
संजय पाटील : नागपूर प्रेस मीडिया : २४ जुलै २०२०: अमरावती. 8 लाख की जनसंख्या वाले शहर को मुलभूत सुविधाएं देने में कार्यरत अमरावती महानगरपालिका घोटालों के लिए पूरे राज्य में जानी जाती है. बीते एक दशक में महानगरपालिका में एक दर्जन से अधिक घोटाले हुए, लेकिन एक में भी जांच पूरी नहीं हुई और ना ही किसी पर आज तक कोई कार्रवाई हुई.
इस दौरान सभी राजनीतिक दलों की सत्ता महानगरपालिका पर रही. प्रशासन समेत किसी भी सियासी दल ने इन करोड़ों के घोटालों की जांच व कार्रवाई को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई. कोई ना कोई कनेक्शन के चलते सभी ‘तेरी भी चुप मेरी चुप’ का स्टैंड लेकर प्रत्येक घोटाला रफा-दफा होता रहा है. जबकि अपने खून-पसीने की कमाई टैक्स के रूप में महानगरपालिका में जमा करने वाले नागरिकों को कभी न्याय नहीं मिलता.
करोड़ों बर्बाद
मनपा में अनेक घोटाले हुए, जिनमें घोटालेबाजों ने करोड़ों की निधि पर हाथ साफ किए. इनमें वर्तमान शौचालय घोटाले के साथ फायबर टॉयलेट घोटाला, मल्टियूटिलिटी वैन खरीदी घोटाला, हाईड्रॉलिक ऑटो खरीदी घोटाला, संपत्ति टैक्स वसूली घोटाला, मार्केट किराया वसूली घोटाला, कौशल्य विकास योजना, इंदला पावती घोटाला, अंबा नाला घोटाला, सांस्कृतिक भवन घोटाला आदि का प्रमुखता से उल्लेख किया जा सकता है.
DPR पर भी करोड़ों फूंके
घोटालों में करोड़ों रुपये गवाने वाले मनपा प्रशासन ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के नाम पर भी करोड़ों की निधि फूंक दी है. प्रशासन ने हाकर्स जोन का सर्वेक्षण, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, छत्री तालाब सौंदर्यीकरण, नालों पर सुरक्षा दीवार निर्माण, संपत्ति असेसमेंट सर्वेक्षण आदि काम के लिए विभिन्न कंपनियों को डीपीआर बनाने नियुक्त किया गया. डीपीआर बनाने के लिए करोड़ों खर्च हो गए, लेकिन प्रत्यक्ष में काम शुरू नहीं हो पाया या फिर पूरा नहीं हुआ.