विभाग के पदस्थ एक्जिकिटव इंजिनियर को 2,00,000 रुपए का रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया. आरोपियों में इंजिनियर विजय किंष्णूजी टाकलीकर (55) और निजी ड्राईवर जयेंद्र विठोबाजी रेवतकर (62) शामिल है. काटोल निवासी 35 वर्षीय एक व्यक्ति की शिकायत पर एसीबी ने कार्रवाई कर रंगे हाथ आरोपियों को धरदबोचा.
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ठेकेदारी का काम करता है. कामकाज करने पर मंजूर किये गए पूराने बिल के बदले में नये बिल को मंजूर कराने के लिए जिप के अधिकारी विजय टाकलीकर ने ठेकेदार से 6,00,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी. पहले सप्ताह में 2,00,000 रुपये देने के लिए कहां गया. ठेकेदार ने इस अधिकारी के रिश्वत खोरी से तंग आकर , इसकी एसीबी से इसकी शिकायत की. इसके बाद एसीबी ने आरोपी टाकलीकर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई.

अपने ड्राईवर से कराता था काम

गुरुवार की रात करीब 8 बजे शिकायतकर्ता 2,00,000 रुपये लेकर आरोपी के बताए हुए पते पर पहुंचा. उसने अपने निजी ड्राईवर जयेंद्र विठोबाजी रेवतकर को पैसे लेने भेजा था. ड्राईवर को पैसे सौंपने पर ड्राईवर सीधे अधिकारी टाकलीकर के पास पहुंचा जहां उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया. जानकारी यह भी है टाकलीकर के खिलाफ जिला परिषद संगठन की ओर कई शिकायते की गई है.यह अधिकारी अपने अधिकारों का फायदा उठाकर ठेकेदारों को अक्सर रिश्वत देने के लिए परेशान करता है. खास बात यह है कि रिश्वत का पैसा यह स्वयम नहीं बल्कि अपने निजी ड्राईवर से मंगावाता है. जिप के पास ठेकेदारों ने कई बार शिकायते की किंतू कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण अंत: एक ठेकेदार ने एसीबी से इसकी शिकायत की. एसपी रश्मि नांदेडकर और एएसपी राजेश दुद्दलवार के मार्गदर्शन में संदीप जगताप, पडोले, प्रभाकर बले, चालक वकील शेख ने कार्रवाई को अंजाम दिया.

ACB Planing to Arrest Executive Engineer Vijay Taklikar Zilla Parishad (ZP), Nagpur on March

 ANTI-CORRUPTION Bureau (ACB) on Thursday caught Vijay Kishnuji Taklikar, Executive Engineer, Rural Water Supply Department, Zilla Parishad (ZP), Nagpur, and his private driver Jayendra Vithobaji Rewatkar red-handed while demanding and accepting a bribe of Rs two lakh cash from a contractor towards clearance of his bills. Taklikar (55) was trapped after he accepted the cash from the contractor through his driver Rewatkar (62) in Zilla Parishad office premises. It will be planing by March before Lockdown. but Taklikar not make phone call to the Contractor.The 37-year-old contractor residing in Katol had approached Taklikar in March this year requesting him to clear his pending bills. Taklikar allegedly demanded Rs six lakh as commission to clear his previous and current bills. After the contractor negotiated with Taklikar, the latter asked him to give Rs two lakh as first installment. Fed-up of constant harassment by Taklikar, he lodged a complaint with the ACB. The bureau officers verified the complaint on March 14 and laid a trap at ZP Office in Civil Lines on Thursday. Soon after driver Rewatkar accepted Rs two lakh on behalf of Taklikar, the bureau team caught him and seized the cash. The team also took Taklikar into custody. Separate teams bureau officers then conducted searches at Taklikar’s office and residential premises. ACB would assess the property amassed by the Executive Engineer through corrupt means.Bureau officers registered an offence under relevant sections of the Prevention of Corruption Act against Taklikar and Rewatkar at Sadar Police Station. The trap was laid by DySP Sandeep Jagtap and his team comprising HC Padole, NPC Prabhakar Bele and NPC Vakil Sheikh under the supervision of Superintendent of Police (ACB) Rashmi Nandedkar and Addl SP Rajesh Duddalwar.

शेवटी विजय टाकळीकर निलंबित 

 नागपूर : १४ जुलै २०२० : पाणीपुरवठा विभाग जिल्हा परिषदेतील कार्यकारी अभियंता विजय टाकळीकर यांच्या अटकेनंतर पंधरा दिवसांनी त्यांना निलंबित केले आहे. विजय टाकळीकरावर एसीबीने लाचखोरीच्या प्रकरणात कारवाही केली होती. त्यांना लगेच अटक करण्यात आली होती , त्यांचा निलंबनाचा प्रस्ताव  सुद्धा शासनाकडे पाठविला होता.  परंतु पंधरा दिवस संपून झाल्यावर सुद्धा निलंबनाची कार्यवाही ना झाल्याने जिल्हापरिषदेचे  वातावरण तापले होते. त्यांना अटकेच्या दिवसापासूनच निलंबित करण्यात आले. नीलांबनाची तारीख २६ जुन २०२० मुकरर करण्यात आली. हा निलंबनाचा आदेश १३ जुलै ला जिल्हापरिषदेला देण्यात आला. प्रशासकीय कामात कोणतेही अडथडे येऊ नये यासाठी तात्पुर्ती सेवा उपअभियंता निलेश काळबांडे यांच्याकडे सोपविण्यात आली आहे.त्यामुळे आता या विभागाचा प्रशासकीय आणि आर्थिक प्रभार कोणाकडे येणार याकडे समाजाचे लक्ष लागले आहे. कारण राज्य आणि केंद्राच्या अनेक महत्वपूर्ण योजना राबविणाऱ्या या विभागाचा प्रभाकडे सर्वांचे लक्ष केंद्रीत झाले आहे. 

पालकमंत्री डॉ. नितीन राऊत, “चुकीचे देयक दुरुस्त करणार,भाजपचे राजकीय नाटक” : संजय पाटील

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया  : १४ जुलै २०२० : नागपूर : टाळेबंदीनंतर सुरुवातीला महापालिका, जिल्हाधिकारी कार्यालय, पोलीस व आरोग्य विभागासह सर्व यंत्रणांच्या एकत्रित प्रयत्नांमुळे  शहर व  जिल्ह्य़ात करोनावर नियंत्रण मिळवण्यात आले होते. परंतु भाजप नेत्यांनी या काळात महापालिका आयुक्तांसोबत नाहक वाद उकरून विशेष सभा तब्बल पाच दिवस लांबवली. त्यात अधिकारी गुंतल्याने करोनाकडे दुर्लक्ष झाले. त्यानंतरच शहरात रुग्णसंख्येचा उद्रेक झाला, असा  आरोप नागपूरचे पालकमंत्री व ऊर्जामंत्री डॉ. नितीन राऊत यांनी केला.राऊत म्हणाले, करोनाचे संक्रमण टाळण्यासाठी टाळेबंदीनंतर लगेच विभागीय आयुक्त डॉ. संजीव कुमार, महापालिका आयुक्त तुकाराम मुंढे, जिल्हाधिकारी रवींद्र ठाकरे, पोलीस आयुक्त डॉ. भूषणकुमार उपाध्याय यांच्यासह इतरही अधिकारी एकत्र आले. सर्वानी प्रभावी नियोजनातून करोनावर नियंत्रणासाठी प्रयत्न सुरू केले. रोज उच्चस्तरीय समितीची बैठक होत होती. उणीवांवर चर्चा करून सुधारणा केल्या जात होत्या. शहरात असतांना मीही त्यात सहभागी होत होतो. त्यामुळे मेपर्यंत जिल्ह्य़ात ५४० बाधितच नोंदवले गेले होते. त्यापैकी ३६८ करोनामुक्त झाले.मृत्यूदरही फार कमी होता. याच दरम्यान  भाजप नेत्यांनी महापालिका आयुक्त तुकाराम मुंढेंसह इतर अधिकाऱ्यांना लक्ष्य केले.  महापालिकेची विशेष सभा  पाच दिवसापर्यंत  लांबवली. त्यामुळे आरोग्य कर्मचारी महापालिकेतच अडकून पडले. त्यांना साथ नियंत्रणाच्या कामावर जाता आले नाही.  परिणामी शहरात करोनाचा उद्रेक झाला. मृत्यू संख्याही वाढत आहे. याला भाजपचे राजकारणच जबाबदार असल्याचा आरोप राऊत यांनी केला.

अधिकाऱ्यांवर लांच्छन अयोग्य

करोनाच्या काळात अधिकारी, कर्मचारी रस्त्यावर होते. राजकीय मंडळी घरात होती. त्यांनी केलेल्या परिश्रमामुळे नागपूरची करोनाची स्थिती नियंत्रित होती. परंतु त्यांनाच आपल्या राजकारणासाठी लांच्छन लावण्याचे काम महापालिकेत सुरू आहे, असा आरोप डॉ. नितीन राऊत यांनी केला.

ऊर्जा खात्याचा कारभार पारदर्शक व गतिमान करणार

ऊर्जा खात्याचा कारभार पारदर्शक व गतिमान करण्याचा प्रयत्न आहे. त्यामुळे महावितरणच्या प्रादेशिक कार्यालयांतील सर्वोच्च अधिकाऱ्यांना जास्त अधिकार देऊन तातडीने निर्णयाची मुभा दिली जाईल. जेणेकरून वीज ग्राहकांना चांगल्या सेवा मिळतील. देयकाच्या तक्रारी सोडवण्यासाठी प्रथमच ऊर्जामंत्री म्हणून मी स्वतचे दोन भ्रमनध्वनी क्रमांक, ई-मेल आयडी सार्वजनिक केले आहेत.  महावितरणच्या स्थानिक पातळीवरही ग्राहकांच्या देयकाच्या समाधानासाठी यंत्रणा उभारली आहे,– डॉ. नितीन राऊत

चुकीचे देयक दुरुस्त करणार

वीज देयकाबाबत विविध तक्रारी आहेत. चोवीस तास घरी असल्याने लोकांचा वीज वापर वाढला, हे खरे आहे. मात्र, काही चुकीचे देयक आले असेल. ते दुरुस्त करून दिले जाईल. तीन महिन्याच्या वीज वापराची एकत्रित बेरीज करण्यात आलेली नाही. मार्च ते एप्रिल, एप्रिल ते मे आणि मे ते जून असे स्वतंत्र मोजणी करण्यात आली. त्यानुसार देयक पाठवण्यात आले, असा दावाही डॉ. राऊत यांनी केला.

नितिन गडकरी, “भारत के लिए है शानदार अवसर” :संजय पाटिल

चीन को लेकर दुनिया भर में है असंतोष, भारत के लिए है शानदार अवसर : नितिन गडकरी

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : 14 जुलाई, 2020 : नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि दुनिया कोरोनोवायरस के मद्देनजर चीन से निपटने के लिए अनिच्छुक है और उन्होंने इसे भारतीय उद्योगों के लिए एक “महान अवसर” करार दिया.

गडकरी ने” न्यू इंडिया में आत्मनिर्भर भारत “पर वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा, “विश्व आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल है, चीन से निपटने के लिए दुनिया बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं है. इसलिए यह भारतीय उद्योगों के लिए एक महान अवसर है. यह एक छिपा हुआ आशीर्वाद है. हम अधिक प्रतिस्पर्धी, गुणवत्ता के प्रति सजग हो सकते हैं और स्थिति का लाभ उठा सकते हैं, “
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), कृषि विकास दर और ग्राम उद्योग विकास को बढ़ाना है.
उन्होंने कहा, “विश्व बैंक ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हमारी रैंक जरूर बढ़ा दी है लेकिन निकासी, प्रमाण पत्र और अनुपालन प्रक्रिया बहुत जटिल हैं. हम सभी प्रणालियों को डिजिटल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हमारा उद्देश्य जीडीपी, कृषि विकास दर और ग्राम उद्योग विकास को बढ़ाना है, “
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने बताया कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की आय को अगले पांच वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की योजना बनाई है.
उन्होंने कहा, “एनएचएआई में, अभी हमें प्रति वर्ष 28,000 करोड़ रुपये की आय होती है और मेरी योजना अगले पांच वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये लेने की है. मैं पूरी तरह से सरकार के बजट पर निर्भर नहीं हूं.”

अपूर्ण रस्ते – नागरिकांसाठी / लोकांसाठी एक ‘काँक्रीट’ त्रास : संजय पाटील

maharashtra times

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : 6 जुलै 2020 : नागपूर : अपूर्ण काँक्रीटच्या रस्त्यांची कामे ही वास्तविकता विरूद्ध साक्षात्काराचे उत्कृष्ट उदाहरण आहे. शहर स्मार्ट सिटी स्वप्न असलेला हा प्रकल्प आता बाधित लोकांसाठी सतत होणारी वेदना करीत आहे जो  वास्तवाचा परिणाम आहे. वास्तवाचा कठोर परिणाम रस्त्याच्या पृष्ठभागावर विस्कळीत झाला आहे. नागपूर महानगरपालिकेने वाहनांच्या सुरळीत सुलभतेसाठी दुरुस्ती करण्याची तसदी घेतली नाही. मनीष नगर, टेकका नाका ते नारी रस्ता, जर आपण नागपुरातील सर्व सिमेंट रस्ता पाहिला तर जाण्यास त्रास होत असताना त्याच ठिकाणी मनपाने काँक्रीट रस्ते तयार करण्याचे ठरविले.
दोन लांब पट्ट्या एकाच वेळी निवडल्या गेल्या आणि पूर्ण उत्साहाने काम सुरू केले आणि कंत्राटदारांनी नवीन काँक्रीटच्या रस्त्यांचा पाया घातला. पॅचचा वापर करणा s्या नागरिकांसाठी वेळ काम सुरू झाल्याने दुसर्‍या बाजूला अरुंद पाथवे आणि डांबर रस्त्याचे नुकसान झाल्यामुळे असंख्य अडचणींचा सामना करावा लागला. बेसा व बेल्टारोडी हे दोन रस्ते नवीन निवासी वस्तीचा उदय झाल्यामुळे या दोन भागांमुळे शहराचा विकसित भाग सुलभ झाला.
सध्या साधारणपणे 1.5 कि.मी. लांबीच्या आणि रुंदीच्या दोन मुख्य रस्त्यांमधून अंदाजे 5000 पेक्षा जास्त लोकसंख्या असलेल्या दोन मुख्य रस्त्यांमधून दररोज दोन कॅरेजवे ओलांडू शकतात. आता, नवीन मनीष नागपूर रेल्वे ओव्हरब्रिज (आरओबी) च्या पुढे काँक्रीटचा एक रस्ता आहे आणि एका बाजूला बोगदा पूर्ण झाला आहे परंतु लॉकडाऊनमुळे मध्यभागी काम थांबले आहे. ठेकेदाराने उक्त कॉरिडॉरचा नियमित आणि वापरण्यास सोपा वापर करण्यासाठी रॅम्प व अ‍ॅफिक्स पेव्हर ब्लॉक पूर्ण करण्याचे काम पुन्हा सुरू करण्याची तसदी घेतली नाही. वास्तविक समस्या शेजारच्या डांबर रोडची आहे जी अधिका e्यांनी सोडली होती कारण त्यास काँक्रीट रस्ता म्हणून संबोधले जावे. आता काम थांबल्यामुळे डांबर रस्त्याची अवस्था खूपच बिकट झाली आहे आणि एकेकाळी चांगली कॅरेज वे होती का त्याचे अवशेष सापडतात.
कॅरिजवेवरील रहदारी संख्येत चांगली असल्याने लोकांना दररोज धक्का बसला पाहिजे आणि खड्डे आणि उघड्या दगडांनी भरलेले संपूर्ण पॅच बोलणे आवश्यक आहे. मनिष नगर रेल्वे गेटपासून रुद्र टी-पॉईंटपर्यंत जाणाr्या इतर भागांची अवस्था आणखी बिकट आहे. हे कॉन्क्रिटिझेशनचे काम जरा उशिरा सुरू झाले की मनीष नगरच्या इतर भागातील लॉकडाऊनमध्ये अडकले. एका बाजूला अपूर्ण काँक्रीट रस्त्याने कब्जा केला आहे तर दुसe्या बाजूला डांबरी रस्त्याकडे दुर्लक्ष केले जात आहे आणि काही वेळातच जोरदार ट्रकच्या प्रचंड खड्ड्यांसह वाहतुकीची सतत हालचाल होत आहे. एकट्याने ड्रायव्हिंग करू या या रस्त्यावरुन फक्त चालणे शक्य आहे.
या रस्त्याच्या  आणखी एक समस्या अशी आहे की पेव्हर ब्लॉक्स चिकटवून नंतर सामील होण्यासाठी ठोस रस्ता पॅचमध्ये तयार केला जात होता. परंतु लॉकडाऊनमुळे काम ठप्प झाल्याने बरा होण्यासाठी तात्पुरते ब्लॉक्सही काढले गेले नाहीत आणि त्यामुळे सध्याच्या परिस्थितीत तो भाग निरुपयोगी झाला आहे. मनपाची आर्थिक परिस्थिती पाहता, मनीष नगरच्या या दोन्ही भागांचे काम कधी सुरू होणार आहे, हे माहिती नाही. तोपर्यंत रोजच्या प्रवासासाठी या भागांवर अवलंबून रहावे यासाठी नागरिकांना आपल्या नशिबाला जबाबदार धरावे लागते.

ऊर्जामंत्री नितिन राऊत की तस्वीरें जलाई,मनमानी बिजली बिल का किया विरोध : संजय पाटील

Nitin Raut

संजय पाटील: नागपूर प्रेस मीडिया: 13 जुलै 2020 : नागपुर. कोरोना लाकडाउन की अवधि के 3 महीने के मनमाने बिजली बिल के विरोध में नागरिकों में रोष देखा जा रहा है. कुछ युवाओं ने तो उत्तर नागपुर में ऊर्जामंत्री की तस्वीरों को जलाकर अपना गुस्सा उतारा. समाजसेवक कार्तिक लारोकर के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन किया गया. लारोकर ने कहा कि हजारों रुपये के बिजली बिल गरीबों को भेजे गए हैं जो वे चुकाने में असमर्थ हैं. क्योंकि बीते 4 महीनों से उनका कामधंधा बंद पड़ा हुआ है.आय के स्रोत ही बंद हैं और उस पर हजारों रुपये का बिजली बिल इस निर्दयी सरकार ने भेज दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों का 2 लाख रुपये का कर्ज माफ किया, केन्द्र सरकार ने हजारों रुपये जरूरतमंदों के खाते में जमा करने का काम किया. इसी तर्ज पर कोरोना लाकडाउन की अवधि के बिजली बिल को माफ करना चाहिए.

300 यूनिट बिजली माफ हो

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने 300 यूनिट बिजली बिल सरसकट माफ करने की मांग भी की. लारोकर ने बताया कि ऊर्जामंत्री नितिन राऊत को गरीबों, मध्यमवर्ग परिवारों के बिजली बिल में राहत देने की मांग का निवेदन दिया गया था लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है. इस दौरान कुणाल सोमकुंवर, मंगेश चहांदे, गणेश बहोरिया, सुजल फ्रांसिस, आकाश कोत्रे, राजेन्द3 साहू, रामदास जनभरे सहित अन्य युवा उपस्थित थे.

 जनता पर अन्याय,मनमानी बिजली बिल का किया विरोधनागपुर. 

कोरोना लाकडाउन की अवधि में एक ओर जहां लोगों के कामधंदे बंद रहे. निजी सेक्टर में नौकरीपेशा लोगों के वेतन में भारी कटौती हुई. कोरोना संक्रमण के भय से लोगों ने गर्मी में एसी-कूलर का उपयोग नहीं किया, ऐसे में महावितरण द्वारा लोगों को तीन महीने का नियमित बिल से कई गुना व हजारों रुपयों का बिल थमा दिया है. इन बिलों को रद्द कर सुधारित बिल भेजने की मांग को लेकर भाजपा ने पूरे शहर के चौराहों पर नगाड़ा बजाओ आंदोलन किया. गोलीबार चौक में शहर अध्यक्ष प्रवीण दटके के नेतृत्व में हुए आंदोलन में बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए.उन्होंने कहा कि ऊर्जामंत्री नितिन राऊत गलतियों को सुधार कर नागरिकों को राहत देने की बजाय केन्द्र सरकार की ओर उंगली उठाते हैं. राज्य के किसानों की उपज खरीदने के लिए राज्य की महाविकास आघा़ड़ी सरकार केन्द्र की और मुंह देखती है. उन्होंने कहा कि अगर हर काम के लिए ये सरकार केन्द्र का मुंह ताकती है तो उसे राज्यपाल को इस्तीफा दे देना चाहिए. इस दौरान महापौर संदीप जोशी, विधायक गिरिश व्यास, अनिल सोले, कृष्णा खोपड़े, विकास कुंभारे, मोहन मते, मण्डल अध्यक्ष किशोर पलांदुरकर, विनोद कन्हेरे, संजय अवचट, देवेन दस्तूरे, संजय चौधरी, भोजराज डुम्बे, संजय ठाकरे, संजय बंगाले, राम अम्बूलकर, सुनील मित्रा उपस्थित थे.

सत्ता में बैठने का अधिकार नहीं
दटके ने कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता में बैठने का अधिकार नहीं है जो संकटकाल में भी नागरिकों को लूटने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि गलत बिल रदद् कर उसमे सुधारकर जनता को भेजे. इन बिलों में अप्रैल में जो 7 प्रतिशत बिजली के रेट बढ़ाए गए उसे एक वर्ष के लिये रद्द करे, अधिभार व ब्याज रद्द करे, आनलाइन बिल भरे हैं उनकी रकम जमा दिखाकर सुधारित बिल भेजे. जब तक अन्यायकारक बिल सुधारा नहीं जाता तब तक जनाआंदोलन शुरू रहेगा.

 दूकानें-आफिस बंद तो बिल कैसा…
भाजयुमो अध्यक्ष वेराइटी चौक पर शिवानी दानी के नेतृत्व में नगाड़ा बजाकर सरकार का विरोध जताया गया. उन्होंने कहा कि तीन महीने लाकडाउन में सारी दूकानें, आफिस, कारखाने, उद्योग बंद रहे बावजूद इसके इस दौरान का हजारों रुपयों का बिल महावितरण द्वारा भेजा गयाहै. यह कैसे संभव है कि दूकानें बंद हैं और बिजली का उपयोग नहीं हो रहा फिर भी आम समय की अपेक्षा कई गुना बिजली बिल भेजा गया. उन्होंने कहा कि राज्य के ऊर्जामंत्री सिटी के हैं लेकिन शहरवासियों की ही सुनवाई नहीं है यह दुर्भाग्यजनक है. उनके कान खोलने के लिए ही नगाड़ा बजाया जा रहा है. इस दौरान राहुल खंगार, कमलेश पांडे, सारंग कदम, आलोक पांडे, दिपांशू लिंगायत, वैभव चौधरी, सचिन करारे, नेहल खानोरकर, रितेश रहाटे, सुबोध आचार्य, जितेंद्र सिंग ठाकूर उपस्थित थे. कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार व ऊर्जामंत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की.

 जनता पर अन्याय
भाजपा अजा मोर्चा की ओर से कमाल चौक में धर्मपाल मेश्राम के नेतृत्व में नगाड़ा बजाओ आंदोलन किया गया. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के संकटकाल में एक ओर जहां मध्यमवर्ग, गरीब परिवारों के सामने विकट आर्थिक हालात पैदा हो गए हैं. ऐसी संकट की घड़ी में सरकार को राहत देने की बजाय जनता को लूटने का काम किया जा रहा है. मनमाना बिजली बिल भेजकर नागरिकों के साथ अन्याय किया जा रहा है. महाविकास आघाड़ी सरकार के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा था कि लाकडाउन काल के 3 महीनों का बिजली बिल नहीं भेजा जाएगा लेकिन यह सरकार तो लूट कर रही है. इस दौरान मिलिंद माने, संदीप जाधव, अशोक मेंढे, सुभाष पारधी, भोजराज डुंबे, संजय चौधरी, प्रभाकर येवले, अमर बागडे, संदीप गवई, विजय चुटेले, लखन येरवार, महेंद्र धनविजय, हरीश दिकोंडवार, उषा पैलेट, निरंजना पाटील, सतीश शिरसवान, राहुल झांबरे, विशाल लारोकर, मनीष मेश्राम, राहुल मेंढे, शंकर मेश्राम, अजय करोसिया, संदीप बेले, बंडू गायकवाड, इंद्रजीत वासनिक, विजय फुलसुंगे सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. 

बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ता
शहर के कई मुख्य चौराहों पर नगाड़ा बजाओ आंदोलन किया गया जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. गोलीबार चौक पर श्याम चांदेकर,  ला कॉलेज चौक पर कल्पना पांडे, प्रदीप बिबटे, अवस्थी चौक पर अजय पाठक, गिट्टीखदान चौक पर माया इवनाते, शेखर येटी, नंदनवन चौक पर रमेश वानखेड़े, दोसर भवन चौक पर लाला कुरैशी, शाहिद चौक पर भाजपा व्यापारी आघाड़ी के शहर अध्यक्ष संजय वाधवानी, बैधनाथ चौक पर जयसिंग कछवाह, प्रतापनगर चौक पर भोलेनाथ सहारे, कॉटन मार्किट चौक पर राम कोरपे, पुंडलिक सावंत, सक्करदरा चौक पर संभाजी भोसले, पीयूष अम्बूलकर, गड्डीगोदाम चौक पर विकास फ़्रांसिस, रामनगर चौक पर पीएसएन मूर्ति, संदीप पिल्ले, संविधान चौक पर नचिकेत व्यास ने जनआंदोलन का नेतृत्व किया. 

Nitin Raut

व्हीआयडीसीला 11 वर्षांच्या बजेटच्या वाटपापेक्षा कमी निधी : संजय पाटील

Vidarbha Irrigation Devel

संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : 13 जुलै 2020 : नागपूर :  विदर्भातील पाटबंधारे प्रकल्पांना निधी वाटप करणे ही पावसाच्या क्षेत्रासाठी नेहमीच चिंतेचा विषय राहिली आहे. अधिकृत आकडेवारीनुसार, राज्य सरकार अर्थसंकल्पित वाटपापेक्षा विदर्भ पाटबंधारे विकास महामंडळाला (व्हीआयडीसी) कमी निधी देत आहे. अगदी थोडक्यात सांगायचे तर ही गेल्या 11 वर्षांपासूनची कहाणी आहे. विदर्भातील पर्जन्यमान क्षेत्रात सिंचन क्षमता निर्माण करण्यासाठी प्रोत्साहन देण्यासाठी 1997 मध्ये व्हीआयडीसी ची स्थापना केली गेली. सुरुवातीला, त्यासह 10 प्रकल्प होते.
पुढच्याच वर्षी 1998 मध्ये एकूण 86 प्रकल्प पूर्ण करण्याचे काम व्हीआयडीसीकडे सोपविण्यात आले होते. 2007 मध्ये, व्हीआयडीसीला विदर्भातल्या सर्वेक्षण, अन्वेषण आणि बांधकाम-अंतर्गत सिंचन प्रकल्प ‘सर्व’ च्या कामांची जबाबदारी देण्यात आली. त्यात एकूण 1,075 सिंचन प्रकल्प असलेली व्हीआयडीसी संपली. त्यापैकी व्हीआयडीसीच्या अधिकृत आकडेवारीनुसार 761 चे बांधकाम पूर्ण झाले असून प्रकल्प संबंधित व्यवस्थापन संस्थांना देण्यात आले आहेत. या प्रकल्पांमुळे एकूण 7,01,709 हेक्टर सिंचन क्षमता निर्माण झाली आहे, असा दावा अधिकृत अधिका .्याने केला आहे. यापुढे या प्रकल्पांमध्ये  4,222.25  एमएम 3 ची डिझाइन केलेली स्टोरेज क्षमता आहे. याशिवाय 314 प्रकल्पांचे काम सुरू आहे. यामध्ये 18 प्रमुख, 53 मध्यम आणि 243 अल्पवयीन लोकांचा समावेश आहे. तथापि, विविध अधिकृत अहवालांमध्ये पूर्वी नमूद केल्याप्रमाणे प्रकल्प पूर्ण होण्याची गती क्षीण झाली आहे.
मुख्य कारणांपैकी एक म्हणजे बजेटच्या वाटपापेक्षा निधी जाहीर करणे कमी होते. विशेषत: गेल्या 11 वर्षांत ही घटना आहे. अधिकृत आकडेवारीनुसार, व्हीआयडीसीला 2009-10 च्या अर्थसंकल्पात 852.02 कोटी रुपये कमी मिळाले. त्यावर्षी व्हीआयडीसीसाठी बजेटचे वाटप  3,944.90 कोटी रुपये होते परंतु सरकारने त्यास केवळ 3,092.88 कोटी रुपये दिले. 2019-20 पर्यंत दर वर्षी हीच पुनरावृत्ती होते, जेव्हा व्हीआयडीसीला अर्थसंकल्पित वाटपापेक्षा 1,447.77 कोटी कमी मिळाले. या 11 वर्षात, त्याच्या बरोबरच्या चार्टमध्ये, व्हीआयडीसीला अर्थसंकल्पित वाटपापेक्षा एकूण 5,436.57 कोटी रुपये कमी मिळाले.
तुलनात्मक विश्लेषणावरून असे दिसून आले आहे की 2010-11 हे एक चांगले वर्ष होते जेव्हा व्हीआयडीसीला अर्थसंकल्पित वाटप आणि निधी दरम्यानचे अंतर सर्वात कमी होते .  108.87 कोटी रुपये. परंतु, या  11 वर्षात महाराष्ट्रातील सत्तेत राजकीय वाटचाल न करता अर्थसंकल्पीय वाटप आणि व्हीआयडीसीला देण्यात आलेल्या निधीत तफावत आहे. विसंगतीची परिस्थिती असताना अधिका s्यांनी ‘द हितवाडा’ला सांगितले की प्रकल्पांचे काम लवकर पूर्ण करण्यासाठी प्रयत्न केले जात असले तरी भूसंपादन, डिझाइन बदल इत्यादींसह काही तंत्रज्ञानाने अगदी पूर्ण उपयोगात अडथळे निर्माण केले. जाहीर निधी. म्हणजेच व्हीआयडीसीला देण्यात आलेल्या निधीपेक्षा वास्तविक खर्च कमी झाला आहे. विशेषत:2012मध्ये सिंचन घोटाळा समोर आल्यानंतर सूत्रांनी सांगितले की, अधिकारी ‘मनोरुग्णांच्या भीतीपोटी’ होते आणि विविध कामांबाबतच्या फाईल्स आपल्या स्वाक्षर्‍याने साफ करण्यास टाळाटाळ करतात. परिणामी, जाहीर झालेल्या निधीचा काही वर्षांपासून उपयोग होऊ शकला नाही.

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नागपुरात उपासमारीने मृत्यू होण्याची मोठी शक्यता : संजय पाटील

India's Hunger Index: What Can Be Done? | Outlook Poshan

संजय पाटील  : नागपूर प्रेस मीडिया : 7 जून 2020: नागपूर : करोनाशी लढण्यासाठी वैद्यकीय यंत्रणेसह प्रशासकीय चमू दिवस-रात्र झटत आहे… एकीकडे करोनाला हरविण्यासाठी लढा सुरू असताना लॉकडाउनमुळे हातचे काम गेल्याने भुकेचा प्रश्नही तेवढाच भीषण झाला. ‘लॉकडाउनच्या काळात आम्ही घरी राहायला तयार आहोत, मात्र पोट कसे भरायचे’, असा प्रश्न कष्टकऱ्यांनी उपस्थित केला. त्यांची भूक भागविण्याची मोठी जबाबदारी जिल्हा पुरवठा शाखेवर येऊन पडली. रेशनकार्डधारकांना नियमित धान्य देण्याबरोबर प्रतिव्यक्ती ५ किलो मोफत तांदूळ देण्याची घोषणा झाली. एप्रिल आणि मे महिन्यात रेशनकार्ड असणाऱ्या १४ लाख ५८ हजार १७२ शिधापत्रिकाधारकांना याचा लाभ मिळाला असल्याचा दावा जिल्हा प्रशासनाकडून करण्यात आला. रास्त दरात ३ लाख ४९ हजार १५ क्विंटल धान्य वितरित करण्यात आले आहे. मात्र, संकट मोठे असल्याने नियमात न बसणाऱ्या गरजूंचे काय, हा प्रश्न कायम होता. समाजातून अनेक मदतीचे हात अशांसाठी पुढे आले. हातावर पोट असणाऱ्यांची संख्या जिल्ह्यात मोठ्या प्रमाणात आहे. कष्टकरी म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्यांच्या हातातील कामच करोनामुळे बंद झाले. अशा संकटकाळात ओढवलेल्या उपासमारीमुळे जगण्याचाच प्रश्न गंभीर झाला…. १४ लाख ५८ हजार शिधापत्रिका धारकांपर्यंत धान्य पोहोचविल्याचा दावा प्रशासनाने केला असला तरी अद्यापही अनेकांची थाळी रिकामीच आहे. करोनामुळे दोनवेळच्या अन्नासाठीचा संघर्ष अधिकच भीषण झाला असल्याची व्यथा धान्याच्या प्रतीक्षेत असलेल्या अनेकांनी व्यक्त केली.असे वितरित झाले धान्यधान्य : वाटप : दरगहू : १ लाख ८७ हजार ५३ क्विंटल : २ रुपये किलोतांदूळ : १ लाख ४८ हजार ९१४ क्विंटल : ३ रुपये किलोसाखर : २ हजार २४८ क्विंटल : २० रुपये किलोदूरडाळ : ५ हजार ७४३ क्विंटल : ५५ रुपये किलोचणाडाळ : ५ हजार ५७ क्विंटल : ४५ रुपये किलो


यांना मिळाले मोफत

पंतप्रधान गरीब कल्याण अन्न योजनेंतर्गत सार्वजनिक वितरण व्यवस्थेतील पात्र लाभार्थ्यांसाठी तांदूळ मोफत देण्याचा निर्णय घेण्यात आला. प्रतिव्यक्ती प्रमाणे ५ किलो तांदूळ याप्रमाणे एप्रिल, मे आणि जून असे तीन महिने हे धान्य मोफत दिले जात आहे. एप्रिल आणि मे या दोन महिन्यात ३ लाख १ हजार ७५९ क्विटंल तांदूळ आणि ६ हजार ६९७ क्विंटल डाळ असे एकूण ३ लाख ८ हजार ४५६ क्विंटल धान्य मोफत देण्यात आले असल्याचे पुरवठा विभागाचे नायब तहसीलदार प्रशांत शेंडे यांनी सांगितले. एप्रिल आणि मे महिन्यात २ लाख ७० हजार ७२६ लोकांनी शिवभोजन थाळीचा लाभ घेतल्याचे शेंडे यांनी सांगितले.


लाखो गरजू अद्यापही प्रतीक्षेत


रेशनकार्ड असणाऱ्यांनाच जिल्हा पुरवठा कार्यालयांकडून धान्य देण्यात येत असल्याने इतर लाखोंचा प्रश्न अद्याप कायम आहे. न्यायालयाच्या निर्देशानुसार रेशनकार्ड नसणाऱ्या गरजूंचे सर्वेक्षण करण्यात आले. त्यानुसार जिल्ह्यात ७१ हजार ५२२ कुटुंबांकडे रेशनकार्ड नसल्याचे पुढे आले. या कुटुंबात राहणाऱ्या २ लाख ८६ हजार ८८ लाभार्थ्यांना आता मे आणि जून महिन्याचे मोफत देण्याची प्रक्रिया हाती घेण्यात आली आहे. सर्वेक्षणच आता झाले असल्याने ऐन लॉकडाउनचा काळ त्यांनी कसा काढला, असेल हा प्रश्न इथे उपस्थित होतो. जून महिन्यात त्यांना आता मे आणि जून महिन्यांचे धान्य देण्यात येणार असल्याचे प्रशासनाकडून सांगण्यात आले.

7 जून 2019 रोजी प्रथमच जागतिक अन्न सुरक्षा दिन साजरा करण्यात आला. हे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारे डिसेंबर 2018 मध्ये अन्न आणि कृषी संघटनेच्या सहकार्याने स्वीकारले होते.
हा दिवस साजरा करण्याचा उद्देश्य म्हणजे अन्न सुरक्षा मानक राखण्यासाठी जन जागृती करणे आणि अन्नजन्य आजारांमुळे होणाऱ्या मृत्युदर कमी करणे.
संयुक्त राष्ट्र संघाने आपल्या दोन संस्था अन्न आणि कृषी संघटना (Food and Agriculture Organization- FAO) आणि जागतिक आरोग्य संघटन (World Health Organization- WHO)ला जगभरातील अन्न सुरक्षेला चालना देण्यासाठी नियुक्त केल्या आहे.
अन्न सुरक्षा का आवश्यक आहे आणि ती कशी मिळवता येऊ शकते? या वर चर्चा करण्यासाठी संयुक्त राष्ट्रांनी मार्गदर्शक तत्त्वे विकसित केली आहे. त्याचे 5 मुद्दे खालील प्रमाणे आहेत.1 सरकारने सर्वांसाठी सुरक्षित आणि पौष्टिक जेवण सुनिश्चित केले पाहिजे.2 कृषी आणि अन्न उत्पादनामध्ये चांगल्या पद्धती राबविण्याची गरज आहे.3 व्यावसायिकाने अन्न पदार्थ सुरक्षित असल्याची खात्री द्यावी.4 सर्व ग्राहकांना सुरक्षित, निरोगी आणि पौष्टिक आहार मिळविण्याचा हक्क आहे.5 अन्न सुरक्षा ही एक सामायिक जबाबदारी आहे. सुरक्षित, पौष्टिक आणि पुरेसे अन्न चांगल्या आरोग्यास प्रोत्साहित करतं. त्याचबरोबर उपासमारीची समस्या दूर करतं.शासकीय उपक्रम -भारतीय खाद्य सुरक्षा आणि मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India-FSSAI) ने राज्यांद्वारे सुरक्षित अन्न पुरवठाकरण्यासाठी प्रयत्नासाठीच्या संदर्भात पहिले राज्य अन्न सुरक्षा इंडेक्स (State Food Safety Index-SFSI) विकसित केले आहेत.
या निर्देशकांच्या माध्यमाने अन्न सुरक्षेच्या पाच निकषांवरील राज्यांच्या कामगिरीचे मूल्यांकन केले जाईल. या श्रेणीमध्ये खालील निकषांचा समावेश आहे.* मानव संसाधन आणि संस्थात्मक व्यवस्थापन अंमलबजावणी, अन्न चाचणी पायाभूत सुविधा आणि देखरेख* प्रशिक्षण आणि क्षमता वाढविणे* ग्राहक सशक्तीकरण* एका अभिनव आणि बॅटरीने चालणारे रमन 1.0 नावाच्या डिव्हाईस ला बाजारपेठेत आणले आहेत. हे डिव्हाईस एका मिनिटापेक्षा कमी वेळेत खाद्य तेल, चरबी आणि तुपामधील केलेली भेसळ शोधण्यात सक्षम आहे.* शाळांकडे अन्न सुरक्षेचा मुद्दा नेण्यासाठी ‘फूड सेफ्टी मॅजिक बॉक्स’ नावाच्या नव्या समाधानाची सुरुवात केली गेली आहे.* या किट मध्ये स्वतःच अन्न मध्ये भेसळ असल्याची तपासणी करण्यासाठी मॅन्युअल आणि एक डिव्हाईस लागले आहे.* FSSAI ने विद्यापीठ, शाळा, महाविद्यालये, संस्था, कार्यस्थळे, संरक्षण आणि अर्ध-सैन्य प्रतिष्ठान, रुग्णालये, आणि कारागृह सारख्या 7 संकुलांना ‘ईट राइट कॅम्पस’ म्हणून घोषित केले आहे.* FSSAI ने अन्न कंपन्या आणि व्यक्तींचे योगदानाला ओळख देण्यासाठी ‘ईट राइट अवार्ड’ ची स्थापना केली आहे. जेणे करून नागरिकांना सुरक्षित आणि आरोग्यासाठी अन्न निवडण्यामध्ये सशक्त बनवणे.


अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितीतही उत्पादनात आघाडी घेऊनदेखील शेतकरी वर्गाची दैन्यावस्था संपलेली नाही. सरकारची चुकीची धोरणे, बाजार व तंत्रज्ञान, स्वातंत्र्याच्या अभावामुळे रोडावलेले भांडवल यांनी हा उत्पादक वर्ग त्रस्त आहे. अशा वेळी येऊ घातलेला अन्न सुरक्षा कायदा भारतीय शेतकºयांच्या बोकांडी तर बसणार नाही ?16 ऑक्टोबर हा जागतिक अन्न दिवस म्हणून पाळला जातो. इतर दिवस जसे साजरे केले जातात, तसा तो उत्सव न ठरता त्यावर अधिक गांभीर्याने विशेषत: भारतासारख्या भूकपीडित देशांनी बघावे, अशी जागतिक अन्न-कृषी संघटनेची अपेक्षा आहे व त्याला दिशा देऊ शकेल असा कृती कार्यक्रमही या निमित्ताने जाहीर झाला आहे. जगातील सुमारे सतरा टक्के लोकसंख्या उपाशीपोटी असून त्यातील बव्हंशी भारतासारख्या विकसनशील व इतर अविकसित राष्ट्रांत आहे. या लोकसंख्येला पुरेसे अन्न मिळावे याचा विचार करताना जागतिक अन्न-कृषी संघटनेने गरिबी वा भूक याबरोबर पुरेसे अन्न उपलब्ध करून देण्यात अपयशी ठरत असलेल्या सरकार नामक व्यवस्था व एकंदरीत अन्नाच्या अर्थ व बाजारव्यवस्था असा सांगोपांग विचार केलेला दिसतो. यात अर्थातच अन्न उत्पादन, साठवणूक वा प्रक्रिया यासाठी प्रगत तंत्रज्ञानाचा वापर यांचाही समावेश केला आहे.या वर्षीच्या कार्यक्रमातील ठळक वैशिष्ट्य म्हणजे अन्नाच्या किमती स्थिर व परवडण्याजोग्या ठेवण्यावर दिलेला भर. अन्नाच्या किमती वाढल्या, की लोकसंख्येचा एक मोठा भाग अचानकपणे अन्नापासून वंचित होतो व त्यावर नियंत्रण मिळवणे जिकिरीचे होऊन बसते. यात उत्पादनविषयक समस्यांबरोबर जागतिक बाजार व्यवस्था व देशोदेशींच्या संबंधित धोरणातील विसंगतींचा समावेश होतो. जागतिक व्यापार संघटना यात महत्त्वाची भूमिका बजावू शकते. ग्लोबल वॉर्मिंगसारख्या जागतिक हवामानातील बदलामुळे अन्न उत्पादनाचे सारे नकाशेच बदलून जाणार आहेत, त्याचीही चिंता घोंगावते आहे. यापुढचा अन्नविषयक धोरणात्मक कार्यक्रम हा जागतिक होत जाणार आहे. त्यामुळे भारतासारख्या उत्पादनात अग्रेसर असलेल्या देशाने बंदिस्तपणा सोडून, विशेषत: शेतमाल आयाती-निर्यातीत उदार होत आपली धोरणे ठरवली पाहिजेत. अन्न सुरक्षा हा विषय तसा केवळ दारिद्र्यरेषा ठरवण्यापुरता मर्यादित न ठेवता, त्याचा या साºया अंगांनी विचार करावा लागेल.या दिनाच्या निमित्ताने जाहीर झालेल्या कार्यक्रमात अन्न उत्पादनाला प्रोत्साहित करण्याबरोबर देशोदेशींच्या आपापसातील सामंजस्य-सहयोगाचे व्यवहार यासाठी शासकीय प्रयत्नांबरोबर अशासकीय व्यवस्थांचीही मदत घेतली जाणार आहे. संबंधित राष्टÑांना आर्थिक, तसेच तांत्रिक सहकार्य देऊ करतानाच त्या देशातील शेतकरी, महिला व वंचित वर्गांना सामील करून घेतले जाणार आहे. हे वर्ग पहिल्यांदाच आपल्याला या निर्णय प्रक्रियेत दिसू शकतील. असा सर्व पातळ्यांचा सर्वंकष विचार करणारा जागतिक संस्थेचा हा कार्यक्रम प्रत्यक्षात मात्र अमलात आणणे किती कठीण आहे, हे आजवर सरकार नामक व्यवस्थांनी आपल्या आडमुठेपणाने अगोदरच सिद्ध केले आहे.या पार्श्वभूमीवर भारत कुठे आहे? अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितीतही उत्पादनात आघाडी घेऊनदेखील शेतकरी वर्गाची दैन्यावस्था संपलेली नाही. सरकारची चुकीची धोरणे, बाजार व तंत्रज्ञान, स्वातंत्र्याच्या अभावामुळे रोडावलेले भांडवल यांनी हा उत्पादक वर्ग त्रस्त आहे. यात पुढे येऊ घातलेला अन्न सुरक्षा कायदा भारतीय शेतकºयांच्या बोकांडी बसतो की काय, अशी भीतीही व्यक्त होते आहे. कारण या योजनेत दिले जाणारे धान्य हे खुल्या बाजारात प्रचलित दराने खरेदी न करता, किमान हमी भावात जबरदस्तीने लेव्हीसारखे शेतकºयांकडून मिळवले जाईल व त्यावर आपण गरिबांचे कैवारी असल्याची हौस सरकार भागवून घेऊ शकेल. भारतीय कृषी क्षेत्रातील भांडवलाची पुनर्भरणी होणे अत्यावश्यक असताना या क्षेत्राला दोन पैसे मिळवून देणारी जी साखर, कापूस, कांदा यासारखी पिके आहेत, त्याबाबत येथील सरकार अन्यायाची भूमिका घेते. यामागे ग्राहकांचे हित पाहण्याची सबब सांगितली जाते. मात्र आजवर बाजारातील शेतमालाचे भाव पाहता हा उद्देशही सफल झाल्याचे दिसत नाही.अन्नधान्याच्या बाबतीतही या सरकारची भूमिका अशीच वादग्रस्त आहे. बाजारातील भाव वाढू नये म्हणून साठा करण्याचे समर्थन करायचे. त्यासाठी त्या धान्याला देशातच बाजारात काय भाव मिळू शकतो हे न बघता, किमान हमी भावाचा बडगा उगारून आपल्याकडे साठवणक्षमता आहे वा नाही हे न बघताच खरेदी करायची. तो साठा तसा सडवायचा आणि जनतेचे दुर्लक्ष झाले, की आपल्याच प्रयोगशाळांकडून मानवी उपयोगास अयोग्य असे शिफारसपत्र मिळवून त्या विक्रीतून प्रचंड भ्रष्टाचार करायचा, असा सारा प्रकार असल्यावर कोणत्या गरिबाच्या तोंडात घास जाणार?जाहीर झालेल्या कार्यक्रमात निकोप बाजार व्यवस्था व विकसित तंत्रज्ञानाची उपलब्धता यांचा उल्लेख आहे. या दोन्ही पातळ्यांवर भारतातील परिस्थिती अत्यंत निराशाजनक आहे. भारतातील शेतमाल बाजार अत्यंत बंदिस्त असून या स्वतंत्र भारताच्या नागरिक असलेल्या शेतकºयाला आपला माल कुणाला, कसा, काय भावाने विकावा, याचे स्वातंत्र्य नाही. भारतातील गरिबांना परवडण्यायोग्य दरात अन्न देता येईल एवढी उत्पादन क्षमता भारतीय शेतकºयांमध्ये नक्कीच आहे. या क्षेत्रात रास्त दराच्या माध्यमातून भांडवलाची पुनर्भरणी झाल्यास रोजगार निर्मितीतून या अन्नधान्याचा खपही वाढवता येऊ शकतो व गरिबी निर्मूलनावर होणाºया अनुदानात लक्षणीय कपातही होऊ शकते. मात्र सरकारला आपला या क्षेत्राकडे पाहण्याचा दृष्टिकोन बदलावा लागेल. जागतिक दिशेने आगेकूच करणाºया व या धोरणांना अनुकूल असणाºया ‘जी 8’ देशांपैकी काही देशांचे अर्थसाहाय्य दुप्पट करणारी 500 दशलक्ष डॉलर्सची योजना जाहीर झाली आहे. दुर्दैवाने भारत त्यात नाही यावरूनच आपल्याला अजून किती व काय पल्ला गाठायचा आहे, हे लक्षात येते.

उपासमारीचे संकट; मदत द्या

नागपूर : 14 जून 2020 : करोना विषाणूंमुळे घोषित करण्यात आलेल्या लॉकडाउनमुळे विदर्भातील सुमारे एक लाखाहून अधिक ऑटोचालकांवर उपासमारीची वेळ आली असून, त्यांना आर्थिक मदत देण्यात यावी, अशी विनंती करणारी जनहित याचिका मुंबई हायकोर्टाच्या नागपूर खंडपीठासमोर सादर करण्यात आली.विदर्भ ऑटोरिक्षा चालक फेडरेशनने दाखल केलेल्या याचिकेवर न्या. अतुल चांदूरकर आणि न्या. अमित बोरकर यांच्या खंडपीठासमोर सुनावणी झाली. तेव्हा हायकोर्टाने राज्य सरकार, जिल्हाधिकारी व इतरांना नोटीस बजावली.याचिकाकर्त्यानुसार, राज्यात लॉकडाउन लागल्यापासून ऑटोंवर बंदी घालण्यात आली आहे. विदर्भातील नागपूरसह प्रमुख शहरांमध्ये सुमारे १ लाख ऑटोचालक आहे. ऑटो व्यवसायावरच त्यांचा उदरनिर्वाह आहे. परंतु, ऑटोवर बंदी घालण्यात आल्याने अनेकांना आर्थिक टंचाईचा सामना करावा लागत आहे. सरकारने शाळा व कॉलेजही बंद केले आहेत. तसेच खासगी शिकवणी वर्गही बंद आहेत. अनेक ऑटोचालक प्रवासी वाहतुकीसोबतच विद्यार्थ्यांनाही सेवा देत होते. परंतु, आता त्यांचा सगळाच व्यवसाय बंद पडला आहे. त्यावर उपाय म्हणून ऑटोचालकांना राज्य सरकारने किमान पाच हजार रुपये महिना द्यावा, त्यांच्या कुटुंबाला जगण्यासाठी आवश्यक साधने द्यावीत, अशी मागणी करणारे निवेदने आमदार व खासदारांना देण्यात आली. परंतु, त्यावर कोणीही लक्ष दिले नसल्याने हायकोर्टात याचिका दाखल करावी लागली आहे, असे संघटनेने याचिकेत नमूद केले.
याचिकेवरील सुनावणीदरम्यान सरकारच्या वतीने बाजू मांडताना सरकारी वकील सुमंत देवपुजारी यांनी, ऑटोचालकांच्या समस्यांवर समाधान काढण्यासाठी सरकार प्रयत्न करीत आहे. त्याबाबत लवकरच बैठक होणार असल्याचे नमूद केले. तेव्हा ऑटोचालकांबाबत घेतलेल्या निर्णयाची माहिती सादर करण्यासाठी सरकारला वेळ देण्यात आला. याचिकाकर्त्यातर्फे अॅड. रवी सन्याल यांनी बाजू मांडली,

भारत में लॉकडाउन से 34 प्रतिशत घरों के पास खाने का पैसा नहीं, हम कर सकते हैं मदद: इमरान खान

इस्‍लामाबाद : 14 जून 2020 : कहते हैं कि घर में नहीं दाने और अम्‍मा चली भुनाने। कोरोना वायरस महासंकट के बीच भ्रष्‍टाचार और लापरवाही के आरोपों को लेकर अपने ही घर में बुरी तरह से घ‍िरे पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत को मदद का ऑफर दिया है। इमरान खान ने एक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि भारत में 34 प्रतिशत घर खाने के लिए बिना मदद के एक हफ्ते से ज्‍यादा समय तक नहीं चल सकते हैं। :  इमरान खान ने एक खबर का लिंक ट्वीट कर कहा, ‘इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 34 प्रतिशत घरों में लोग बिना सहायता के एक सप्‍ताह से ज्‍यादा समय तक नहीं चल सकते हैं। मैं भारत की मदद और ट्रांसफर प्रोग्राम को साझा करने के लिए तैयार हूं। हमारे कैश ट्रांसफर प्रोग्राम की जनता तक पहुंच और पारदर्शिता को लेकर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रशंसा हुई है।’पाकिस्‍तानी पीएम ने कहा, ‘हमारी सरकार ने सफलतापूर्वक 120 अरब रुपये नौ सप्‍ताह के अंदर एक करोड़ परिवारों को बेहद पारदर्शी तरीके से ट्रांसफर किए हैं। ताकि गरीब परिवार कोरोना वायरस के कहर से आसानी निपट सकें।’ दरअसल, इमरान खान एक रिपोर्ट का हवाला दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से भारत में बहुत गंभीर प्रभाव पड़ा है।


भारतीयों के खाते में तत्‍काल पैसा भेजने की जरूरत

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और मुंबई की संस्‍था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 84 प्रतिशत भारतीय घरों में लॉकडाउन के बाद आय में गिरावट आई है। कुल परिवारों में एक तिहाई परिवार बिना अतिरिक्‍त मदद के एक सप्‍ताह से ज्‍यादा जिंदा नहीं रह सकते हैं। इस‍ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीयों के खाते में तत्‍काल पैसा और उन्‍हें भोजन देने की सख्‍त जरूरत है।
दरअसल, इमरान ने अपने इस मदद के ऑफर के जरिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। अभी कुछ द‍िन पहले ही इमरान ने कहा था कि लॉकडाउन के कारण भारत में लोग भूखों मर रहे हैं। वहीं, अमेरिका जैसे अमीर देश में लाइनों में खड़े लोगों को खाना दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हालांकि, पाकिस्तान में उतना नुकसान नहीं हुआ है। इमरान खान ने पाकिस्तान में लॉकडाउन के दूसरे चरण को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दूसरा लॉकडाउन बर्दाश्त नहीं कर सकता है। लॉकडाउन के कारण देश को 800 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस से हालात बेकाबू

इमरान भारत को मदद का यह ऑफर ऐसे समय पर दे रहे हैं जब खुद उनके देश में कोरोना वायरस से हालात बेकाबू हो गया है। डॉक्‍टरों को पीपीई क‍िट नहीं मिल रहा है और खुद इमरान सरकार के दिग्‍गज मंत्री और नेता कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। पाकिस्तान में विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग-नवाज के प्रमुख शहबाज शरीफ भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 119,536 हो गई है। वहीं अब तक 2,356 मरीजों की मौत हो चुकी है। इमरान पूरी दुनिया से कर्ज मांगते फिर रहे हैं। इसी बीच एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने पाकिस्तान को कोरोना वायरस महामारी की चुनौती से निपटने के लिए 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ऋण देने की घोषणा की है।

बेरोजगारीने 6 तरुणाची आत्महत्या

नागपूरः 20 जून 2020:  शहरातील एकूण सहा जणांनी आत्महत्या केल्याचे समोर आले आहे. यातील एक तरुणाने लॉकडाउन दरम्यान रोजगार गेला आणि पोटापाण्याचा प्रश्न निर्माण झाल्याने आत्महत्या केल्याचे समोर आले आहे. विवेक माणिकराव लाडकर (वय, ३०, रा. नारायणपेठ) असे या आत्महत्या करणाऱ्या तरुणाचे नाव आहे.
विवेक काही काळापूर्वी खासगी कंपनी काम करीत असल्याची माहिती प्राप्त झाली आहे. गुरुवारी सकाळी १०च्या सुमारास त्याने आत्महत्या केल्याचे समोर आले. लॉकडाउनमुळे सगळे व्यवसाय ठप्प झाले आणि आपल्याकडे जिवीकेचे साधन नसल्याने आपल्यावर उपासमारीची वेळ आली आहे. त्यामुळे आपण आत्महत्या करीत असल्याच्या आशयाची एक चिठ्ठी त्याने आत्महत्येपूर्वी लिहीली आहे. शांतीनगर पोलिसांनी ही चिठ्ठी जप्त केली असून या प्रकरणी अकस्मात मृत्यूची नोंद केली आहे. त्याने बेरोजगारीमुळे त्याने आत्महत्या केली असावी पोलिसांचा प्राथमिक अंदाज आहे. याखेरीज हुडकेश्वर पोलिस ठाण्याच्या हद्दीतील जगन्नाथ गुणवंतराव ठाकरे (६२) यांनी आत्महत्या केली. तसेच एमआयडीसी पोलिस ठाण्याच्या हद्दीतील दिलीप चंद्रदेव दास (वय, ३५, रा. शांतीनगर) यांनी आपल्या घरी गळफास लावून आत्महत्या केली. इमामवाडा पोलिस ठाण्याच्या हद्दीतील अमोल जिवन पोटपोसे (वय २५, पाच नल चौक) याने आपल्या राहत्या घरी गळफास लावून आत्महत्या केली. हुडकेश्वर पोलिस ठाण्याच्या हद्दीतील शालीकरामजी माणीकराव धारपुरे (७०, रा. गुरुकुंजनगर) यांनी आत्महत्या केली. याखेरीज मानकापूर पोलिस ठाण्याच्या हद्दीतील अभीषेक अभय दुबे (वय, २२, रा. गोरेवाडा) याने गळफास लावून आत्महत्या केली. या सर्वच प्रकरणांमध्ये संबंधित पोलिसांनी अकस्मात मृत्युची नोंद करून तपास सुरू केला आहे.

व्यवसायी ने की आत्महत्या

नागपुर, 21 जून (भाषा) महाराष्ट्र के नागपुर के एक कारोबारी ने लॉकडाउन के कारण आर्थिक परेशानी की वजह से रविवार को अपने घर में कथित रूप से आत्महत्या कर ली।एक अधिकारी ने बताया कि मृतक उपेंद्र उर्फ उप्पी ताराचंद महाडुले खानपान का व्यवसाय करते थे और शहर में उनकी एक किराना की दुकान और एक गोदाम है। अधिकारी ने बताया कि महाडुले ने अपने कथित सुसाइड नोट में खुदकुशी करने का कारण आर्थिक परेशानी को बताया है। अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच के दौरान, मृतक ने शेयर बाजार में निवेश किया था लेकिन लॉकडाउन के दौरान नुकसान हुआ। सदर थाने में दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया गया है।
आर्थिक परेशानी के चलते एक व्यवसायी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. यह घटना सदर थानांतर्गत गांधीचौक परिसर में हुई. मृतक राजनगर निवासी उपेंद्र उर्फ उप्पी ताराचंद महादुले (50) बताए गए. उपेंद्र उत्सव कैटरर्स और महादुले बिछायत केंद्र के संचालक थे. सदर के गांधीचौक पर उनका आफिस, किराणा दूकान और गोदाम था. रविवार की सुबह 8 बजे के दौरान पुलिस को उपेंद्र द्वारा फांसी लगाए जाने की जानकारी मिली. खबर मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा. उपेंद्र ने सदर स्थित अपनी 4 मंजिला इमारत की छत पर बने शेड से कपड़े की चिंदी बांधकर फांसी लगाई थी.उपेंद्र की आत्महत्या की खबर पूरे सदर परिसर में फैल गई और दोस्तों-रिश्तेदारों का हुजूम उमड़ गया. पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें उपेंद्र अपने जीवन से दुखी होकर और आर्थिक परेशानी के चलते आत्महत्या करने की बात लिखी थी. पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है. उपेंद्र ने शेयर बाजार में मोटी रकम निवेश की थी. अनुमान है कि शेयर बाजार में घाटा होने के कारण उपेंद्र परेशान थे. कई दिनों से तनाव में रह रहे थे.शनिवार को भी देर रात तक सदर परिसर में ही घूम रहे थे. कंटेन्मेंट जोन के पास पुलिस को दिखाई दिए. पुलिस ने उन्हें घर जाने को कहा. इसके बाद भी उपेंद्र अपने घर नहीं गए. वैसे उपेंद्र से जुड़े लोग यह मानने को तैयार नहीं है कि आर्थिक परेशानी के चलते उन्होंने आत्महत्या की. शहर के बड़े कैटरिंग व्यवसायियों में उपेंद्र का नाम था. पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है. 

आर्थिक  कारणास्तव सलून चालकाची आत्महत्या

नागपूरः 25 जून 2020 : लॉकडाउनमुळे व्यवसाय ठप्प झाल्याने आर्थिक अडचणीचा सामना करणाऱ्या सलून चालकाने गांधीसागरमध्ये उडी घेऊन आत्महत्या केली. दिलीप बाबूराव कापसे (वय ६० रा. यादवनगर, कामठी रोड),असे मृताचे नाव आहे.
पोलिसांनी दिलेल्या माहितीनुसार, दिलीप कापसे यांचे राणी दुर्गावती चौकात सलून आहे. लॉकडाउनमुळे सलून बंद असल्याने कापसे यांना आर्थिक चणचण भासायला लागली. ते तणावात होते. दोन दिवसांपूर्वी ते घरून निघाले. गांधीसागरमध्ये उडी घेऊन आत्महत्या केली. बुधवारी सकाळी एका ज्येष्ठ नागरिकाचा मृतदेह तलावात तरंगताना पोलिसांना आढळला. पोलिसांना मृताच्या खिश्यात दस्तऐवज आढळले. त्यावरून ओळख पटली. पोलिसांनी पंचनामा करून मृतदेह शवविच्छेदनासाठी हॉस्पिटलकडे रवाना केला. आर्थिक अडचणीमुळे त्यांनी आत्महत्या केल्याचे पोलिसांनी सांगितले. गणेशपेठ पोलिसांनी आकस्मिक मृत्यूची नोंद करून तपास सुरू केला आहे. सलून बंद असल्याने चालकांना आर्थिक अडचणीचा सामना करावा लागत आहे. सलून चालकांनी दुकाने सुरू करण्यासाठी यापूर्वी अनेकदा आंदोलनही केले आहे.दरम्यान, मदत आणि पुनर्वसन राज्यमंत्री विजय वडेट्टीवार यांनी सलून आणि पार्लर सुरू झाल्यावर अटी व शर्तींचं पालन करावं लागेल असं म्हटलं होतं. राज्य सरकारने अद्याप सलून किंवा पार्लर सुरू करण्यास परवानगी दिलेली नाही. मात्र लवकरच यासाठीचा आदेश जारी केला जाईल. अशीही माहिती त्यांनी दिली.

तरुण अभियंत्याने गळफास घेऊन आत्महत्या केली

संजय पाटील : नागपूर मीडिया प्रेस : 7 जुलै 2020 : नागपूर: करोनामुळे नोकर कपात झाल्याने नोकरी मिळणार नाही, या भीतीने तरुण अभियंत्याने गळफास घेऊन आत्महत्या केली. ही हृदयद्रावक घटना अर्चित पॅलेस,नरेंद्रनगर येथे शनिवारी उघडकीस आली.  सिद्धांत संजय कडू (२२), असे मृताचे नाव आहे. सिद्धांत याचे अभियांत्रिकीचे शिक्षण पूर्ण झाले होते. तो नोकरीच्या शोधात होता.करोना संसर्गामुळे लॉकडाऊन झाल्याने नोकरी लागणार नाही, अशी भीती त्याला होती. त्यामुळे गत काही दिवसांपासून तो तणावात होता. शुक्रवारी रात्री त्याने आई-वडिलांसोबत जेवण केले. त्यानंतर तो आपल्या खोलीत गेला आणि पंख्याला चादर बांधून त्याने गळफास घेतला. पहाटे ४ वाजताच्या सुमारास संजय यांनी सिद्धांत याला आवाज दिला असता प्रतिसाद मिळाला नाही.संजय यांनी दरवाजा उघडून बघितले असता सिद्धांत हा गळफास लावलेल्या स्थितीत दिसला आणि त्यांना हादराच बसला. त्यांनी डॉक्टरला तातडीने बोलावले. डॉक्टरांनी तपासले असता त्याचा आधीच मृत्यू झाल्याचे निष्पन्न झाले. घटनेची माहिती मिळताच बेलतरोडी पोलिसांचा ताफा तेथे पोहोचला. पंचनामा करून पोलिसांनी मृतदेह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटलकडे रवाना केला. पोलिसांनी सिद्धांत याने आत्महत्यूपूर्वी लिहिलेली चिठ्ठी जप्त केली. ‘मला माफा करा,आई ,बाबा तुम्ही सुखी व प्रेमाने राहा’, असे त्याने चिठ्ठीत लिहिले आहे. त्याचे आई-वडील सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी आहेत. त्याला एक बहीण असून ती शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालयात (मेडिकल) वैद्यकीय अभ्यासक्रमाला असल्याची माहिती पोलिसांनी दिली. सिद्धांतच्या आत्महत्येप्रकरणी बेलतरोडी पोलिसांनी आकस्मिक मृत्यूची नोंद करून तपास सुरू केला आहे.

रोजगार गेला, तरुणाचा गळफास, तर वृद्धाची रेल्वेखाली उडी

जळगावः करोना संसर्गामुळे सुरु असलेल्या लॉकडाऊनमध्ये अनेकांचा रोजगार गेला आहे. इतरत्र देखील रोजगार उपलब्ध होत नसल्याने अनेकांवर उपासमारीची वेळ येत आहे. याच बेरोजगारीने जळगाव जिल्ह्यात दोघांचा बळी घेतला आहे. तालुक्यातील वडली येथिल तरुणाने बेरोजगारीला कंटाळून गळफास घेतला आहे. तर दुसऱ्या घटनेत लोणवाडीतील घटनेत एका वृध्दाने धावत्या रेल्वेसमोर झोकून देत जीवनयात्रा संपविली आहे. रितेष उर्फ राजू सुरेश पाटील (२३) असे मृत तरुणाचे तर लहू कौतिक पाटील (७०) असे वृद्धाचे नाव आहेजळगाव तालुक्यातील वडली येथे रितेष उर्फ राजू ट्रॅक्टरसह मोठ्या वाहनांवर रोजंदारीने चालक म्हणून काम करीत होता. त्याचा भाऊ, वडील वेल्डींगचे दुकान चालवत होते. लॉकडाऊन काळात या तीघांचे रोजगार बंद पडले. राजुला बेरोजगारी असह्य झाली होती. खिशात पैसे नाही, हाताला काम नाही या नैराश्यातून राजुने राहत्या घरापासून काही अंतरावर असलेल्या देवराम महाराज मंदिराच्या मागे निंबाच्या झाडाला दोरीने गळफास घेऊन आत्महत्या केली. बुधवारी सकाळी सहा वाजता ही घटना उघडकीस आली. यानंतर गावकऱ्यांनी घटनास्थळी एकच गर्दी केली होती. या घटनेमुळे पाटील कुटुंबियांना प्रचंड धक्का बसला.

धावत्या रेल्वेखाली वृध्दाची उडी

दुसऱ्या एका घटनेत जळगाव तालुक्यातीलच लोणवाडी येथील लहू कौतिक पाटील (७०) यांनी मंगळवारी सकाळीच घर सोडले होते. संध्याकाळी पाच वाजता म्हसावद-बोरनार शिवारातील लोहमार्गावरील रुळावर त्यांचा एक धड नसलेला मृतदेह आढळून आला. मुंबईकडे जाणाऱ्या मालगाडीसमोर झोकून देत त्यांनी आत्महत्या केल्याची माहिती पोलिसांनी दिली. लहू पाटील यांची परिस्थिती देखील जेमतेम होती. मुलगा अनिल हा सुरत येथे परिवारासह रहात होता. लॉकडाऊनमुळे रोजगार बंद झाल्याने मुलगा परिवारासह घरी आला होता तर मोठा मुलगा भाऊसाहेब हा सासरवाडीला खांडवा वास्तव्याला आहे. लोणवाडी येथे पत्नी सुशिलाबाई यांच्यासोबत ते वास्तव्याला होते.

आत्महत्या : कपिल नगर आणि माणकापूरची घटना

नागपूर : 12 जुलै 2020 :  वेगवेगळ्या पोलिस ठाण्यांतर्गत 2 जणांनी फाशी देऊन आत्महत्या केली. कपिल नगर पोलिस स्टेशन अंतर्गत पहिली घटना घडली. यामध्ये सुरेश राजेंद्र खोब्रागडे (वय 55, रा. प्लॉट नंबर 277, सिद्धार्थ नगर, टेका नाका, कामठी रोड) यांनी गुरुवारी रात्री 10.30 वाजता ग्रामीण आरटीओ कार्यालयाच्या मागील अंगणात झाडाला गळफास लावून आत्महत्या केली.
स्थानिक लोकांनी त्याला झाडाला लटकवल्याची माहिती दिली. त्याला रुग्णालयात नेण्यात आले पण डॉक्टरांनी त्याला मृत घोषित केले. मृतक कॅटरिन म्हणून काम करायचा. त्यांच्या पश्चात पत्नी व 2 मुले असा परिवार आहे. दुसरी घटना मानकापूर पोलिस स्टेशन परिसरात घडली. चिंगाबाई टाकळी पुराणी बस्ती, आशादाई अशोक अंबाद्रे (वय 47, रा. झेंडा चौक) यांनी घराच्या कमाल मर्यादा पंख्याने दुपटीला फाशी दिली. या दोन्ही घटनांमध्ये तक्रारदाराच्या तक्रारीवरून पोलिसांनी अपघाती मृत्यूचा गुन्हा दाखल करून तपास सुरू केला आहे.