
संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : ३० जुलाई २०२० : गोंदिया : गोंदिया शहर को लगकर ही पिंडकेपर लघु सिंचन प्रकल्प है। कुछ गावो को सुजलाम – सुफलाम करने के दृस्टि से यहाँ प्रकल्प बनाया गया था। लेकिन पिछले ३६ साल से अभीतक इसे पूरा करने में शाशन उदासीन है। प्रकल्प पूरा नहीं होने के कारन गांव के लोगो में असन्तुस्टिका वातावरण है। ५ जनवरी १९८३ को पिंडकेपर लघु प्रकल्प को शाशन की ओर से प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गयी। साथ ही साथ इसे शुरू करने के लिए २. ४३ करोड़ रुपये दिए गए। उसके बाद सर्कार की तरफ से निधि मिलना बंद होने की वजह से यहाँ प्रकल्प अधूरा पड़ा है। १९८८-८९ में वन विभाग की तरफ से इसमें अवरोध निर्माण हुवा। कुछ साल पहले वह अवरोध भी हटाया गया। उसके बाद भी इसे पूरा करने में शाशन की उदासीनताही नजर आयी। २००९-१० में पहलीबार 4. ४ करोड़ रुपये दिए गए, खर्च भी किये गए। उससे पहले २००७-०८ , २००८-०९, २००९-१०, २०१४-१५, २०१५-१६, २०१६-१७ में एक रूपया भी खर्च किया नहीं गया। २०१८- १९, २०१९-२० में छोटीसी रक्कम खर्च की गयी। इतना अरसा बिताने पर भी यहाँ प्रकल्प पूरा नहीं होने के पीछे क्या राज है यह सवाल यहाँ की जनता सर्कार स पुंछ रही है।गोंदिया लघु सिंचन विभाग में वर्ष २०१५ से २०२० तक जितने काम हुए है क्या शाशन इसकी जाँच करेगी ? यह भी सवाल यहाँ के नागरिको के मन को सता रहा है।