
” धर्म नशे की गोली है” , ” राजकरण एक वेश्या व्यवसाय है, राजनीती , जो पूंजपतियो के घरो में सोती है”- कार्ल मार्क्स ने कहा है, इसीलिए पुरे विश्व में कार्ल मार्क्स की थौरी नापास हो गयी है। लेकिन आधुनिक युग में डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकरजी ने भारत में लोकतंत्र को जन्म दिया है जोकि लोक ही अपने द्वारा चुने हुए लोगोसे शासन चलाये और उन लोगो के अधिकार के लिए लढ़े जिन्होंने उन्हें चुनकर लोकसभा , राज्यसभा, संसद , परिषदों में भेजा है इसीको लोकतंत्र कहते है. इस तरहसे लोगो द्वारा, लोगो के कल्याण लिए, जो शासन प्रणाली काम कराती है उसे लोकतंत्र कहते है. इतना ही नहीं तो सारे विश्व के अधिकाँश देशो ने लोकतंत्र को चुना है. भारत उनमे से एक है. मगर भारत में सब कुछ उल्टा हो रहा है, न्याय पालिका निष्पक्ष न्याय देने असमर्थ है, राजकारणी लोग , लोगो के भलाई का काम, कम और उनका शोषण ज्यादा कर रहे है. हर एक पार्टियों में क्रिमिनल लोगो को ज्यादा से ज्यादा तादाद में ले रहे है, वैसे सारे भारत में या यु कहिये सारे विश्व में कोरोना फैला हुवा है शायद यह भी इन राजकरनियो का षड़यंत्र हो सकता है। भारत में जीतनी भी राजनितिक पार्टिया है और उनमे जो पार्टिया चलाने वाले मेंबर है वह किसी न किसी क्रिमिनोलॉजी से जुड़े हुए है. अच्छे पढ़े लिखे लोग राजकरण में आने से क्यों कतराते है ? भारत में गरीब, लाचार और गरीब हो रहा है पूंजीपति ओर धनवान हो रहा है. भ्रष्ट्राचार की जैसे नदिया बह रही है स्वंत्रता के बाद से जितने भी इलेक्शन हुए है कही न कहीसे कुछ न कुछ असवैधानिक धब्बे लगे है , ईसका इतिहास गवाह है, इस विषय पे अगर लिखना हो तो एक हजार पन्नो की किताब लिखी जा सकती है. मेरा कहने का तात्पर्य यह है की भारत में जो सर्कार सेण्टर में बैठी है , राज्यों की सरकारे , शहरों में जिस तरह का एक अराजकता माहौल पैदा हुआ है काफी भयावह है, दिन ब दिन पोलिटिकल क्राइम बढ़ता जा रहा है. सेनेटरी कटैलिसीस का भूत लोकतंत्र को प्रभावी ढंग से प्रभावित करता है। जिन देशों में लोकतंत्र का सम्मान कई वर्षों से स्थापित है, वह खतरनाक नहीं हो सकता। लेकिन ऐसी जगहों पर चीजें अलग दिखती हैं.लोकतंत्र के विपरीत, एक मजबूत और जीवंत सार्वजनिक क्षेत्र की विशेषता वाले लोकतंत्र में, लोगों के हित और कार्य निजी क्षेत्र में जाते हैं जहां वे भौतिक चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और समुदाय के बारे में भूल जाते हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है, क्योंकि राजनीतिक व्यवस्था में अपरिवर्तनीय परिवर्तन किए जा सकते हैं जब लोग चिंतित हों।
डॉ. आंबेडकर ने अपनी किताब ‘प्राचीन भारत में क्रान्ति और प्रतिक्रान्ति’ में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘सबसे पहले तो हमें यह तथ्य स्वीकार करना होगा कि भारत में साझी संस्कृति जैसी कोई चीज ही नहीं रही है।
ऐतिहासिक रूप से यहाँ तीन भारत रहे हैं-
ब्राह्मण भारत,
बौद्ध भारत
हिन्दू भारत
इसी किताब में वे आगे कहते हैं कि मुसलमानों के आक्रमण से पहले ब्राह्मण धर्म और बौद्ध धर्म के बीच तीखा संघर्ष चला। इस संघर्ष में बौद्ध धर्म ने ब्राह्मण धर्म को पराजित कर दिया था। वे इसी किताब में लिखते हैं कि ‘अशोक ने बुद्ध धम्म को राजकीय धर्म घोषित कर दिया। सचमुच यह ब्राह्मणवाद के लिए बहुत बड़ा धक्का था। इससे ब्राह्मणों को राज्य का संरक्षण मिलना बन्द हो गया। अशोक साम्राज्य में उन्हें गौण या अधीनस्थों का दर्जा दिया जाने लगा और उनकी अवहेलना की जाने लगी। निःसन्देह कहा जा सकता है कि ब्राह्मण धर्म को दबा दिया गया, क्योंकि अशोक ने सभी पशुओं की बलि पर रोक लगा दी, जिस पर ब्राह्मणवाद टिका हुआ था। इस प्रकार ब्राह्मणों को न केवल राज्य का संरक्षण मिलना बन्द हो गया बल्कि उनका व्यवसाय भी छिन गया। यह व्यवसाय था, यज्ञ कर्म करना और उसके बदले में शुल्क लेना, जो बहुत अधिक होता था। इस प्रकार 140 वर्षों तक मौर्य साम्राज्य रहा और इस दौरान ब्राह्मण लोग दलित और दमित वर्गों की तरह रहे।’ फिर ब्राह्मणों ने साजिश रचना शुरू किया कि कैसे बौद्ध धम्म को पराजित करके ब्राह्मणों के वर्चस्व को फिर से कायम किया जाए। इस साजिश का वर्णन करते हुए बाबा साहब अपनी किताब ‘प्राचीन भारत में क्रान्ति और प्रतिक्रान्ति’ में कहते हैं कि दुखी ब्राह्मणों के पास बौद्ध साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने के अतिरिक्त दूसरा कोई उपाय नहीं था। यही विशेष कारण था, जिससे पुष्यमित्र ने मौर्य साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया। पुष्यमित्र ‘शुंग’ गोत्र का था। शुंग लोग सामवेदी ब्राह्मण होते थे, जो पशुबलि और सोमबलि में विश्वास करते थे। इसलिए समूचे मौर्य साम्राज्य में पशुबलि निषिद्ध होने और अशोक द्वारा जगह-जगह शिलालेखों आदि पर उसकी घोषणा खुदवा देने से शुंगों को स्वाभाविक तौर पर अनेक कष्ट भोगने पड़ रहे थे।
पुष्यमित्र एक सामवेदी ब्राह्मण था, और अगर उसने ब्राह्मणों को ह्रास के लिए जिम्मेदार बौद्ध साम्राज्य को नष्ट कर ब्राह्मणों का उद्धार करने और उन्हें अपने धर्म के पालन की छूट देने का बीड़ा उठाया तो, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी। पुष्यमित्र द्वारा की गयी राजहत्या का उद्देश्य राज्यधर्म के रूप में बुद्ध-धम्म को नष्ट करना और ब्राह्मणों को भारत का सम्प्रभु शासक बनाना था, जिससे राजा की राजनीतिक सत्ता की सहायता से बुद्ध धम्म पर ब्राह्मण धर्म की विजय हो सके।… मौर्य साम्राज्य के विरुद्ध पुष्यमित्र ने जिस प्रतिक्रान्ति का सूत्रपात किया, उसका लक्ष्य बुद्ध धर्म का विनाश (अन्तिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ की हत्या करके) और उसके स्थान पर ब्राह्मणवाद को स्थापित करना था, जो विधि संहिता के रूप में मनुस्मृति को अपनाये जाने के बारे में की गई उसकी घोषणा से स्पष्ट है। पुष्यमित्र की बुद्ध-धम्म के प्रति निर्दयता का अनुमान बौद्ध भिक्खुओं के विरुद्ध जारी उसकी घोषणा से लगाया जा सकता है। इस घोषणा में पुष्यमित्र ने हर बौद्ध भिक्खु के कटे हुए सिर की कीमत सौ स्वर्ण मुद्रायें निर्धारित की थीं।”
इस विजय के बाद क्या हुआ इस सन्दर्भ में डॉ. आंबेडकर लिखते हैं कि ‘‘ब्राह्मणवाद अपनी विजय के बाद मुख्य रूप से वर्ण को जाति में बदलने के विशाल और स्वार्थपूर्ण कार्य में जुट गया। वर्ण को जाति में बदलने के पीछे ब्राह्मणवाद का क्या उद्देश्य था, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। प्राचीन काल से ब्राह्मण जिस उच्च पद और प्रतिष्ठा का उपयोग करते आए, वह विशेषाधिकार प्रत्येक ब्राह्मण और उसकी सन्तति को गुण या योग्यता की अपेक्षा किए बिना निर्बाध प्रदान करना ही इसका एकमात्र उद्देश्य था। दूसरे शब्दों में यह उद्देश्य था कि प्रत्येक ब्राह्मण को, चाहें वह कितना ही भ्रष्ट और अयोग्य क्यों न हो, पद और गौरव देकर उसे उच्च स्थान पर बिठाया जाए, जिस पर कुछ लोग अपने गुणों के कारण प्रतिष्ठित हैं। यह बिना अपवाद समस्त ब्राह्मण समुदाय को महिमामंडित करने की कामयाब कोशिश थी।
स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि मनुस्मृति में मनु ने कहा कि-
अविद्वांच्श्रैव विद्वांश्च ब्राह्मणों दैवतं महत्।
प्रणीतश्चप्रणीतश्च यथाग्निर्दैवतं महत्।
(जिस प्रकार शास्त्र विधि से सामान्य अग्नि और सामन्त अग्नि, दोनों ही श्रेष्ठ देवता हैं उसी प्रकार ब्राह्मण, चाहे मूर्ख हो या विद्वान, दोनों ही रूपों में श्रेष्ठ देवता है।)
इससे भी आगे मनु कहता है कि-
एवं यद्यप्यनिष्टेषु वर्तन्ते सर्वकर्मसु।
सर्वथा ब्राह्मणाः पूज्याः परमं दैवतं हि तत्।।
(इस प्रकार ब्राह्मण भले ही अधम (नीच) कर्मों में प्रवृत्त हों, तथापि ब्राह्मण सब प्रकार से पूज्य हैं क्योंकि वे श्रेष्ठ देवता हैं) बाबा साहेब आगे लिखते हैं ‘यहाँ दुख इस बात का है कि यह धर्म के नाम पर किया गया। लेकिन जिस किसी ने ब्राह्मणवाद को भलीभांति समझ लिया है, उसे इससे दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है। ब्राह्मणवाद के लिए धर्म तो लोभ और स्वार्थ की राजनीति करने के लिए एकमात्र आवरण मात्र हैं।इसी ब्राह्मणवाद को बाद में हिन्दू धर्म नाम मिला और वह हजारों वर्षों तक शूद्रों-अतिशूद्रों और स्त्रियों को नारकीय जीवन जीने के लिए विवश किया।
ब्राह्मणवाद ने अपने का हिन्दुत्व के आवरण में ढंकने की कोशिश की। ब्राह्मणवाद को ही हिन्दुत्व नाम दे दिया गया मध्यकाल में हिन्दुत्व नाम दे दिया गया। मध्यकाल में हिन्दुत्व को कबीर-रैदास ने चुनौती दी, लेकिन इनका प्रभाव सीमित स्तर पर ही पड़ा। आधुनिक काल में जोती राव फुले ने ब्राह्मणवाद के हिन्दुत्ववाद पर कड़ा प्रहार किया। लेकिन जिस व्यक्तित्व ने हिन्दुत्व की नींव हिला दी, उस व्यक्तित्व को आज सारी दुनिया बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के रूप में जानती है, उन्होंने गौतम बुद्ध, कबीर और जोतीराव फुले को अपना गुरू मानते हुए हिन्दुत्व पर चौतरफा हमला बोला। हिन्दुओं के धर्म, संस्कृति, मानसिकता, परम्परा, धर्मग्रन्थों और उनके ईश्वरी अवतारों राम-कृष्ण एवं उनके ऋषियों-महर्षियों पर बाबा साहेब ने इतना तथ्यपरक और तार्किक और न्यायपूर्ण ढंग से बाबा साहेब ने चोट किया कि हिन्दुओं के पुरोधा बौखला उठे,
बाबा साहेब पर चारों ओर से, बौखलाए हिन्दुओं ने आक्रमण शुरू कर दिया। इसमें तथाकथित महात्मा कहे जाने वाले गांधी भी शामिल थे बाबा साहेब की किताब ‘जाति का उच्छेद’ से गांधी इतने मर्माहत हुए कि उन्होंने बाबा साहेब की इस किताब पर एक लम्बा लेख लिखा। बाबा साहेब ने गांधी के इस लेख का भी करारा जवाब दिया। गांधी ने अपने लेख में लिखा कि ‘‘डाॅ. आंबेडकर हिन्दुत्व के लिए एक चुनौती है।” अपने इस लेख में गांधी ने जाति व्यवस्था की जननी वर्णव्यवस्था का खुलकर समर्थन किया। (बाबा साहेब डॉ. भीम राव आंबेडकर 14 अप्रैल 1891-6 दिसंबर 1956)
A campaign for directors across the country for the Protection of Constitution -18 March 2019
आपल्या देशाच्या राज्यघटनेपुढे अलीकडच्या काळात मोठे संकट उभे ठाकले आहे. देशावर सत्ता असलेल्या भारतीय जनता पक्षातर्फे संविधानाची वेळोवेळी पायमल्ली केली जात आहे. हे वेळीच थांबावायचे असेल आणि संविधानाचा सन्मान अबाधित ठेवायचा असेल तर, भाजपला येत्या लोकसभा निवडणुकांमध्ये मतं देऊ नका, भाजपला निवडून देऊ नका; असे जाहीर आवाहनच देशभरातील निर्माते-दिग्दर्शकांनी नागरिकांना केले आहे.
लोकांनी भाजपला मतं का देऊ नयेत, हे सविस्तरपणे स्पष्ट करणारी ऑनलाइन पत्रकाची मोहीमच कला क्षेत्रातील अनेकांनी उघडली असून, त्यात देशभरातील सुमारे १०० हून अधिक प्रसिद्ध व्यक्तिमत्त्वांचा समावेश आहे. ‘देशाच्या संविधानाचा सन्मान राखणाऱ्या पक्षाला निवडून द्या. संविधानाची पायमल्ली करणाऱ्या भाजपला मतं देऊ नका. हा लोकशाहीसाठी अतिशय कठीण काळ आहे. लोकशाही वाचवा,’ अशा आशयाच्या या मोहिमेत दिग्दर्शक आनंद पटवर्धन, अंजली मोंटेरिओ, सनलकुमार शाशिधरन, दीपा धनराज, पुष्पेंद्र सिंह, प्रदीप नायर असे अनेकजण सहभागी आहेत.
या विषयी आनंद पटवर्धन म्हणाले, ‘येत्या निवडणुकांत जर भाजपला पुन्हा निवडून दिले तर, पुढच्या निवडणुका होतील की नाही, याविषयी खात्री बाळगता येणार नाही. ही वेळ येऊ द्यायची नसेल तर, आत्ताच खबरदारी बाळगली पाहिजे. ही आपल्याला शेवटची संधी आहे. भाजप किंवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हे स्वतःला राष्ट्रवादी म्हणवत असले, तरी प्रत्यक्षात मात्र त्यांनी देशासाठी काहीही केलेले नाही.’
‘लोकशाही वाचवा’ मोहीम
‘लोकशाही वाचवा’ या मोहिमेअंतर्गत निर्माते-दिग्दर्शकांनी असे म्हटले आहे की, जो पक्ष लोकशाही मूल्यांचा सन्मान राखेल, अभिव्यक्ती स्वातंत्र्य जपण्यास कटिबद्ध असेल, सेन्सॉरशिप चा वापर दबावतंत्र म्हणून करणार नाही, अशा पक्षाला येत्या निवडणुकीत निवडून दिले पाहिजे. ‘आम्ही सांस्कृतिकदृष्ट्या आणि भौगोलिकदृष्ट्या भले भिन्नभिन्न असलो तरी, आम्ही नेहमीच एकजुटीने राहिलो आहोत. एक राष्ट्र म्हणून जगत आलो आहोत. या एकात्मतेला बाधा पोचवेल अशा पक्षाला मत द्यायला नको,’ असेही यात म्हटले आहे.
हमारे देश के इतिहास में हाल के दिनों में बहुत बड़ा संकट आया है। भारतीय जनता पक्ष द्वारा समय-समय पर भारतीय संविधान का उल्लंघन किया गया है। यदि आप इस समय को रोकना चाहते हैं और संविधान के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहते हैं, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को मत देना, भाजपा को मत चुनना; ऐसी सार्वजनिक अपील देश के उत्पादकों और निर्देशकों द्वारा की गई है।
ऑनलाइन प्रकाशन, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि लोगों को बीजेपी को वोट क्यों नहीं देना चाहिए, कला क्षेत्र में कई लोगों द्वारा खोला गया है और इसमें पूरे देश में 100 से अधिक प्रसिद्ध हस्तियां शामिल हैं। ‘उस पार्टी का चयन करें जो देश के संविधान का सम्मान करती है। बीजेपी को वोट मत दो, जो संविधान को अपमानित कर रही है, बीजेपी को वोट दो। लोकतंत्र के लिए यह बहुत कठिन समय है। सहेजें लोकतंत्र, “आनंद पटवर्धन, अभियान इस बात का खंडन, अंजलि monterio, sanalakumara sasidharana, दीपा धनराज, जिनमें से कई पुष्पेंद्र सिंह, प्रदीप नायर में शामिल हैं के निदेशक।
आनंद पटवर्धन ने कहा, “अगर भाजपा आगामी चुनावों में फिर से निर्वाचित हो जाती है, तो यह आश्वस्त नहीं होगा कि अगले चुनाव होंगे या नहीं। यदि आप इस समय की अनुमति नहीं देना चाहते हैं, तो बस सावधान रहें। यह हमारा आखिरी मौका है। हालांकि भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने खुद को राष्ट्रवादी कहा, लेकिन उन्होंने देश के लिए कुछ नहीं किया।
‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान
‘सहेजें लोकतांत्रिक’ इस गतिविधि है, जो पार्टी लोकतंत्र के मूल्यों का सम्मान होगा कहते हैं निर्माता-निर्देशकों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है, न कि सेंसरशिप के dabavatantra उपयोग के रूप में प्रतिबद्ध है, इस तरह की पार्टियों आने वाले चुनावों में निर्वाचित किया जाना चाहिए। ‘हालांकि हम सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से अलग हैं, हम हमेशा एकजुट रहे हैं। हम एक राष्ट्र के रूप में रह रहे हैं। ऐसी पार्टी को वोट न दें जो इस एकता में बाधा बनेगी। ”
आये दिन इन राजकारनियो की क्राइम की खबरे आती रहती है जैसे इन्हे राजकारण की मस्ती आ गयी है, मस्तवाल हो गए है ये. ये अपना उद्देश्य छोड़कर अन्य कामो को अंजाम दे रहे है ऐसा दृश्य पुरे भारत में नजर आ रहा है। जैसे की ,,,,

संजय पाटिल : नागपुर प्रेस मीडिया : २१ जुलाई २०२०: नागपुर : चायनीज की दुकान पर मारामारी करने पर कपिल नगर पुलिस ने नगरसेवक दिनेश वसन्तलाल यादव उम्र ३८ , और उनके भाई सुरेश यादव को बंदी बनाया। दिनेश यादव यहाँ प्रभाग क्रमांक दो कपिल नगर के कांग्रेस के नगरसेवक है. रजत सोनटक्के जख्मी आदमी का नाम है। रजत का पावरग्रिड चौक में चायनीज का ठेला है। रविवार को रातमे सौरभ यादव उसके ठेले पर गया उसका रजत के साथ बाचाबाची हुयी , इसी दौरान नगरसेवक दिनेश यादव , उनका भाई सुंदरेश यादव ओर शिव यादव वहा आये , उन्होंने रजत के साथ मारामारी की ,रजत ने कपिल नगर पोलिस स्टेशन में तकरार की पुलिस ने यादवद बंधुओ के खिलाप एफआईआर दखल किया पुलिस ने दिनेश ओर सुंदरेश को अटक किया, शिव को फरार घोषित किया पुलिस उसकी तलाश में है.
BJP कार्यकर्ता है साहिल, कई नेता हैं बिजनेस पार्टनर : गृहमंत्री

नागपुर. धोखाधड़ी और ब्लैकमेल करके अवैध रूप से प्रापर्टी जमाने वाले साहिल सैयद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस द्वारा साहिल के खिलाफ गहन जांच की मांग पर गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पलटवार करते हुए साहिल को भाजपा कार्यकर्ता बताया. साथ ही लिखा कि भाजपा के कई नेताओं का बिजनेस पार्टनर भी है. हालांकि न्यायालयीन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली आडियो रिकार्डिंग मामले की जांच जारी है. उधर, तहसील थाने में वरिष्ठ भाजपा पार्षद दयाशंकर तिवारी द्वारा साहिल पर एक और एफआईआर दर्ज की गई. दूसरी तरफ, साहिल अब भी फरार है.
पूर्व विधायकों का करीबी
गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने जवाब में फडणवीस को बताया कि साहिल के भाजपा के पूर्व विधायकों से बहुत करीबी संबंध है. उन्होंने ऊर्जा मंत्री रह चुके चंद्रशेखर बावनकुले और दक्षिण पश्चिम नागपुर के पूर्व विधायक सुधाकर देशमुख का नाम लिखा. उन्होंने कहा कि साहिल के इन दोनों के साथ काफी घनिष्ठ संबंध हैं और वह दोनो पूर्व विधायकों का बिजनेस में भागीदार भी है. यही भाजपा कार्यकर्ता अब अपनी ही पार्टी के नेताओं को हनीट्रैप करने का प्रयासा कर रहा है. यह बेहद आश्चर्यजनक बात है. दूसरी नजर में यह आपकी पार्टी का आंतरिक मामला दिखता है. हालांकि न्यायालय व्यवस्था को मैनेज करने वाली आडियो क्लीप के संबंध में जांच जारी है.
झूठ बोल रहे गृहमंत्री, माफी मांगे : बावनकुले
साहिल को अपना बिजनेस पार्टनर बताये जाने पर चंद्रशेखर बावनकुले ने गृहमंत्री अनिल देशमुख को झूठा करार देते हुए माफी की मांग कर ली. बावनकुले ने विपक्ष के नेता फडणवी को पत्र लिखकर अपने पर लगे आरोपी का खंडन किया. उन्होंने बताया कि स्वयं गृहमंत्री द्वारा लिखित रूप से साहिल को मेरा बिजनेस पार्टनर बताया है. यह पत्र सफेद झूठ से भरा है. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री द्वारा यह आरोप तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अब या तो गृहमंत्री मेरे और आरोपी साहिल के बीच बिजनेस पार्टनरशिप का सबूत दें या फिर तुरंत माफी मांगे.
अब तहसील में FIR, आरोपी अब भी फरार
उधर, वायरल हनीट्रैप आडियो क्लीप में अपने खिलाफ हनीट्रैप की साजिश की बात कहे जाने पर दयाशंकर तिवारी ने तहसील थाने में साहिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. तिवारी ने अपनी पुलिस शिकायत में बताया कि उक्त आडियो रिकार्डिंग में एक आवाज साहिल की भी है. साहिल किसी काम से मेरे आफिस में आया था. इसी के चलते मेरी उससे पहचान हुई थी. इससे ज्यादा कुछ नहीं. डा. गंटावार के खिलाफ मेरे द्वारा जारी कार्यवाहियों के चलते उसके साथी साहिल मेरे खिलाफ हनीट्रैप जैसा षडयंत्र रच रहा था. इससे मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और मेरी जान को भी खतरा है.
गृहमंत्री का पत्र गैरजिम्मेदाराना : दटके
भाजपा के दयाशंकर तिवारी एवं महापौर संदीप जोशी को हनी ट्रेप में फंसाने के आडियो टेप में मौजूद आवाज जिस साहिल सैयद की है, उसे पकड़ कर जांच करने के उलट गृहमंत्री अनिल देशमुख जैसे जवाबदार व्यक्ति जनता और केस को गुमराह करने वाले गलत पत्र लिखकर भाजपा से संबंध होने का दावा कर रहे हैं जबकि असलियत में वह सत्ताधारी पार्टी का कार्यकर्ता है. आंदोलन करते हुए उसके गले में दुपट्टा दिखाई दे रहा है जिससे स्पष्ट है कि उसका किस पार्टी से संबंध है. दटके ने सरकार से मांग की है कि आडियो टेप की निष्पक्ष जांच करे और अपराधी पर कार्रवाई हो.
नागपुर. भाजपा नेताओं को हनी ट्रैप में फंसाने की ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद चर्चा में आए भूमाफिया और फिरौतीबाज साहिल सैय्यद भांडा फूटने के बाद नागपुर से फरार हो गया था. जानकारी मिली है कि 5 दिन तक वह इंदौर में ही एक रिश्तेदार के यहां छुपा था. सोमवार को जांच अधिकारी इंस्पेक्टर संतोष खांडेकर ने उसे न्यायालय में पेश किया. अदालत ने उसे 22 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. साहिल के खिलाफ शहर में 4 मामले दर्ज हो चुके है.
पांचपावली थाने में दर्ज मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई. पुलिस ने न्यायालय को बताया कि साहिल के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज है. उसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति पर अवैध कब्जा जमाया है. पीड़ितों से फिरौती मांगता है. उसके घर की तलाशी लेने पर साहिल के 3 पैन कार्ड मिले. नामों में बदलकर उसने पैन कार्ड बनाए थे. इन पैन कार्ड का उपयोग उसने कौन-कौन संपत्ति के व्यवहार में किया यह पता लगाया जाना है. मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और गिरफ्तारी करनी है. फरार रहते हुए वह कहां-कहां गया और उसकी मदद किन लोगों की इसका पता लगाने के लिए 10 दिन की पुलिस हिरासत मांगी गई. बचावपक्ष के अधिवक्ता कमल सतुजा, कैलाश डोडानी और उमाशंकर अग्रवाल ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि प्रापर्टी साहिल के नाम पर नहीं है और न वहां उसका पजेशन है.
गिरीश गिरीधर और नीलीमा जायसवाल का प्रापर्टी पर कब्जा है. प्रापर्टी का विवाद दीवानी स्वरूप का है. साहिल को केवल इसमें फंसाया जा रहा है. उसका प्रापर्टी से कोई लेना-देना नहीं है. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने साहिल को 22 जुलाई तक पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए. इसी बीच जानकारी मिली है कि साहिल ने एक नायाब तहसीलदार को भी ब्लैकमेल करके लाखों रुपये ऐंठे है. पहले उसे एसीबी ट्रैप में फंसाया और बाद में छुड़ाने के लिए मोटी रकम ली. यह अधिकारी भी अब पुलिस से शिकायत कर रहा है.
पुलिस जांच पर पूरा भरोसा- देवेंद्र फडणवीस
रविवार को गृहमंत्री अनिल देशमुख द्वारा जारी किए गए पत्र के उत्तर देते हुए विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गृहमंत्री ने इस मामले की गंभीरता को समझा इसके लिए वो उनके आभारी है. इस मामले में गंभीर आरोप और वायरल ऑडियो क्लिप की उच्चस्तरीय जांच हो केवल इतनी ही इच्छा है. गृहमंत्री ने अपने पत्र बताया कि प्रकरण की जांच शहर के ज्वाइंट सीपी कर रहे है. तो उनसे ही जांच करवाए. पुलिस विभाग पर अविश्वास होने का कोई कारण नहीं है. केवल प्रकरण की गंभीरता से और निष्पक्ष जांच हो यही अपेक्षा है.

खुदको राकां का नेता बताने वाले साहिल सैय्यद पर धोखाधड़ी के और भी मामले दर्ज हो सकते है. बताया जाता है कि वह अलग-अलग नामों से जमीन के सौदे करता था. विवाद खड़ा कर या तो संपत्ति हथिया लेता था या अपने ही पंटरों के जरिए सस्ते दाम में रजिस्ट्री करवा लेता था. जांच में पुलिस के पास कुछ सनसनीखेज सबूत हाथ लगे है.
ज्ञात हो कि बुधवार को पुलिस के 2 दस्तों ने साहिल सैय्यद और नीलीमा जायसवाल के घर पर छापेमारी की थी. पुलिस ने साहिल घर की तलाशी भी ली. जांच में कुछ आधार कार्ड पुलिस के हाथ लगे. ये सभी आधार कार्ड अलग-अलग नामों पर थे, लेकिन फोटो साहिल का ही लगा था. कुछ दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे है. इससे पता चलता है कि जमीन के विवादों में साहिल फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करता था. अब पुलिस ने साहिल की गिरफ्तारी के लिए गतिविधियां तेज कर दी है.
साहिल के रैकेट में काम करने वालों से भी पूछताछ की जा रही है. साहिल के साथ नीलीमा भी अपने घर से फरार है. बताया जाता है कि एलेक्सिस अस्पताल से गोपनीय दस्तावेज चोरी करने के बाद उसे नौकरी से निकाला गया था. बाद में उसे न्यू इरा अस्पताल में नौकरी मिल गई. वहां भी कोई साजिश रचने का प्लान था, लेकिन नए विवाद सामने आते ही उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया. एलेक्सिस अस्पताल के स्टिंग आपरेशन में भी साहिल ने नीलीमा जायसवाल की मदद ली थी.
नीलीमा की रिश्तेदार हेमवती तिवारी को सोनोग्राफी करवाने के लिए अस्पताल में भेजा गया था. इस पूरे प्रकरण में डा. प्रवीण गंटावार की भूमिका संदेहास्पद है, लेकिन अब तक इस संबंध में गंटावार से पूछताछ नहीं हुई है. पार्षद दयाशंकर तिवारी ने अपनी शिकायत में साहिल, उसके पंटर और डा. गंटावार के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है. तहसील पुलिस ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है.

नागपुर. दूकान बेचने के नाम पर देवा शिर्के से 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में शिवसेना के निष्काशित शहर प्रमुख मंगेश कड़व को न्यायालय ने जेल भेज दिया है. जानकारी मिली है कि सोमवार को फिर पुलिस उसे गिरफ्तार करेगी. अब उससे हुड़केश्वर थाने में दर्ज मामले में पूछताछ होगी. 30 जून को पुलिस ने रघुजीनगर निवासी देवानंद बाबासाहब शिर्के (48) की शिकायत पर कड़व के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया था. मंगेश ने नवंबर 2013 में अपनी एक दूकान बेचने निकाली थी. 21.50 लाख रुपये में दूकान का सौदा तय हुआ. देवा ने नकद और चेक द्वारा कड़व को 18 लाख रुपये दिए और करारनामा भी किया. बाकी 3.50 लाख रुपये रजिस्ट्री के समय देने का तय हुआ था.
करारनामे के अनुसार देवा ने कई बार कड़व को रजिस्ट्री करवाकर बकाया रकम लेने को कहा, लेकिन वह टालमटोल करता रहा. बाद में देवा को पता चला कि उसी दूकान को कड़व ने बैंक में गिरवी रखकर 50 लाख रुपये का कर्ज ले लिया है. 9 जुलाई को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया. 10 दिन की पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद पुलिस ने 2 दिन की पुलिस हिरासत मांगी, लेकिन न्यायालय ने उसे एमसीआर पर जेल भेजने के आदेश दिए.
पुलिस ने न्यायालय से उसे हुड़केश्वर थाने में दर्ज प्रकरण में कस्टडी देने की मांग की, लेकिन न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत अदालत ने पुलिस को प्रोडक्शन वारंट पर दोबारा गिरफ्तार करने को कहा. पुलिस को प्रोडक्शन वारंट भी मिल गया है. अब सोमवार को पुलिस उसे दोबारा गिरफ्तार करेगी. दिनेश आदमने के साथ की गई धोखाधड़ी के मामले में उससे पूछताछ की जानी है. कड़व के खिलाफ अब तक 8 मामले दर्ज हो चुके है.
पुलिस को भी कोरोना का डर
एक पुलिसकर्मी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय ने कड़व को जेल भेज दिया. अब पुलिस को उसे प्रोडक्शन वारंट पर जेल से गिरफ्तार करना होगा. लेकिन कोरोना का डर तो पुलिसकर्मियों को भी सता रहा है. जेल में बढ़ रहे कोरोना के मामलों की वजह से पुलिस भी दहशत में है. पुलिस को डर है कि यदि कड़व जेल जाकर कोरोना से संक्रमित हो गया तो जांच में जुटी टीम को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
मंगेश कड़व और उसकी पत्नी डा. रुचिता कड़व के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग गया है. बारीकी से जांच करने पर उसके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हो सकते है. इसी बीच एक नई शिकायत सामने आई. कड़व की पत्नी रुचिता होमियोपैथी डाक्टर है. गोपालनगर के स्नेह अपार्टमेंट में रुचिता का शौर्य होमियो क्लिनिक है.
बताया जाता है कि जिस जगह पर रुचिता का क्लिनिक चल रहा है. उस जगह पर भी कड़व ने अवैध तरीके से कब्जा जमा लिया है. पहले तो दूकान मालिक से किराए पर दूकान ली गई. कुछ महीनों तक किराया भी दिया. बाद में किराया देना बंद कर दिया. 8 वर्षों से कड़व दंपति ने दूकान का किराया नहीं दिया और अवैध तरीके से दूकान पर कब्जा जमा रखा है. दूकान मालिक ने कई बार कब्जा हटाने की मांग की लेकिन कड़व धमकाकर चुप होने पर मजबूर कर देता था. इसी तरह हिंगना टी प्वाइंट पर भी एक दूकान में कब्जा जमाए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है.
पुलिस संबंधित लोगों का पता लगा रही है. वाड़ी में भी मंगेश कड़व ने एक व्यक्ति से 1 करोड़ रुपये में जमीन का सौदा किया था. बयाने के तौर पर 3 लाख रुपये देकर एग्रीमेंट किया था. बाद में इस जमीन पर अपने साथी और गुंडों को ले जाकर कब्जा करने का प्रयास किया था, लेकिन सामने वाला उसपर भारी पड़ गया. वह भी शिवसेना का ही पदाधिकारी निकला और कड़व को वहां से भागना पड़ा. इस तरह कई जमीनों पर कड़व ने कब्जा जमाया है. कड़व से जुड़े ज्यादातर मामले प्रापर्टी डिसप्यूट के है. उसके रुतबे के चलते लोगों ने डर के मारे शिकायत नहीं की. डीसीपी गजानन राजमाने ने नागरिकों से अपील की है कि बिना डरे कड़व के खिलाफ क्राइम ब्रांच से शिकायत करे.
प्रापर्टी डीलिंग की आड़ में धोखाधड़ी का रैकेट चलाने वाला मंगेश कड़व अब अपनी ही करनी के कारण जाल में फंसता जा रहा है. अपने हर व्यवहार की एंट्री वह कागजों पर करके रखता था. इसीलिए अब उसका पूरा कच्चा-चिट्ठा बाहर आ रहा है. पुलिस ने उसके घर और कार्यालय में छापा मारकर बड़े पैमाने पर दस्तावेज जब्त किए थे. जिन लोगों के साथ उसने प्रापर्टी के सौदे किए थे. उन सभी को पुलिस ने सूचनापत्र देकर कार्यालय बुलाया. अब तक 12 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके है.
इसमें पता चला कि मंगेश बयाना राशी देकर स्टैंपपेपर में कच्चा करारनामा करके प्रापर्टई अटका लेता था. बेचने वाले को महज 50,000 रुपये देता था, लेकिन धोखे से स्टैंपपेपर में मोटी रकम लिख लेता था. बेचने वाले को दस्तावेज नहीं मिलते थे. रजिस्ट्री के समय विवाद कर लोगों को धमकाता था. ऐसे कुछ मामले सामने आए है. कड़व अवैध तरीके से साहूकारी का भी काम कर रहा था. इसी तरह उसने रामदासपेठ के व्यापारी को भी चूना लगाया. 10 लाख रुपये ब्याज पर उधार देकर 24 लाख रुपये की गाड़ी गिरवी रख ली.
अवैध तरीके से वसूली भी की और गाड़ी अपने नाम पर करवा ली. व्यापारी से ब्याज की रकम तो ली. उलटा बैंक में गाड़ी गिरवी रखकर कर्ज ले लिया. उसके 15.23 लाख रुपये भी व्यापारी से भरवाए. बुरी तरह फंसे व्यापारी ने मामले की शिकायत पुलिस से की और बजाजनगर में कड़व के खिलाफ सातवां मामला दर्ज हुआ.
मुंबई के व्यापारी ने की शिकायत
बताया जाता है कि केवल नागपुर ही नहीं बल्कि मुंबई में भी कड़व ने कई लोगों को काम करवाने के नाम पर लाखों रुपयों की चपत लगाई है. एक महिला से सिनेमा हॉल का लाइसेन्स रिन्यू करवाने के लिए कड़व ने 30 लाख रुपये लिए थे. उसका काम भी नहीं किया और पैसे भी नहीं लौटाए. इसके अलावा मुंबई के एक इंपोर्ट-एक्सपोर्ट व्यापारी के साथ भी ठगी की.
दशरथ नामक व्यापारी ने बुधवार को पुलिस से संपर्क किया. दशरथ ने बताया कि उनके दस्तावेजों का काम करवाने के लिए कड़व ने 1 वर्ष पहले 16 लाख रुपये लिए थे. काम भी नहीं किया और रकम भी नहीं लौटाई. जल्द ही दशरथ नागपुर आकर कड़व के खिलाफ शिकायत करेंगे.
धोखाधड़ी, संपत्ति पर अवैध कब्जे और फिरौती मांगने के मामले में फंसे शिवसेना के निष्काशित शहर प्रमुख मंगेश कड़व के साथ ही पुलिस ने अब उससे जुड़े लोगों पर भी शिकंजा कसना शुरु कर दिया है. कड़व ने न केवल अपनी पत्नी और भाई के नाम पर बल्कि दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर भी प्रापर्टी के सौदे किए थे. दस्तावेजों की जांच में पुलिस को बड़े पैमाने पर पार्टनरशिप डीड भी मिली है. सभी दस्तावेज संपत्ति से जुड़े है, जिनमें कड़व के दोस्तों और रिश्तेदारों का भी नाम है. इसीलिए अब पुलिस उनसे भी पूछताछ करने वाली है.
जानकारी मिली है कि क्राइम ब्रांच ने कड़व से जुड़े लगभग 3 दर्जन लोगों को नोटिस देकर कार्यालय में हाजिर होने को कहा है. प्राथमिक जांच के दौरान पता चला था कि कड़व ने अपनी पत्नी रुचिता और भाई के नाम पर काफी संपत्ति ले रखी है, लेकिन घर और कार्यालय से बरामद किए गए दस्तावेजों को खंगालने पर अन्य लोगों का भी नाम सामने आया. पुलिस को संदेह है कि कड़व पूरा रैकेट बनाकर ठगी का धंधा करता था.
लोगों से प्रापर्टी बेचने के नाम पर सौदे करता था. पैसे लेने के बाद मुकर जाता था. उसके द्वारा बेची और खरीदी गई अधिकांश संपत्ति विवादों में है. डीसीपी गजानन राजमाने के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर भारत क्षिरसागर मामले की जांच कर रहे है. भारत ने बताया कि कड़व के घर और कार्यालय में बहुत से स्टैंप पेपर भी मिले है. कई लोगों के साथ उसने कच्चे करारनामे बनाए है. इन दस्तावेजों में जिन लोगों के नाम दर्ज है उन्हें भी सूचनापत्र दिया गया है. इससे कड़व की धोखेबाजी के कच्चे-चिट्ठे खुल सकते है. कई लोग अब भी शिकायत करने से बच रहे है. सभी दस्तावेजों को बारीकी से खंगाला जा रहा है. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है पुलिस लोगों को पूछताछ के लिए बुला रही है.
विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग से लेकर दूसरों की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा जमाने के कई मामलों में आरोपी मंगेश कढ़व से पुलिस द्वारा कड़ी पूछताछ जारी है. शिवसेना के निष्कासित शहर अध्यक्ष कढ़व पर प्रापर्टी के गबन से लेकर फर्जी लोन समेत कई मामले दर्ज हैं. करीब 8 दिनों की लुकाछिपी के बाद क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार किया.
ज्ञात हो कि कढ़व पर शहर के 4 थानों में 5 एफआईआर दर्ज है. इनमें अपनी ही पार्टी के एक नेता को विधानसभा की टिकट दिलाने के लिए 25 लाख रुपये मांगने से लेकर देवानंद शिर्के की दूकान हजम कर उसके आत्महत्या का प्रयास करने के लिए मजबूर करने जैसे मामले मुख्य रूप से शामिल हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 8 दिन की हिरासत में पुलिस से कढ़व पर कोई नरमी बरतने की तैयारी में नहीं है. बताया जा रहा है कि 5 मामले को कढ़व की सिर्फ बानगी भर है. उसके कई अन्य किस्से भी हैं जो सामने आने के हैं.
भाई को भी घसीटा
कढ़व की फरारी के दौरान पुलिस ने उसकी पत्नी रूचिता को भी गिरफ्तार किया था. पीसीआर के बाद उसे जमानत मिल गई. हालांकि शक जताया जा रहा है कि उसके भी कढ़व के कारनामों के बारे में पूछताछ की गई. उधर, गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि कढ़व ने वैध-अवैध रूप से अपने भाई के नाम काफी संपत्ति जुटाई है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, कढ़व अपने बजाय भाई और घर के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्ति जमा करता था. ऐसे में उसके भाई के अलाव और भी नाम सामने आ सकते हैं. बताया जा रहा है कि पार्टी में भी कई लोग कढव की ढगी के शिकार हुए हैं लेकिन बदनामी के डर से सामने नहीं आ रहे.
दूसरों की संपत्ति पर अवैध तरीके से कब्जा जमाकर फिरौती मांगने सहित धोखाधड़ी के मामलों में पकड़े गए शिवसेना के निष्काशित शहर अध्यक्ष मंगेश कड़व की बुधवार रात गिरफ्तारी से पुलिस को राहत की सांस मिली. गुरुवार को जांच अधिकारी इंस्पेक्टर भारत क्षिरसागर ने उसे न्यायालय में पेश किया. अदालत ने 8 दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की है. इसी दौरान पता चला है कि कड़व ने अपने भाई के नाम पर लाखों रुपये की प्रापर्टी ले रखी है. अब पुलिस सभी संपत्ति के दस्तावेज खंगालने में लगी है.
कड़व के भाई का व्यवसाय और उसकी आय के हिसाब से कितनी संपत्ति है इन सभी बातों का पता लगाया जा रहा है. लगातार पुलिस की गिरफ्त से बच रहे कड़व को पुलिस ने बुधवार रात जाल बिछाकर गिरफ्तार किया. गुरुवार की दोपहर प्रथम श्रेणी न्याय दंडाधिकारी विनायक पाटिल की अदालत में उसे पेश किया गया. कड़व के घर से भारी संख्या में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए. इसके अलावा 3 महंगी कार और 1 बाइक भी पुलिस ने जब्त की.
कड़व पर संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमाकर फिरौती वसूलने, धोखाधड़ी करके लोगों को धमकाने सहित 5 मामले दर्ज है. सभी मामले आर्थिक लेन-देन से जुड़े है. इसीलिए सभी दस्तावेजों की जांच करने, इन कामों में और कितने लोग शामिल थे उनका पता लगाने. कड़व और उसके रिश्तेदारों की संपत्ति की जांच करने सहित विविध मुद्दों पर पुलिस ने 10 दिन की पुलिस हिरासत मांगी.
बचावपक्ष के अधिवक्ता प्रकाश जायसवाल ने न्यायालय को बताया कि सारे में प्रापर्टी से जुड़े हुए है. इसमें से कुछ मामले दीवानी स्वरूप के है. न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कड़व को 8 दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की. इंस्पेक्टर क्षिरसागर ने बताया कि कड़व ने अपने भाई के नाम पर काफी संपत्ति जमाई है. अवैध तरीके से कमाई गई रकम का उपयोग भाई के नाम पर किया गया है. इसीलिए सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
ओर प्रीति दास, डॉ. प्रवीण गंटावार जैसे अनेक है……………….. जो राजकरण की आड़ में क्राइम करते है. जो राजकरण की आड़ में क्राइम करते है. ये तो सिर्फ नागपुर की बात है आप तो जानते ही है देश की अनन्य कोने में क्या क्या हो रहा है
“पीएम केअर व्हेटिलेटर्सं घोटाळा”
देश में कोरोना की घुसपैठ के बाद, स्वास्थ्य सुविधाओं पर तनाव था। वहीं, कोरोना के रोगियों के लिए चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी थी। कोरोना वॉर में विभिन्न स्तरों पर काम करने के लिए मोदी सरकार द्वारा पीएम केयर फंड शुरू किया गया था। केंद्र सरकार ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए वित्तीय योगदान की अपील की थी।
कांग्रेस ने पीएम केयर फंड से खरीदे गए वेटिलेटर्स के लेनदेन पर संदेह जताया। धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। “पीएम केयर वेटिलेटर्स घोटाले पर एक सवाल है। सरकार ने प्रत्येक वेंटिलेटर के लिए 4 लाख रुपये खर्च किए हैं। आपूर्तिकर्ता ने वेंटिलेटर की कीमत 1.5 लाख रुपये रखी है। तो क्यों केंद्र सरकार ने प्रत्येक वेंटिलेटर पर 2.5 लाख रुपये खर्च किए? क्या बीजेपी का गणित कच्चा है, क्या इसमें भी कोई साज़िश है? ”, कांग्रेस ने आरोप लगाया है।
कई लोगों ने आगे आकर पीएम केयर फंड में मदद की थी। पीएम केयर फंड के माध्यम से उठाए गए धन के साथ, केंद्र सरकार ने चिकित्सा कर्मचारियों सहित रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक उपकरण खरीदे। इसमें पीपीई किट, मास्क, वेंटिलेटर और अन्य सामग्री शामिल हैं।