सालेकसा में कालीसराड़ बांध की दीवार लीकेज: संजय पाटिल

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संजय पाटिल: नागपुर प्रेस मीडिया: 20 जुलाई 2020 : सालेकसा. आरक्षित जलाशय रखकर पीने के पानी सहित खेती की सिंचाई के लिए उपयोगी पड़ने वाले सालेकसा तहसील के कालीसराड़ जलाशय की देखभाल और दुरुस्ती की ओर संबंधित विभाग ने पूर्ण रूप से दुर्लक्ष किया है. जिससे जलाशय की दीवार में लीकेज होने से पानी बह रहा है. जलाशय के फूटने का खतरा निर्माण हो गया है.

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे बिजेपार ग्रापं अंतर्गत कालीसराड़ जलाशय है. जलाशय के नीचे से बहने वाला नाला सालेकसा व देवरी तहसील को विभाजित करता है. अति संवेदनशील क्षेत्र वाले इस जलाशय के पानी का सिंचाई के लिए उपयोग करने स्वतंत्र नहर नहीं है. जलाशय के पानी की जरूरत पड़ने पर पानी सीधे पूजारीटोला जलाशय में छोड़ा जाता है. इसके बाद आवश्यकता अनुसार पानी का वितरण किया जाता है, किंतु इस जलाशय की देखभाल व दुरुस्ती की ओर सतत दुर्लक्ष किया गया है.

जलाशय फूटने का सताने लगा डर 
जिससे इस जलाशय के पानी का उपयोग कम व्यर्थ अधिक बह रहा है. लाखों का पानी बिना उपयोग समाप्त हो जाता है. जलाशय के पानी का उपयोग नहीं किया गया, फिर भी पानी का स्तर 30 से 35 प्रश नीचे आता है. अर्थात लीकेज की वजह से बड़ी संख्या में पानी व्यर्थ बह रहा है. लीकेज की ओर सतत दुर्लक्ष करने पर जलाशय फूटने की संभावना से इंकार नहीं किया सकता.

जलाशय में कुल 4 दरवाजे हैं. जिसमें एक टीएमसी से अधिक पानी संग्रह की क्षमता इस जलाशय की है. जलाशय से पानी छोड़ा जाता है तब दाए बाजू की दीवार में बने लीकेज से बड़ी संख्या में पानी व्यर्थ बहता है. स्थिति में लीकेज और बड़ा हो गया है और खतरा भी बढ़ेगा. इस जलाशय का पानी सुरक्षित रहा तो दोनों मौसम में 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र की खेती को पर्याप्त पानी मिल सकता है. जलाशय का पानी विशेष तौर पर पीने के लिए आरक्षित रखा जाता है. जबकि ग्रीष्मऋतु शुरू होने तक कई बार जलाशय खाली हो जाता है. जलाशय में अंत तक जल संग्रहित रहे इसके लिए प्रयास करने की जरूरत है.

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